आज 15 अक्टूबर है। देश में आज महिला किसान दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन खेती में महिलाओं के योगदान को सम्मान देने के लिए है।इस बार का दिन और भी खास है। संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया है। इसलिए इस साल महिला किसानों पर देश और दुनिया का ध्यान ज्यादा है।
महिला किसान दिवस क्या है
भारत में हर साल 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया जाता है। इसका पहला मकसद खेती में महिलाओं के काम को पहचान देना है। दूसरा मकसद उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
इस दिन महिलाओं को आगे बढ़ने के मौके देने की बात होती है। कृषि मंत्रालय और उसके संस्थान इस मौके पर कार्यक्रम करते हैं। इनमें महिला किसानों की उपलब्धियां सामने रखी जाती हैं।
इन कार्यक्रमों में कामयाब खेती के तरीके भी साझा होते हैं। महिलाओं को नई तकनीक और खेती के कारोबार से जोड़ा जाता है।
15 अक्टूबर ही क्यों
यह तारीख संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस से जुड़ी है। इसी दिन दुनिया भर में यह दिवस मनाया जाता है। भारत में महिला किसान दिवस भी इसी तारीख को पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2007 में यह दिवस तय किया था। इसे पहली बार 15 अक्टूबर 2008 को मनाया गया। इस दिवस का मकसद ग्रामीण महिलाओं के योगदान को सामने लाना है। इसमें खेती, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण विकास और गरीबी घटाने में उनकी भूमिका शामिल है।
2026 की थीम क्या है
बताया गया है कि कृषि मंत्रालय ने इस साल की थीम तय की है। यह है “विकसित कृषि और विकसित भारत के निर्माण में महिला किसानों की भूमिका”।
थीम में आधुनिक खेती की तकनीक अपनाने पर जोर है। फसल विविधीकरण और पशुपालन की भी बात है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी अहम माना गया है। खेती से जुड़े कारोबार को बढ़ावा देना भी थीम का हिस्सा है। यानी महिलाओं को सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रखना है। उन्हें उद्यमी के रूप में भी आगे लाना है।
2026 महिला किसान वर्ष घोषित
संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया है। इसका लक्ष्य दुनिया भर में महिलाओं के योगदान को पहचान देना है। खेती और खाद्य व्यवस्था में उन्हें ज्यादा मौके देना भी मकसद है।
एफएओ (Food and Agriculture Organization) इस साल की गतिविधियों का समन्वय कर रहा है। संगठन ने जनवरी में इस अभियान की शुरुआत की थी।
इसी वर्ष मार्च में मुंबई के विधान भवन में भी इस पर चर्चा हुई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुख्य अतिथि थे। उन्होंने प्रदेश के अलग अलग हिस्सों की महिला किसानों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
एमएसएसआरएफ (M S Swaminathan Research Foundation) की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन भी मौजूद थीं। उन्होंने महिलाओं को जमीन का मालिकाना हक देने पर जोर दिया। उन्होंने तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत भी बताई। राज्य सरकार का संदेश साफ था। महिलाएं सिर्फ मजदूर नहीं, फैसले लेने वाली उद्यमी बनकर आगे बढ़ें।
खेत में महिलाएं क्या करती हैं
खेती में महिलाओं का काम बहुत बड़ा है। वे बुवाई, रोपाई, निराई और कटाई जैसे कामों में जुटी रहती हैं। पशुपालन की जिम्मेदारी भी अक्सर उन्हीं पर रहती है।
बीज बचाकर रखना भी महिलाओं का अहम काम है। इसके अलावा वे सब्जी उगाती हैं। कई महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण में भी लगी हैं। यानी उपज से खाने का सामान तैयार करती हैं।
उपज को बाजार तक पहुंचाने और बेचने में भी उनकी भूमिका है। कई राज्यों में खेती का बड़ा हिस्सा महिलाएं ही संभालती हैं। अनाज उत्पादन में भी उनका बड़ा हाथ बताया जाता है।
दुनिया के आंकड़े क्या कहते हैं
एफएओ की रिपोर्टों के मुताबिक एक आंकड़ा चौंकाता है। साल 2021 में दुनिया की 40 फीसदी कामकाजी महिलाएं कृषि खाद्य तंत्र में थीं। यह आंकड़ा बताता है कि महिलाओं पर खेती कितनी निर्भर है।
इसी रिपोर्ट में एक और बात सामने आई है। खेत बराबर हों, तब भी महिला किसानों की उत्पादकता 24 फीसदी कम रहती है। इसे उत्पादकता का अंतर कहा जाता है।
महिला किसानों के पास आम तौर पर छोटी जोत होती है। यानी कम जमीन पर उन्हें वही मेहनत करनी पड़ती है।
महिला किसानों की चुनौतियां
महिला किसानों के सामने कई मुश्किलें हैं। सबसे बड़ा सवाल जमीन के मालिकाना हक का है। कई बार खेत महिलाएं जोतती हैं, पर जमीन किसी और के नाम होती है।
कृषि कर्ज तक पहुंच भी एक चुनौती है। आम तौर पर कर्ज के लिए जमीन के कागज चाहिए होते हैं। ऐसे में मालिकाना हक का सवाल कर्ज से भी जुड़ जाता है।
सरकारी योजनाओं तक पहुंच भी हर जगह आसान नहीं है। आधुनिक मशीनें और बाजार तक पहुंच भी बड़ी बाधा है। इन कमियों से महिलाओं की कमाई और तरक्की रुकती है।
दिन के पांच बड़े मकसद
इस दिन का पहला मकसद महिला किसानों को सार्वजनिक रूप से सम्मान देना है। दूसरा मकसद आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। इसमें खेती से जुड़े उद्यम और स्वयं सहायता समूह अहम माने गए हैं।
तीसरा मकसद आधुनिक तकनीक अपनाने को बढ़ावा देना है। इसमें ड्रोन, कृषि मशीनें, वैज्ञानिक खेती और डिजिटल सेवाएं शामिल हैं।
चौथा मकसद कर्ज, प्रशिक्षण, बीमा और दूसरी योजनाओं तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाना है। पांचवां मकसद जमीन के हक, आर्थिक मदद और बाजार पर जागरूकता लाना है।
आगे क्या जरूरी है
सम्मान समारोह अपनी जगह जरूरी हैं। लेकिन महिला किसानों की असली तरक्की तब होगी, जब उन्हें जमीन का हक मिले। कर्ज, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच भी उतनी ही जरूरी है।
तकनीक के मामले में भी महिलाओं को बराबर मौका चाहिए। ड्रोन और मशीन जैसी सुविधाएं उन तक पहुंचें, तो काम आसान होगा। इससे उपज और कमाई, दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
ये भी पढ़ें…
पीएम किसान योजना का विस्तार, अगले पांच साल भी मिलेंगे 6,000 रुपए, 3.15 लाख करोड़ रुपए मंजूर
सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना में होंगे 375 काम, जानिए गांवों और किसानों को इससे क्या फायदा होगा
