किसान की बात,सूत्र के साथ

पांढुर्ना में कपास की फसल सूखी, किसान परेशान, सर्वे कराने की मांग

newz@gmail.com | Sep 4, 2026, 17:36 IST

पांढुर्ना के 6 गांवों में कपास की फसल जड़ सड़न रोग से सूख रही है। किसानों ने जनसुनवाई में एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर सर्वे और मुआवजे की मांग की है। कम बारिश से किसान पहले से परेशान हैं।

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पश्चिमी मध्यप्रदेश में इस साल कम बारिश ने किसानों की चिंता पहले ही बढ़ा दी थी। अब पांढुर्ना अंचल से एक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहां कपास की फसल सूखने लगी है, जिससे किसान बेहद परेशान हैं।

किसानों ने सौंपा ज्ञापन

मंगलवार को हुई जनसुनवाई में किसानों ने एसडीएम यानी सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (Sub Divisional Magistrate) अलका एक्का को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की है कि प्रभावित खेतों का तुरंत सर्वे कराया जाए। साथ ही नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए।

किसानों का कहना है कि समय पर सर्वे होने से उन्हें राहत मिल सकती है। कई किसान पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में फसल खराब होना उनके लिए दोहरी मुसीबत बन गया है।

छह गांवों में कपास की फसल पर ज्यादा असर

पंधराखेड़ी, आम्बाखापा, सावंगी, छत्रापुर, रझाड़ी और पीपला गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान देखा जा रहा है। इन गांवों में खरीफ सीजन की कपास की फसल तेजी से सूख रही है। पौधे सूखने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

स्थानीय किसानों के मुताबिक शुरुआत में यह समस्या कुछ ही खेतों तक सीमित थी। लेकिन अब यह तेजी से आसपास के खेतों में भी फैल रही है। इससे प्रभावित इलाके का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

ठेके पर खेती करने वाले किसान भी परेशान

इस समस्या से सिर्फ जमीन के मालिक किसान ही नहीं, बल्कि ठेके पर खेती करने वाले किसान भी प्रभावित हुए हैं। कई किसानों ने इस साल ठेके पर जमीन लेकर कपास की बुआई की थी। ऐसे किसानों के लिए यह नुकसान और भी भारी साबित हो रहा है।

बीज, खाद और मेहनत में लगाया गया पैसा अब डूबता नजर आ रहा है। किसानों का कहना है कि पूरे सीजन की मेहनत बेकार जाती दिख रही है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।

जड़ सड़न बनी बड़ी वजह

भारतीय किसान संघ सौंसर के तहसील अध्यक्ष आशीष पवार के मुताबिक इस समस्या की मुख्य वजह जड़ सड़न रोग है। उनके अनुसार इस रोग से पौधों की जड़ें खराब हो रही हैं और पौधे धीरे-धीरे सूखने लगते हैं।

आशीष पवार ने बताया कि प्रभावित पौधों की जड़ों में काला रिंग बनता देखा जा रहा है। उनके मुताबिक यह रोग तेजी से फैल रहा है और अधिकांश खेत इसकी चपेट में आ चुके हैं। हालांकि इस रोग के फैलने के सटीक कारणों की पुष्टि अभी वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

सर्वे से मिल सकती है असली वजह

किसानों का मानना है कि अगर जल्द सर्वे कराया जाए, तो बीमारी की असली वजह सामने आ सकती है। इससे भविष्य में इस तरह की समस्या से बचने के उपाय भी किए जा सकेंगे। साथ ही सही सर्वे से नुकसान का सही आकलन भी हो पाएगा।

किसानों को उम्मीद है कि मुआवजा मिलने से उनकी आर्थिक परेशानी कुछ हद तक कम हो सकेगी। हालांकि सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

कम बारिश ने पहले ही बढ़ाई थी चिंता

इस साल पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश कम होने से किसान पहले से ही परेशान थे। खरीफ की कई फसलों पर इसका असर देखा जा रहा था। ऐसे में कपास में जड़ सड़न रोग की समस्या ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

कृषि जानकारों का कहना है कि मौसम में बदलाव और जमीन में नमी की कमी जैसे कारण भी पौधों की सेहत पर असर डाल सकते हैं। हालांकि पूरी वजह की पुष्टि सर्वे और जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद

किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि सर्वे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। उनका कहना है कि जितनी देरी होगी, उतना ही असली नुकसान का सही आकलन करना मुश्किल होता जाएगा। किसान चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मांग पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। किसानों की निगाहें अब सर्वे रिपोर्ट और मुआवजे की घोषणा पर टिकी हैं।

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