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धान की फसल में कीट प्रकोप, ICAR ने बताया बचाव का तरीका

newz@gmail.com | Sep 4, 2026, 18:53 IST

धान की फसल में तना छेदक और पत्ता मोड़क कीट का खतरा बढ़ा है। ICAR-केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कटक ने फेरोमोन ट्रैप, दवाओं और ट्राइको कार्ड के इस्तेमाल की सलाह दी है, ताकि किसान समय पर बचाव कर सकें।

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धान की फसल पर इस समय दो बड़े कीटों का खतरा मंडरा रहा है। तना छेदक और पत्ता मोड़क कीट किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसे देखते हुए ICAR यानी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) के केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कटक ने किसानों के लिए विस्तृत सलाह जारी की है। यह सलाह खास तौर पर सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए दी गई है।

पहले लगाएं फेरोमोन ट्रैप

संस्थान के मुताबिक किसानों को सबसे पहले अपने खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाने चाहिए। प्रति एकड़ 4 से 5 ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। यह ट्रैप कीटों की मौजूदगी का शुरुआती संकेत देते हैं।

पीले तना छेदक कीट के लिए Scirpo lure नाम का ट्रैप इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं लीफ फोल्डर यानी पत्ता मोड़क कीट के लिए Cnaphalo lure ट्रैप का उपयोग किया जाना चाहिए। इन ट्रैप से किसान समय रहते कीट के हमले का पता लगा सकते हैं।

कब समझें खतरा बढ़ रहा है

संस्थान ने एक साफ संकेत भी बताया है। अगर किसी एक ट्रैप में 4 से 5 नर पतंगे मिल जाएं, तो इसका मतलब है कि कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों को तुरंत नियंत्रण के उपाय शुरू कर देने चाहिए।

समय पर यह पहचान होने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। इसलिए संस्थान ने ट्रैप की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है।

प्रकोप दिखने पर कौन सी दवा डालें

अगर खेत में कीट का हल्का प्रकोप दिखे, तो कुछ खास दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। नीम आधारित अजाडिरेक्टिन 0.15% ईसी को 800 मिली प्रति एकड़ की दर से डाला जा सकता है।

इसके अलावा क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 0.4% जीआर को 4 किलो प्रति एकड़ की मात्रा में डालने की सलाह दी गई है। कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड 4जी को 10 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से रेत में बराबर मात्रा मिलाकर खेत में डाला जा सकता है।

धान की फसल पर छिड़काव जरूरी

अगर कीट का प्रकोप ज्यादा दिखे, तो छिड़काव वाली दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी को 60 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़का जा सकता है।

टेट्रानिलिप्रोल 200 एससी का इस्तेमाल 100 से 120 मिली प्रति एकड़ की मात्रा में किया जा सकता है। फ्लूबेंडियामाइड 20 डब्ल्यूजी को 50 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़का जा सकता है। संस्थान ने बताया कि छिड़काव के लिए प्रति एकड़ 200 लीटर पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।

ट्राइको कार्ड से जैविक नियंत्रण भी असरदार

सिर्फ रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय जैविक तरीके भी अपनाए जा सकते हैं। संस्थान ने ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम और ट्राइकोग्रामा चिलोनिस नाम के कार्ड इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

जब खेत में पतंगों की उड़ान दिखने लगे, तब प्रति हेक्टेयर 3 कार्ड लगाने चाहिए। एक कार्ड में करीब 60 हजार परजीवी अंडे होते हैं। इन्हें 7 से 10 दिन के अंतराल पर कुल 5 बार लगाना जरूरी है।

संस्थान ने यह भी साफ किया कि अंडों का समूह या पतंगों की सक्रियता बंद होते ही कार्ड लगाना रोक देना चाहिए। इससे जैविक नियंत्रण का सही समय पर और सही तरीके से इस्तेमाल हो पाता है।

पत्तियां मुड़ी दिखें तो तुरंत करें छिड़काव

किसानों के लिए एक और अहम संकेत बताया गया है। अगर किसी एक पौधे यानी हिल पर दो पत्तियां मुड़ी हुई दिखें, तो इसे लीफ फोल्डर कीट का हमला माना जाना चाहिए।

ऐसी स्थिति में ऊपर बताई गई तीनों दवाओं में से किसी एक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे 200 लीटर पानी के साथ मिलाकर खेत में छिड़कना चाहिए। संस्थान ने कहा है कि समय पर छिड़काव करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

किसानों के लिए क्यों जरूरी है यह सलाह

तना छेदक और पत्ता मोड़क कीट धान की पैदावार पर सीधा असर डाल सकते हैं। अगर समय रहते इनकी पहचान न हो, तो फसल को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

संस्थान की यह सलाह किसानों को समय पर सही कदम उठाने में मदद करती है। फेरोमोन ट्रैप से लेकर जैविक और रासायनिक नियंत्रण तक हर स्तर पर स्पष्ट जानकारी दी गई है। इससे किसान अपने खेत की स्थिति के हिसाब से सही फैसला ले सकते हैं।

आने वाले दिनों में इस सलाह का पालन कितने किसान करते हैं, इस पर फसल की सेहत काफी हद तक निर्भर करेगी। समय पर सही कदम उठाने से किसान अपनी फसल और मेहनत दोनों बचा सकते हैं।

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