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सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना में होंगे 375 काम, जानिए गांवों और किसानों को इससे क्या फायदा होगा

newz@gmail.com | Oct 9, 2026, 13:17 IST

केंद्र सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 375 तरह के काम शामिल किए हैं। इनमें जल संरक्षण, खेती, ग्रामीण सुविधाएं और आपदा से बचाव प्रमुख हैं। योजना में ग्रामीण परिवारों को सालाना 125 दिन रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान है।

रोजगार योजना

ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में केंद्र सरकार ने कामों का दायरा बढ़ाया है। नई सूची में कुल 375 तरह के काम शामिल किए गए हैं। इनका उद्देश्य सिर्फ मजदूरी देना नहीं है। गांवों में टिकाऊ सुविधाएं बनाना भी इसका अहम हिस्सा है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पांच अक्टूबर 2026 को नई सूची अधिसूचित की। इसकी जानकारी मंत्रालय ने छह अक्टूबर को जारी की। यह सूची विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत तैयार हुई है। इसे VB-G RAM G नाम से जाना जाता है।

नई व्यवस्था में पहले के 266 कार्यों की जगह 375 कार्य रखे गए हैं। इस तरह कामों की सूची में लगभग 41 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। पानी, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका और आपदा से बचाव को प्राथमिकता मिली है।

ग्रामीण रोजगार योजना की चार श्रेणियों में बंटे 375 काम

नई सूची में कामों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें सबसे बड़ी श्रेणी पानी की सुरक्षा से जुड़ी है। इसमें कुल 128 तरह के काम शामिल हैं। ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए 111 कार्य रखे गए हैं।

आजीविका से जुड़े ढांचे के लिए 98 कार्य तय किए गए हैं। खराब मौसम और आपदाओं से बचाव के लिए 38 कार्य शामिल हैं। इन सभी श्रेणियों का मकसद ग्रामीण इलाकों की जरूरतें पूरी करना है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना है।

इन कामों से गांवों में पानी, सड़क, स्वास्थ्य और खेती से जुड़ी सुविधाएं विकसित हो सकती हैं। हालांकि, हर काम हर गांव में अपने आप शुरू नहीं होगा। काम का चयन स्थानीय जरूरत और तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?

नई सूची में खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों को भी जगह मिली है। मंत्रालय के अनुसार, 181 काम कृषि और संबंधित क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनमें 52 ऐसे कार्य हैं, जिनसे किसी व्यक्ति को सीधा लाभ मिल सकता है। इससे खेती के साथ सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश है।

कृषि उपज की सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए सुविधाएं बनाई जा सकती हैं। छोटी आटा मिल और मंडी से जुड़े ढांचे भी सूची में शामिल हैं। डेयरी, मशरूम उत्पादन और मछली पालन से जुड़ी संरचनाएं भी बनाई जा सकेंगी। इन सुविधाओं से गांवों में कृषि आधारित आजीविका के नए रास्ते खुल सकते हैं।

फसल उगाने के बाद उसे संभालना और बाजार तक पहुंचाना किसानों के लिए जरूरी है। सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग की सुविधाएं उपज को बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद कर सकती हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं होने से किसानों और ग्रामीण कामगारों को काम मिल सकता है। लेकिन वास्तविक फायदा परियोजनाओं के चयन और उनके सही संचालन पर निर्भर करेगा।

पानी बचाने के लिए 128 काम

नई व्यवस्था में जल सुरक्षा को सबसे बड़ा हिस्सा दिया गया है। इसके तहत चेक डैम, रिचार्ज शाफ्ट और भूमिगत जल संरचनाएं बनाई जा सकेंगी। नदियों, छोटी जलधाराओं और नालों को सुधारने के काम भी शामिल हैं। जलभराव वाली जमीन को सुधारने की व्यवस्था भी सूची में है।

किसानों के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से जुड़े काम भी रखे गए हैं। छतों से बारिश का पानी जमा करने की सुविधाएं बनाई जा सकेंगी। कुछ इलाकों में कृत्रिम ग्लेशियर और बर्फ के स्तूप जैसे उपाय भी शामिल हैं। इनका उद्देश्य पानी बचाना और सिंचाई के लिए उपलब्धता बढ़ाना है।

पानी की बेहतर व्यवस्था खेती को सीधे मदद पहुंचा सकती है। इससे बारिश पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परिणाम स्थानीय मौसम, जमीन और परियोजना की गुणवत्ता पर निर्भर करेंगे।

गांवों में सुविधाएं बढ़ेंगी

नई सूची में ग्रामीण बुनियादी ढांचे के 111 काम शामिल हैं। इनके तहत सोलर स्ट्रीट लाइट और कचरा रिसाइकिल करने वाले प्लांट बनाए जा सकेंगे। गंदे पानी के उपचार और कचरे को अलग करने की सुविधाएं भी बनेंगी। इससे गांवों की सफाई और स्थानीय सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

गांवों में पुस्तकालय, पशु चिकित्सा केंद्र और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र भी बनाए जा सकेंगे। सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं और प्रयोगशालाएं बनाने का प्रावधान है। कॉमन सर्विस सेंटर और युवाओं के लिए सामुदायिक सुविधाएं भी सूची में हैं। जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की सुविधाओं की मरम्मत भी कराई जा सकेगी।

इन कामों से गांवों में लंबे समय तक इस्तेमाल होने वाली संपत्तियां तैयार हो सकती हैं। इससे रोजगार के साथ सार्वजनिक सुविधाओं को भी मजबूती मिल सकती है।

आपदा से बचाव के लिए काम

नई सूची में पहली बार आपदा से बचाव की अलग श्रेणी बनाई गई है। इसके तहत 38 तरह के काम किए जा सकेंगे। इनमें बाढ़ राहत केंद्र बनाना और तटबंध मजबूत करना शामिल है। बाढ़ से सुरक्षा के लिए जरूरी ढांचे भी तैयार किए जा सकेंगे।

आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक सुविधाओं की मरम्मत भी कराई जा सकेगी। जंगलों में आग रोकने के लिए भी कुछ काम शामिल हैं। इनमें आग फैलने से रोकने वाली पट्टियां और सुरक्षा क्षेत्र तैयार करना शामिल है।

बाढ़, चक्रवात, सूखा और जंगल की आग ग्रामीण परिवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में पहले से तैयार सुविधाएं नुकसान घटाने में मदद कर सकती हैं। फिर भी किसी आपदा में सुरक्षा की गारंटी केवल निर्माण से नहीं मिलती। समय पर तैयारी, रखरखाव और प्रशासन की भूमिका भी जरूरी होगी।

महिलाओं और युवाओं को मौका

नई व्यवस्था में महिलाओं और युवाओं से जुड़े कामों को भी जगह मिली है। मंत्रालय की सूची में महिलाओं से संबंधित 36 काम शामिल हैं। युवाओं से जुड़े कामों की संख्या भी 36 है। इनमें प्रशिक्षण, कौशल विकास और उद्यम से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।

स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए वर्कशेड और अन्य सुविधाएं बनाई जा सकेंगी। महिलाओं के समूहों के लिए SHE Marts जैसी संरचनाएं भी सूची में हैं। प्रशिक्षण केंद्रों से ग्रामीण युवाओं को कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

कमजोर परिवारों के लिए भी विशेष प्रावधान रखे गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, 107 काम अंत्योदय और कमजोर परिवारों से जुड़े हैं। इनमें 68 काम व्यक्तिगत लाभार्थियों को सीधा फायदा पहुंचा सकते हैं। इन कामों में सिंचाई, पशु आश्रय, स्वच्छता और घरेलू सुविधाएं शामिल हैं।

गांव में काम कैसे चुने जाएंगे?

नई व्यवस्था में गांवों की जरूरत के अनुसार कामों की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार की जाएगी। योजना को ग्राम सभा की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा। इससे स्थानीय जरूरतों को काम के चयन में महत्व मिलना है।

सरकार ने कामों की डिजिटल निगरानी का भी प्रावधान रखा है। इसके लिए विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे परियोजनाओं की जानकारी दर्ज करने और उनकी प्रगति देखने में मदद मिलेगी। अलग-अलग सरकारी योजनाओं के बीच तालमेल बनाने का लक्ष्य भी है।

इस प्रक्रिया की सफलता ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी। कामों की जानकारी लोगों तक पहुंचना भी जरूरी होगा। निगरानी और सार्वजनिक जवाबदेही से परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ सकती है।

125 दिन रोजगार का प्रावधान

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन रोजगार देने का प्रावधान है। यह प्रावधान VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का हिस्सा है। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू हुई। इसने पहले की मनरेगा व्यवस्था की जगह ली है।

नई व्यवस्था में ज्यादातर राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का खर्च अनुपात 60:40 रखा गया है। केंद्र सरकार राज्यों के लिए खर्च की मानक राशि तय करेगी। तय राशि से अधिक खर्च होने पर अतिरिक्त बोझ राज्यों पर पड़ सकता है। इससे राज्यों के बजट और योजना लागू करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

योजना में बदलाव को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। इनमें महात्मा गांधी का नाम हटाने और फंडिंग के नए नियम शामिल हैं। खेती के व्यस्त मौसम में काम रोकने के प्रावधान पर भी चिंता जताई गई है। राज्यों को ऐसे मौसम में सालाना अधिकतम 60 दिन काम रोकने की अनुमति है।

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था रोजगार के साथ टिकाऊ ग्रामीण संपत्तियां बनाएगी। इसके वास्तविक नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि काम कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं। ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार और समय पर मजदूरी भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

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