किसान की बात,सूत्र के साथ

कपास खरीद की डिजिटल व्यवस्था: CCI दिखाएगा नया मॉडल, ऐप से ही स्लॉट बुकिंग और किसानों भुगतान

newz@gmail.com | Oct 5, 2026, 20:04 IST

हैदराबाद में छह अक्टूबर को CCI (Cotton Corporation of India) कपास खरीद सुधारों का प्रदर्शन करेगा। कपास किसान प्लेटफॉर्म से पंजीकरण और स्लॉट बुकिंग होगी। आधार आधारित भुगतान और गुणवत्ता जांच से प्रक्रिया आसान बनाने का लक्ष्य है।

कपास

कपास किसानों के लिए खरीद व्यवस्था तेजी से डिजिटल हो रही है। इन बदलावों को हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम में दिखाया जाएगा। यह कार्यक्रम मंगलवार यानी छह अक्टूबर 2026 को आयोजित होगा। यह आयोजन सुधार उत्सव 2026 के तहत किया जाएगा। इसका आयोजन भारतीय कपास निगम करेगा। इसे CCI (Cotton Corporation of India) भी कहा जाता है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और किसान शामिल होंगे। तेलंगाना सरकार के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। कपास उद्योग से जुड़े संगठन भी अपने अनुभव साझा करेंगे। सरकार यहां कपास खरीद में हुए बदलावों को सामने रखेगी। इसका लक्ष्य व्यवस्था को तेज और किसान केंद्रित बनाना है। पारदर्शिता और तकनीक कार्यक्रम के मुख्य विषय रहेंगे।

डिजिटल खरीद कैसे चलेगी

CCI ने कपास खरीद के कई चरण डिजिटल किए हैं। इनमें किसान पंजीकरण और स्लॉट बुकिंग शामिल हैं। खरीद संबंधी सूचना भी डिजिटल माध्यम से मिल सकती है। कपास किसान प्लेटफॉर्म इन सेवाओं को एक जगह जोड़ता है। किसान पहले अपनी पहचान और जमीन का विवरण दर्ज करता है। इसके बाद नजदीकी खरीद केंद्र चुना जा सकता है।

किसान कपास बेचने के लिए स्लॉट भी बुक कर सकता है। इससे खरीद केंद्र पर अनिश्चित इंतजार कम हो सकता है। किसान को खरीद कार्यक्रम की जानकारी पहले मिल सकती है। CCI का कपास किसान ऐप आधार आधारित पंजीकरण देता है। इसमें जमीन रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन किया जाता है। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य केंद्र का स्लॉट चुन सकता है।

भुगतान और गुणवत्ता

कपास खरीद में भुगतान सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। नई व्यवस्था में आधार आधारित भुगतान को शामिल किया गया है। इससे रकम सीधे पात्र किसान तक पहुंचाने का लक्ष्य है। किसान को भुगतान की स्थिति देखने में भी सुविधा मिलेगी। खरीद रिकॉर्ड डिजिटल होने से निगरानी मजबूत हो सकती है। इससे गलत भुगतान की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।

कपास की गुणवत्ता जांच भी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा है। अच्छी गुणवत्ता पर किसान को बेहतर बाजार मिलने की संभावना रहती है। उद्योग को भी साफ और उपयोगी कच्चा माल मिलता है। डिजिटल व्यवस्था से हर समस्या तुरंत खत्म नहीं होगी। जमीन रिकॉर्ड में गलती किसान की खरीद रोक सकती है। कमजोर इंटरनेट वाले क्षेत्रों में भी परेशानी आ सकती है।

कस्तूरी कॉटन की भूमिका

कार्यक्रम में कस्तूरी कॉटन भारत पहल भी दिखाई जाएगी। यह भारतीय कपास की गुणवत्ता पहचान से जुड़ी पहल है। इसका जोर गुणवत्ता और डिजिटल ट्रेसबिलिटी पर है। ट्रेसबिलिटी का मतलब कपास के स्रोत की पहचान है। इससे कपास की किस्म और उत्पादन क्षेत्र पता चलता है। गुणवत्ता संबंधी जानकारी भी रिकॉर्ड में जोड़ी जा सकती है।

कपास में गंदगी और बाहरी सामग्री बड़ी समस्या रहती है। ऐसी मिलावट से कपास की कीमत प्रभावित हो सकती है। इससे धागे और कपड़े की गुणवत्ता भी घटती है। कस्तूरी कॉटन भारत बेहतर गुणवत्ता को बढ़ावा देता है। इससे भारतीय कपास की अलग पहचान बनाने का प्रयास है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार इसका प्रमुख लक्ष्य है।

किसान को बेहतर भाव मिलने की कोई गारंटी नहीं है। कीमत बाजार और गुणवत्ता सहित कई कारणों पर निर्भर रहेगी। पहचान मजबूत होने से बाजार अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

HDPS पर रहेगा जोर

कार्यक्रम में उच्च घनत्व रोपण प्रणाली पर भी चर्चा होगी। इसे HDPS (High-Density Planting System) कहा जाता है। इसमें पौधों की संख्या सामान्य खेती से अधिक रहती है। इस तकनीक का उद्देश्य कपास की उत्पादकता बढ़ाना है। पौधों के बीच दूरी का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाता है। सही किस्म और सिंचाई का चयन भी जरूरी है।

सरकार इसे कृषि संस्थानों के सहयोग से बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य भारतीय कपास की उत्पादकता का अंतर कम करना है। इससे खेती का आर्थिक प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। हर क्षेत्र में एक जैसी तकनीक उपयोगी नहीं होती। मिट्टी और पानी के अनुसार तरीका बदल सकता है। किसानों को स्थानीय सलाह और प्रशिक्षण मिलना जरूरी है।

किसान बताएंगे अनुभव

हैदराबाद कार्यक्रम केवल सरकारी प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहेगा। किसान और उद्योग प्रतिनिधि भी अनुभव साझा करेंगे। इससे जमीनी चुनौतियों की जानकारी मिल सकेगी। किसान बताएंगे कि स्लॉट बुकिंग कितनी उपयोगी रही। भुगतान और गुणवत्ता जांच पर भी चर्चा हो सकती है। उद्योग अपनी जरूरतों और कठिनाइयों की जानकारी देगा।

ऐसा संवाद सुधारों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करेगा। सरकारी व्यवस्था कागज पर आसान दिखाई दे सकती है। इसकी सफलता किसानों के अनुभव से तय होगी। कार्यक्रम में नीति निर्माता भी इन अनुभवों को सुनेंगे। सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान हो सकती है। बेहतर समन्वय से खरीद व्यवस्था मजबूत बनाई जा सकती है।

रेशम सेवाएं हुईं ऑनलाइन

सुधार उत्सव में रेशम क्षेत्र के बदलाव भी शामिल हैं। केंद्रीय रेशम बोर्ड ने कई सेवाएं डिजिटल की हैं। इसे CSB (Central Silk Board) कहा जाता है। सिल्क मार्क सेवाओं में ऑनलाइन पंजीकरण उपलब्ध है। नवीनीकरण और दस्तावेज जांच भी डिजिटल हो चुकी है। भुगतान और शिकायत की सुविधा भी ऑनलाइन मिलती है।

सिल्क मार्क व्यवस्था 2004 से लागू है। डिजिटल बदलाव 2022-23 से धीरे-धीरे शुरू हुए। अभी इसके सात हजार से अधिक अधिकृत उपयोगकर्ता हैं। हर वर्ष पांच सौ से अधिक नए पंजीकरण होते हैं। पात्र आवेदन सामान्यतः दो कार्य दिवसों में निपट सकते हैं। इससे कागजी प्रक्रिया और कार्यालय यात्राएं कम हुई हैं।

मेरा रेशम मेरा अभिमान

केंद्रीय रेशम बोर्ड ने किसानों के लिए विशेष अभियान चलाया। इसका सही नाम मेरा रेशम मेरा अभिमान है। इसे MRMA (Mera Resham Mera Abhimaan) भी कहा जाता है। अभियान का पहला चरण वर्ष 2025 में शुरू हुआ। यह सौ दिनों का तकनीक हस्तांतरण अभियान था। इसका उद्देश्य प्रयोगशाला की तकनीक खेत तक पहुंचाना था।

पहले चरण में 26 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जुड़े। अभियान 129 रेशम उत्पादक जिलों तक पहुंचा। इस दौरान 1,400 से अधिक कार्यक्रम आयोजित हुए। इन कार्यक्रमों से करीब 75 हजार किसान जुड़े। किसानों को प्रशिक्षण और खेत स्तर पर प्रदर्शन मिला। रेशम उत्पादन की नई तकनीक भी समझाई गई।

दूसरे चरण में 218 प्रमुख जिलों को शामिल किया गया। ये जिले अधिकांश कच्चे रेशम उत्पादन में योगदान देते हैं। इसमें जिला आधारित कार्य योजना भी तैयार होती है।

सेरी टूरिज्म की तैयारी

केंद्रीय रेशम बोर्ड सेरी टूरिज्म पर भी काम कर रहा है। इसका अर्थ रेशम आधारित पर्यटन अनुभव है। इसमें रेशम का पूरा सफर दिखाया जाएगा। लोग रेशमकीट पालन की प्रक्रिया समझ सकेंगे। कोकून उत्पादन और रेशम निकालना भी दिखाया जाएगा। बुनाई और रंगाई की जानकारी भी उपलब्ध होगी।

जम्मू-कश्मीर के मानसबल में केंद्र विकसित किया जा रहा है। असम के टोपाटोली में भी ऐसा केंद्र बनेगा। यहां रेशम की अलग किस्मों की जानकारी मिलेगी। इन केंद्रों का लक्ष्य शिक्षा और पर्यटन जोड़ना है। स्थानीय कारोबारियों को भी इससे अवसर मिल सकते हैं। रेशम उत्पादों की बिक्री के रास्ते भी बढ़ सकते हैं।

सुधारों की असली परीक्षा

कपास खरीद के डिजिटल बदलाव किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनसे जानकारी और भुगतान की प्रक्रिया आसान हो सकती है। फिर भी डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। हर किसान के पास स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं होता। कई क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या रहती है। स्थानीय भाषा में सहायता मिलना भी आवश्यक है।

आधार या जमीन रिकॉर्ड में गलती परेशानी बढ़ा सकती है। किसान को आसान सुधार प्रक्रिया उपलब्ध करानी होगी। ऑफलाइन सहायता का विकल्प भी जारी रहना चाहिए। CCI का लक्ष्य किसान केंद्रित खरीद व्यवस्था बनाना है। सुधार उत्सव में इसके शुरुआती परिणाम सामने रखे जाएंगे। असली सफलता खेत और खरीद केंद्र पर दिखेगी।

ये भी पढ़ें…

खाद बिक्री का नया सिस्टम: देशभर के 222 जिलों में खपत 28 फीसदी घटी, सरकार का दावा- 1,470 करोड़ रुपए बचे

गेहूं-चावल के भंडारण की नई तकनीक पर होगा शोध, ICAR और FCI के बीच हुआ समझौता

किसानों की आय बढ़ाने पर सीतारमण का जोर, गिनाईं सरकारी योजनाएं, बोलीं- खाद से तकनीक तक मदद कर रही सरकार

इथेनॉल ब्लेंडिंग पर गडकरी बोले, किसानों को मिलेगा नया बाजार, गिनाए खेती के फायदे

GENERAL newz@gmail.com

Read more