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MP की कस्टम हायरिंग सेंटर योजना दे रही किसानों को सस्ते यंत्र और ग्रामीण युवाओं को रोजगार

newz@gmail.com | Sep 28, 2026, 19:25 IST

मध्य प्रदेश में कस्टम हायरिंग सेंटर योजना किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। योजना के तहत युवा कृषि यंत्र केंद्र खोलकर रोजगार पा सकते हैं। किसानों को भी कम किराए पर ट्रैक्टर, थ्रेसर और अन्य मशीनें मिल रही हैं।

कस्टम हायरिंग केंद्र

मध्य प्रदेश में खेती को आसान बनाने के लिए सरकार कस्टम हायरिंग सेंटर योजना चला रही है। इस योजना से किसानों और ग्रामीण युवाओं दोनों को फायदा मिल रहा है। किसानों को अब खेती के लिए महंगे कृषि यंत्र खरीदने की जरूरत कम हो रही है। वे किराए पर जरूरी मशीनें लेकर खेती का काम पूरा कर सकते हैं।

कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, प्लाऊ और सीडड्रिल जैसे यंत्र मिलते हैं। इसके अलावा थ्रेसर सहित कई अन्य कृषि उपकरण भी उपलब्ध होते हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खेती में बड़ी राहत मिल रही है। समय पर मशीन मिलने से बुवाई और कटाई जैसे काम जल्दी पूरे हो जाते हैं।

युवाओं को मिल रहा रोजगार

इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। युवा अपना कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करके कृषि सेवा का व्यवसाय कर सकते हैं। सरकार की ओर से योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी जाती है। इसके जरिए युवा कृषि यंत्र खरीदकर किसानों को किराए पर उपलब्ध करा सकते हैं।

किसानों से मिलने वाले किराए से युवाओं को नियमित आय का जरिया मिलता है। वहीं गांव में कृषि सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। कृषि विभाग की ओर से युवाओं को योजना से जोड़ने के लिए संभाग और जिला स्तर पर शिविर भी लगाए जा रहे हैं।

योजना की पात्रता क्या है

कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने के लिए आवेदक का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। आवेदक की उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक का कक्षा 12वीं पास होना अनिवार्य है। योजना में किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ (Farmer Producer Organization) और सहकारी समितियां भी आवेदन कर सकती हैं।

आवेदन करने वाले व्यक्ति या संस्था को निर्धारित 10 हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होता है। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाती है। कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से पात्र आवेदकों का चयन किया जाता है। चयनित युवाओं, किसानों और संस्थाओं को केंद्र खोलने की अनुमति मिलती है।

तकनीक से बढ़ेगी खेती

कृषि क्षेत्र में मशीनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। किसानों को अब खेती के हर चरण के लिए अलग-अलग मशीनें खरीदने की जरूरत नहीं होती। वे जरूरत के अनुसार यंत्र किराए पर लेकर खर्च कम कर सकते हैं।

कृषि विभाग के उप संचालक डॉ. राजेश त्रिपाठी ने बताया कि यह योजना किसानों के लिए काफी उपयोगी है। उन्होंने कहा कि योजना से किसानों को सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि एफपीओ और सहकारी समितियों को भी योजना में शामिल किया गया है। इससे ज्यादा किसानों तक कृषि सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

ऐसे करें आवेदन

कस्टम हायरिंग सेंटर योजना में आवेदन ऑनलाइन किया जाता है। इसके लिए कृषि अभियांत्रिकी पोर्टल chc.mpdage.mp.gov.in या chc.mpdage.org के माध्यम से आवेदन जमा करना होता है। आवेदक को ऑनलाइन फॉर्म भरने के साथ जरूरी दस्तावेज भी अपलोड करने होते हैं। सभी पात्र आवेदनों की लॉटरी के जरिए चयन प्रक्रिया पूरी होती है।

चयनित आवेदकों को सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता और अनुदान का लाभ दिया जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर तैयार हो रहे हैं।

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