महाराष्ट्र सरकार फसल नुकसान झेल रहे किसानों के लिए राहत का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई किसानों की फसल खराब हुई है। लेकिन वे निर्धारित सूखा मानकों में शामिल नहीं हो सके हैं।
ऐसे किसानों को राहत से वंचित नहीं रखा जाएगा। इसके लिए नुकसान का आकलन मंडल यानी रेवेन्यू सर्किल स्तर तक कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य वास्तविक नुकसान वाले किसानों तक सहायता पहुंचाना है।
265 तालुके सूखा प्रभावित
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह राज्य के करीब 74 प्रतिशत हिस्से के बराबर है। इन क्षेत्रों में फसल नुकसान के पंचनामे और सर्वे के आधार पर सहायता तय की जाएगी।
सरकार के अनुसार कई इलाकों में फसल प्रभावित हुई है। लेकिन वे तय सूखा मानकों में शामिल नहीं हो पाए। ऐसे क्षेत्रों के किसानों की स्थिति की अलग से जांच की जाएगी। सरकार अब यह देखना चाहती है कि किन क्षेत्रों में वास्तव में फसल नुकसान हुआ है।
कैबिनेट में उठा मुद्दा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने यह मुद्दा उठाया। मंत्रियों ने ऐसे क्षेत्रों के किसानों के लिए मदद की मांग की थी। इन क्षेत्रों में फसल नुकसान हुआ है, लेकिन निर्धारित नियमों के कारण उन्हें सूखा प्रभावित सूची में जगह नहीं मिली।
इसके बाद सरकार ने ऐसे मामलों की अलग से जांच कराने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने इस प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है।
मौसम बदलाव बना वजह
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल मौसम का पैटर्न सामान्य नहीं रहा। सीजन के शुरुआती दो महीनों में कई क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इसके बाद करीब दो महीने तक बारिश नहीं हुई। इस असमान मौसम के कारण कई इलाकों में फसलों को नुकसान हुआ।
सरकार के अनुसार सामान्य सूखा मानकों से हर नुकसान का आकलन करना मुश्किल हो गया। इसी कारण अब मंडल स्तर तक स्थिति की जांच की जाएगी।
मंडल स्तर पर होगा सर्वे
सरकार अब प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत सर्वे कराएगी। जरूरत पड़ने पर मंडल स्तर तक फसल नुकसान की स्थिति देखी जाएगी। इसके आधार पर किसानों को राहत देने का फैसला लिया जाएगा।
कैबिनेट की उपसमिति को अलग-अलग तालुकों की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति क्षेत्रों की स्थिति और नुकसान की जानकारी जुटाएगी। इसके बाद राहत को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।
किसानों को मिलेगी पंचनामे की जानकारी
मुख्यमंत्री ने फसल नुकसान के पंचनामे को लेकर भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने खेत के सर्वे की जानकारी मिलनी चाहिए। किसान यह जान सकेंगे कि पंचनामे में नुकसान कितना दर्ज किया गया है। अगर सर्वे के समय किसान मौजूद नहीं थे, तो ऐसे मामलों पर भी विचार किया जाएगा। कैबिनेट की उपसमिति ऐसे मामलों पर उचित निर्णय लेगी।
राहत प्रक्रिया पर किसानों की नजर
फसल नुकसान के बाद किसान अब सरकार की राहत प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। बारिश और मौसम में बदलाव ने कई क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ाई है। सरकार का कहना है कि वास्तविक नुकसान के आधार पर सहायता देने की कोशिश की जाएगी। मंडल स्तर तक सर्वे होने से स्थानीय स्तर पर नुकसान की स्थिति सामने आ सकेगी। इससे उन किसानों को भी राहत मिलने की संभावना है, जिनकी फसल खराब हुई है।
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