छत्तीसगढ़ में खाद खरीदने के लिए अब मोबाइल आधारित टोकन प्रणाली पर जोर है। कृषि विभाग किसानों को इस नई व्यवस्था के बारे में जागरूक कर रहा है। इसमें कृषक मित्रों की बड़ी भूमिका रखी गई है। मकसद साफ है। किसान आसानी से उर्वरक खरीद सकें। खाद वितरण की व्यवस्था भी ज्यादा व्यवस्थित हो।
क्या है मोबाइल टोकन व्यवस्था
राज्य में उर्वरक खरीद की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश हो रही है। इसके लिए मोबाइल आधारित डिजिटल टोकन प्रणाली की जानकारी दी जा रही है। कृषक मित्रों को प्रेरित किया गया है कि वे यह जानकारी किसानों तक पहुंचाएं। उन्हें किसानों को खाद खरीदने की प्रक्रिया भी समझानी है।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ना है। इससे किसान तय प्रक्रिया के हिसाब से उर्वरक खरीद सकेंगे। हालांकि टोकन कैसे बनेगा। यह भी साफ नहीं है कि प्रक्रिया किस ऐप या पोर्टल से होगी।
कृषक मित्र क्या करेंगे
कृषक मित्र किसानों और कृषि विभाग के बीच अहम कड़ी हैं। वे गांव में किसानों के सीधे संपर्क में रहते हैं। इसलिए नई योजनाओं और तकनीकों की जानकारी उन तक आसानी से पहुंचा सकते हैं। अब उन्हें टोकन प्रणाली की जानकारी देने की जिम्मेदारी दी गई है। वे अपने इलाके में किसानों का मार्गदर्शन करेंगे। खास ध्यान उन किसानों पर है, जो स्मार्टफोन में सहज नहीं हैं। कृषक मित्र ऐसे किसानों की मदद करेंगे।
उन किसानों की मुश्किल
गांवों में कई किसान मोबाइल आधारित प्रक्रियाओं के जानकार नहीं हैं। उन्हें नई व्यवस्था समझने में परेशानी हो सकती है। यह बात खबर में भी मानी गई है।
इसी वजह से जानकारी और सहयोग पर खास जोर दिया गया है। कृषक मित्र किसान को प्रक्रिया सरल तरीके से समझाएंगे। उम्मीद है कि इससे किसान प्रक्रिया का पालन कर पाएंगे। खाद खरीदते समय आने वाली संभावित परेशानियों से भी बचाव होगा।
पारदर्शिता की उम्मीद
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक अब सेवाएं पहुंचाने का अहम जरिया बन रही है। टोकन प्रणाली से उर्वरक वितरण ज्यादा व्यवस्थित होने की अपेक्षा है। वितरण से जुड़ी जानकारी का प्रबंधन भी आसान होने की उम्मीद है।
ऐसी व्यवस्था का मकसद किसानों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना है। इसका दूसरा मकसद सेवाओं में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। लेकिन इसकी एक शर्त है। इसका फायदा तभी ज्यादा किसानों तक पहुंचेगा, जब उन्हें प्रणाली की पूरी जानकारी हो। यानी जागरूकता ही इस व्यवस्था की सफलता की चाबी है।
सेवा संकल्प अभियान 2026
यह कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत हुआ है। कृषि विभाग इसके जरिए किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ना चाहता है।विभाग कृषक मित्रों के माध्यम से जागरूकता बढ़ा रहा है। मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को टोकन प्रणाली की जानकारी मिले। इससे किसानों को डिजिटल व्यवस्था अपनाने में मदद मिलेगी। खाद खरीदने की प्रक्रिया भी सरल और व्यवस्थित बन सकेगी।
खाद पर पहले उठे थे सवाल
इस साल खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता पर विधानसभा में बहस हुई थी। जुलाई में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल ने स्थगन प्रस्ताव रखा था। बघेल ने आरोप लगाया था कि सोसायटियों में बुवाई के समय डीएपी-पोटाश कम थे। यह उनका आरोप है, जिसे सरकार ने नहीं माना।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा था कि व्यापक कमी नहीं है। उन्होंने प्रस्ताव को गैर जरूरी बताया था। मंत्री के मुताबिक खरीफ 2026 के लिए खाद का लक्ष्य 15.55 लाख टन था। इसके मुकाबले 14.06 लाख टन की व्यवस्था हुई थी। यह करीब 90 फीसदी है।
डीएपी का लक्ष्य 3 लाख टन था। उसके मुकाबले 1.67 लाख टन भंडारित था। यह लक्ष्य का 56 फीसदी है। मंत्री ने इसकी वजह वैश्विक सप्लाई की दिक्कतों को बताया था। उस बहस में टोकन प्रणाली का जिक्र नहीं हुआ था।
किसानों के लिए क्या मायने
टोकन प्रणाली का फायदा तब दिखेगा, जब खाद की उपलब्धता भी रहे। सिर्फ डिजिटल व्यवस्था से खाद की कमी दूर नहीं होती। लेकिन व्यवस्थित वितरण से भीड़ और अव्यवस्था घट सकती है।
किसान को क्या करना चाहिए, यह भी अहम है। किसान अपने गांव के कृषक मित्र से संपर्क कर सकते हैं। वे कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय से भी जानकारी ले सकते हैं। प्रक्रिया पूरी करने से पहले सारी जानकारी जरूर समझ लें।
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