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पीएम किसान योजना: सात साल में 46,317 करोड़ रुपए खर्च नहीं हुए, जानें पूरी रिपोर्ट

newz@gmail.com | Sep 1, 2026, 17:34 IST

पीएम किसान योजना पर बड़ा RTI खुलासा। 7 साल में 46,317 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो सके। 4 साल बजट कम खर्च हुआ, 3 साल में ज्यादा। जानें पूरी वजह और आंकड़े।

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पीएम किसान सम्मान निधि योजना देश की सबसे बड़ी किसान योजना है। इसका पूरा नाम है Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Yojana। इससे करोड़ों किसानों को हर साल सीधी आर्थिक मदद मिलती है। अब एक आरटीआई रिपोर्ट ने योजना के बजट का सच सामने ला दिया है। आरटीआई का मतलब है Right to Information यानी सूचना का अधिकार।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात वित्तीय वर्षों में योजना का बजट खर्च हुआ। इसमें से 46 हजार 317 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाए। यह जानकारी कृषि मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में दी है। इससे पता चलता है कि हर साल खर्च एक जैसा नहीं रहा। कभी खर्च कम रहा तो कभी तय सीमा से आगे निकल गया।

सात सालों के आंकड़े देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है। चार वित्तीय वर्षों में तय बजट पूरी तरह खर्च नहीं हो सका। वहीं तीन वित्तीय वर्षों में बजट से ज्यादा पैसा किसानों तक पहुंचाया गया। यह उतार-चढ़ाव योजना की शुरुआत से लेकर अब तक बना रहा।

क्या कहती है RTI रिपोर्ट

आरटीआई से मिले आंकड़े साल 2019 से 2026 तक के हैं। यह डेटा हर वित्तीय वर्ष का अलग-अलग हिसाब बताता है। शुरुआती सालों में सबसे ज्यादा फंड बिना इस्तेमाल रह गया था। बाद के सालों में खर्च की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ती गई। कुछ सालों में तो तय बजट से भी ज्यादा पैसा बांटा गया। यह पूरा पैटर्न आरटीआई के जवाब में दर्ज है।

शुरुआती सालों में बचा बजट

योजना की शुरुआत में सरकार ने बड़ा बजट रखा था। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 75 हजार करोड़ रुपए का बजट तय था। लेकिन उस साल केवल 48 हजार 714 करोड़ रुपए ही खर्च हो सके। यानी पहले ही साल में बड़ी रकम बिना इस्तेमाल रह गई। इसके पीछे कारण था लाभार्थियों का सत्यापन।

अगले साल यानी 2020-21 में हालात कुछ बेहतर हुए। इस साल भी बजट 75 हजार करोड़ रुपए तय था। इसमें से 60 हजार 990 करोड़ रुपए ही खर्च हो सके। यह रकम तय बजट से काफी कम रही। उस समय आधार वेरिफिकेशन की प्रक्रिया धीमी चल रही थी। इसी वजह से पैसा समय पर किसानों तक नहीं पहुंचा।

पीएम किसान योजना का साल दर साल कितना खर्च

वित्तीय वर्ष 2021-22 में योजना की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। इस साल 65 हजार करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। लेकिन खर्च हुआ इससे भी ज्यादा। कुल 65 हजार 785 करोड़ रुपए किसानों तक पहुंचे। यह पहला मौका था जब खर्च तय सीमा को पार कर गया।

इसके बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 में फिर खर्च कम हो गया। इस साल सिर्फ 58 हजार 254 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए। यह साल भी उन चार सालों में शामिल है। इन सालों में पूरा बजट इस्तेमाल नहीं हो सका। वित्तीय वर्ष 2023-24 में फिर बजट से ज्यादा खर्च हुआ। इस साल बजट 60 हजार करोड़ रुपए तय था। इसके मुकाबले 61 हजार 441 करोड़ रुपए खर्च हुए।

2024-25 में बना रिकॉर्ड

वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के इतिहास का सबसे बड़ा खर्च दर्ज हुआ। इस साल बजट 60 हजार करोड़ रुपए तय था। इसके मुकाबले 66 हजार 138.91 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह अब तक का सबसे ज्यादा सालाना खर्च है। इसके उलट वित्तीय वर्ष 2025-26 में खर्च फिर घट गया। इस साल केवल 58 हजार 860.10 करोड़ रुपए ही इस्तेमाल हो पाए। यह रकम भी तय बजट से काफी कम रही।

इस तरह सात में से चार साल बजट कम खर्च हुआ। बाकी तीन सालों में तय आवंटन से ज्यादा पैसा बंटा। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि खर्च हर साल एक जैसा नहीं रहा। कभी वेरिफिकेशन से देरी हुई तो कभी मांग बढ़ने से खर्च बढ़ा।

क्यों अटका शुरुआती पैसा

शुरुआती सालों में योजना के लिए सख्त नियम बनाए गए थे। हर किसान का आधार सीडिंग और ई-केवाईसी (Electronic Know Your Customer) जरूरी किया गया। इस प्रक्रिया में समय ज्यादा लगा, इसलिए पैसा रुक गया। सरकार का मकसद था कि फर्जी खातों में पैसा न जाए। इसी वजह से कई असली किसान भी शुरू में इंतजार करते रहे।

बाद के सालों में यह प्रक्रिया धीरे-धीरे आसान हो गई। ज्यादातर किसानों का डेटा वेरिफाई होने के बाद खर्च तेजी से बढ़ा। यही वजह है कि 2021-22 और 2023-24 में खर्च बजट से आगे निकल गया। अब सिस्टम पहले से ज्यादा तेज और भरोसेमंद बन चुका है।

किसानों के लिए क्या मायने

पीएम किसान योजना का सीधा फायदा करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को मिलता है। इस योजना की सफलता इसी बात पर टिकी है कि किस्त समय पर मिले। बजट खर्च में देरी होने पर किसानों को इंतजार करना पड़ता है। वहीं समय पर पूरा पैसा मिलने से किसानों को खेती में मदद मिलती है।

आरटीआई रिपोर्ट से एक बात और साफ होती है। योजना का प्रबंधन साल दर साल बेहतर हुआ है। शुरुआती दिक्कतें अब काफी हद तक दूर हो चुकी हैं। ज्यादातर पात्र किसानों को अब समय पर किस्त मिल रही है। आने वाले सालों में बजट का इस्तेमाल और बेहतर होने की उम्मीद है। इससे योजना का फायदा हर पात्र किसान तक पूरी तरह पहुंच सकेगा।

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