इंदौर में कम बारिश ने रबी सीजन से पहले चिंता बढ़ाई है। जिले में इस वर्ष बारिश औसत से काफी नीचे रही। अब कृषि विभाग ने इसके लिए विशेष तैयारी शुरू की है। रबी फसलों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके लिए कृषि विभाग के मैदानी अमले को प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारी अब किसानों तक जरूरी तकनीकी जानकारी पहुंचाएंगे। मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इसी क्रम में इंदौर में यह विशेष कार्ययोजना बनाई गई है।
इंदौर में अब तक 639.7 मिमी बारिश
इंदौर जिले की औसत वार्षिक बारिश 952.20 मिलीमीटर है। इस वर्ष अब तक 639.70 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है। यह औसत से करीब 33 प्रतिशत कम है। बारिश की यह कमी रबी सीजन के लिए महत्वपूर्ण है। रबी की खेती में उपलब्ध नमी की बड़ी भूमिका रहती है। इसलिए विभाग पहले से किसानों तक जरूरी जानकारी पहुंचाना चाहता है।
जिले में अल्प वर्षा को देखते हुए कार्ययोजना बनाई गई है। इसमें रबी फसलों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान रखा गया है। किसानों को परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी सलाह भी दी जाएगी।
21 दिन चलेगा विशेष अभियान
कृषि विभाग एक अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू करेगा। यह अभियान 21 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। इस दौरान विभाग का मैदानी अमला लगातार क्षेत्रों का दौरा करेगा। अधिकारी सीधे किसानों से संपर्क करेंगे। उन्हें रबी फसलों से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
अल्प वर्षा से निपटने के उपाय भी किसानों को बताए जाएंगे। विभाग का जोर मैदानी स्तर पर सलाह पहुंचाने पर रहेगा। इस अभियान का समय भी काफी महत्वपूर्ण है। अक्टूबर में किसान रबी सीजन की तैयारी शुरू करते हैं। ऐसे में समय पर मिली सलाह उपयोगी हो सकती है।
मैदानी अमले को प्रशिक्षण
अभियान से पहले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने मैदानी अमले को जानकारी दी। डॉ. शुक्ला और डॉ. मिश्रा ने प्रशिक्षण में मार्गदर्शन दिया।
वैज्ञानिकों ने अल्प वर्षा में रबी फसलों का प्रबंधन समझाया। आकस्मिक कार्ययोजना के अलग-अलग पहलुओं की जानकारी भी दी गई। किसानों तक कौन-सी जरूरी सलाह पहुंचानी है, यह भी बताया गया। इससे मैदानी अमला एक तय योजना के अनुसार काम कर सकेगा।
किसानों तक पहुंचेगी टीम
विशेष अभियान में कृषि विभाग की मैदानी टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। टीम लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेगी। किसानों की स्थिति देखकर उन्हें जरूरी तकनीकी सलाह दी जाएगी। अल्प वर्षा से निपटने के उपलब्ध उपाय भी समझाए जाएंगे।
प्रशिक्षण में कृषि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। संयुक्त संचालक कृषि जितेंद्र सिंह प्रशिक्षण में मौजूद रहे। उप संचालक कृषि संदीप कुमार यादव भी कार्यक्रम में शामिल हुए। परियोजना संचालक आत्मा अल्पना वर्मा भी प्रशिक्षण में मौजूद रहीं।
अनुविभागीय अधिकारी कृषि एस.आर.एस्के भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सहायक संचालक कृषि देवीसिंह वर्मा भी प्रशिक्षण में उपस्थित रहे। उप परियोजना संचालक आत्मा रेणु पाराशर भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। कृषि विभाग का पूरा मैदानी अमला प्रशिक्षण में मौजूद रहा।
रबी सीजन पर बढ़ा फोकस
बारिश कम होने के बाद विभाग का फोकस रबी सीजन पर है। आकस्मिक कार्ययोजना इसी स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई गई है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को भी अभियान से जोड़ा गया है। कृषि विकास अधिकारी भी किसानों तक पहुंचेंगे। कृषि विस्तार अधिकारी भी मैदानी स्तर पर काम करेंगे।
अभियान में किसानों को तकनीकी जानकारी देने पर जोर रहेगा। इसके लिए प्रशिक्षित अमला लगातार गांवों और क्षेत्रों में जाएगा। कृषि विभाग ने अभी किसी फसलवार नुकसान का आंकड़ा नहीं बताया है। किसी खास रबी फसल के रकबे का आंकड़ा भी नहीं दिया गया।
विभाग ने सिंचाई या उत्पादन के संभावित असर का आंकड़ा भी नहीं दिया। फिलहाल तैयारी अल्प वर्षा की स्थिति से निपटने पर केंद्रित है। एक से 21 अक्टूबर तक अभियान की असली परीक्षा होगी। किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाना इसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रहेगी।
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