किसान की बात,सूत्र के साथ

एमपी के सागर में मक्का खरीदी फर्जीवाड़ा: फर्जी दस्तावेज से किसानों के खाते में 76 लाख डलवाने वाला गिरफ्तार

newz@gmail.com | Sep 18, 2026, 16:55 IST

सागर के देवरी में फर्जी दस्तावेजों से मक्का खरीदी दिखाकर 17 किसानों के खातों में 76.31 लाख रुपए डलवाने वाला आरोपी अतिशय जैन गिरफ्तार। मामले में कई और पहलुओं की जांच अभी बाकी है।

मक्का घोटाला

सागर जिले के देवरी में मक्का खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड किए गए थे। इसके आधार पर 17 किसानों के खातों में भुगतान कराया गया। यह राशि 76 लाख 31 हजार 750 रुपए बताई जा रही है। मामले में फरार आरोपी अतिशय जैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अतिशय जैन गांधी वार्ड निवासी अवधेश जैन का बेटा है। उसे रहली से गिरफ्तार किया गया। पुलिस आरोपी को देवरी थाने लाकर पूछताछ कर रही है।

क्या है पूरा मामला

पुलिस के मुताबिक 343 मीट्रिक टन मक्का खरीदी के दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए गए थे। इसके आधार पर किसानों के खातों में भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन एनसीसीएफ ने जब भौतिक सत्यापन कराया तो हकीकत कुछ और निकली। शाडिल्य वेयरहाउस में मक्का का कोई भंडारण नहीं मिला। एग्रीमेंट के मुताबिक बताए गए वेयरहाउस का मौके पर पता ही नहीं चला। सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।

इथेनॉल के लिए मक्का खरीदी

भारत सरकार ने 2025 में मध्य प्रदेश में मक्का खरीदी की व्यवस्था बनाई थी। यह व्यवस्था मक्का से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसके तहत समर्थन मूल्य पर किसानों से मक्का खरीदा जाना था। एनसीसीएफ के दिल्ली मुख्यालय ने इसके लिए एकता कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी थी। एकता कंपनी को पोर्टल संचालन और खरीदी पार्टनर की भूमिका दी गई थी। इसके बाद एकता कंपनी ने फूड गार्ड फार्मर प्रोसेसिंग कंपनी का पंजीयन कराया।

डायरेक्टर ने की थी नियुक्ति

फूड गार्ड फार्मर प्रोसेसिंग कंपनी के डायरेक्टर मनीष पटेल इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने ही अतिशय जैन को खरीदी के लिए नियुक्त किया था। इसी नियुक्ति के आधार पर आगे की खरीदी प्रक्रिया शुरू हुई। पुलिस यह जांच कर रही है कि नियुक्ति के पीछे मंशा क्या थी। कंपनी और एफपीओ के समझौते की भी बारीकी से जांच हो रही है।

17 किसानों तक पहुंची राशि

एनसीसीएफ की ओर से 17 किसानों के खातों में कुल राशि भेजी गई थी। यह राशि 76 लाख 31 हजार 750 रुपए बताई जा रही है। भुगतान मक्का खरीदी के दस्तावेजों के आधार पर किया गया था। पुलिस के अनुसार बिना भौतिक सत्यापन के ही यह भुगतान हो गया। फर्जी दस्तावेजों के सहारे यह पूरी राशि निकाली गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि किसानों को जानकारी थी या नहीं।

मिलीभगत की हो रही जांच

पुलिस के मुताबिक मामले में मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कंपनी और एफपीओ के डायरेक्टर मनीष पटेल की भूमिका जांची जा रही है। इसके साथ ही आरोपी अतिशय जैन की भूमिका पर भी जांच जारी है। हालांकि किसी की भी संलिप्तता अभी तक अदालत में साबित नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने पर तस्वीर साफ होगी।

जांच अधिकारी ने क्या बताया

देवरी थाने के जांच अधिकारी उप निरीक्षक समरथ सीनम ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 343 मीट्रिक टन मक्का खरीदी के दस्तावेज अपलोड किए गए थे। भौतिक सत्यापन में एनसीसीएफ को वेयरहाउस में मक्का का भंडारण नहीं मिला। इसके बावजूद 17 किसानों के खातों में पूरा भुगतान हो चुका था। यह विसंगति सामने आने के बाद ही मामला दर्ज किया गया।

आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ

मामले के मुख्य आरोपी अतिशय जैन को पुलिस ने रहली से गिरफ्तार किया है। पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पूछताछ में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के तरीके का पता लगाया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि फर्जीवाड़े में और कौन शामिल रहा। जांच अधिकारी के मुताबिक आरोपी को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगी। दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।

एनसीसीएफ और खरीदी व्यवस्था

एनसीसीएफ यानी नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन केंद्र सरकार की एक सहकारी संस्था है। यह संस्था कृषि उपज की खरीदी और वितरण के काम में सक्रिय रहती है। मक्का से इथेनॉल बनाने की योजना में भी इसे अहम भूमिका दी गई थी। इसी के तहत राज्यों में स्थानीय एजेंसियों और कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पोर्टल के जरिए किसानों की उपज का रिकॉर्ड रखा जाना था। भौतिक सत्यापन के बाद ही किसानों के खातों में भुगतान होना तय था। सागर के इस मामले में यही प्रक्रिया दरकिनार होने की बात सामने आई है।

वेयरहाउस सत्यापन में खुली पोल

एग्रीमेंट के मुताबिक शाडिल्य वेयरहाउस को मक्का भंडारण के लिए तय किया गया था। सत्यापन टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां हालात कुछ और थे। न तो बताई गई मात्रा में मक्का मिला और न ही भंडारण के सबूत। इस गड़बड़ी ने पूरे मामले की परतें खोलनी शुरू कीं। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद जांच शुरू हुई और आरोपी की तलाश तेज हो गई।

ये भी पढ़ें…

एमपी में लंपी वायरस का कहर, ग्वालियर में 34 गोवंश की मौत, कलेक्टर ने ली आपात बैठक, अब चिकित्सक 24×7 तैनात

एमपी कैबिनेट में अहम फैसले: बागवानी को 491 करोड़ और सिंचाई को 2,607 करोड़ रुपए मिले, ब्याज मुक्त लोन को मंजूरी

मिलने नहीं आए खंडवा कलेक्टर, किसानों ने कुत्ते के गले में लटकाया ज्ञापन, जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर प्रदर्शन

MP में अब बिजली संकट, अधूरी सिंचाई परियोजना से किसान नाराज, रैली निकाल सरकार को दी चेतावनी

GENERAL newz@gmail.com

Read more