मध्य प्रदेश के धार जिले में अल्प वर्षा ने चिंता बढ़ाई है। इसका असर आगामी रबी सीजन पर पड़ने की आशंका है। इसी चुनौती से निपटने के लिए कृषि विभाग ने तैयारी शुरू की। कृषि विज्ञान केंद्र में अधिकारियों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में रबी सीजन 2026-27 की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। इसमें कम पानी वाली रबी फसलों को प्राथमिकता दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त संचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने की। उन्होंने बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कम पानी वाली फसलों पर जोर
जितेंद्र सिंह ने अल्प वर्षा की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन को जरूरी बताया। सिंह ने अल-नीनो के संभावित प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने चना, मसूर, सरसों और चिया को बेहतर विकल्प बताया। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत पड़ती है। सही किस्म चुनने से उत्पादन का जोखिम कम हो सकता है।
उन्होंने अधिकारियों से किसानों तक उन्नत किस्मों की जानकारी पहुंचाने को कहा। किसानों को फसल विविधीकरण के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। अधिकारियों को नवाचार आधारित खेती बढ़ाने के निर्देश मिले। इसका उद्देश्य सीमित पानी में बेहतर उत्पादन प्राप्त करना है।
बीज उपलब्धता की तैयारी
संयुक्त संचालक ने उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडार रखने को कहा। बीजों की मांग विकासखंड के अनुसार तय की जाएगी। अधिकारियों को स्थानीय जल उपलब्धता का आकलन भी करना होगा। इसके आधार पर फसलों और किस्मों की सलाह दी जाएगी। कम अवधि में पकने वाली किस्मों पर विशेष ध्यान रहेगा। ऐसी किस्में सीमित सिंचाई में उपयोगी हो सकती हैं।
कृषि वैज्ञानिक डीएस मंडलोई ने सब्जी फसलों पर जानकारी दी। उन्होंने कम अवधि वाली सब्जियों को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने उपलब्ध पानी के वैज्ञानिक उपयोग को जरूरी बताया। किसानों को परिस्थिति के अनुसार फसल चुनने की सलाह मिलेगी।
सूक्ष्म सिंचाई की जानकारी
उप संचालक कृषि विजय चौरसिया ने सिंचाई तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली का महत्व बताया। मिनी स्प्रिंकलर भी सीमित पानी में उपयोगी हो सकता है। इन प्रणालियों से पानी सीधे जरूरी हिस्से तक पहुंचता है। इससे पारंपरिक सिंचाई के मुकाबले पानी बचाया जा सकता है। किसानों को इन तकनीकों के लिए जागरूक किया जाएगा।
अधिकारियों को गांव स्तर पर जानकारी पहुंचाने के निर्देश मिले। किसानों को उपलब्ध योजनाओं की पात्रता भी समझाई जाएगी। सिंचाई तकनीक का चयन खेत और फसल अनुसार होगा। सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसी तकनीक उपयोगी नहीं रहती।
फसल बीमा पर भी जोर
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर चर्चा हुई। पात्र किसानों को बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। केसीसी (Kisan Credit Card) धारक किसान भी योजना से जुड़ सकेंगे। पात्र ऋणी और गैर-ऋणी किसानों को जानकारी दी जाएगी।
फसल नुकसान होने पर बीमा से आर्थिक मदद मिल सकती है। दावा मिलने के लिए सही जानकारी देना जरूरी होता है। किसानों को समय सीमा के भीतर पंजीयन कराना होगा। फसल और क्षेत्र की जानकारी भी सही दर्ज करनी होगी। अधिकारियों को बीमा प्रक्रिया स्पष्ट तरीके से समझाने के निर्देश मिले। इससे किसानों में भ्रम और गलत आवेदन कम होंगे।
उर्वरक वितरण पर चर्चा
कार्यक्रम में संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी जोर दिया गया। अधिक उर्वरक मिट्टी की सेहत प्रभावित कर सकता है। किसानों को जरूरत अनुसार उर्वरक उपयोग की सलाह मिलेगी। इसके लिए मृदा परीक्षण की जानकारी भी उपयोगी होगी।
अधिकारियों ने ई-विकास प्रणाली की जानकारी साझा की। किसान इस व्यवस्था से उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी रखने को कहा गया। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर सामग्री उपलब्ध कराना है। संतुलित पोषण से फसल की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इससे खेती की अनावश्यक लागत भी कम की जा सकती है।
प्राकृतिक खेती की योजना
आत्मा (Agricultural Technology Management Agency) परियोजना संचालक करण सिंह झणिया ने कार्ययोजना बताई। उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती की जानकारी साझा की। किसानों को स्थानीय संसाधनों से खेती करने के तरीके बताए जाएंगे। इससे रासायनिक सामग्री पर निर्भरता कम हो सकती है।
प्राकृतिक खेती को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की तैयारी है। इच्छुक किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। जैविक खेती में प्रमाणन और बाजार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसानों को विपणन संबंधी जानकारी भी देनी होगी। सिर्फ उत्पादन बढ़ाना पूरी योजना का उद्देश्य नहीं है। खेती की लागत घटाना भी जरूरी माना गया है।
पांच विकासखंड जुड़े
कार्यक्रम में पांच विकासखंडों के कृषि अधिकारी शामिल हुए। इनमें धार, तिरला, नालछा, सरदारपुर और बदनावर शामिल हैं। बैठक में 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे। कृषि विस्तार अधिकारियों ने क्षेत्रीय परिस्थितियों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में त्रिलोक चंद छावनियां और दिलीप सिंह मौर्य शामिल हुए। बसंत कुमार खंडवाये और कैलाश पचाया भी मौजूद रहे। मुकेश मुबेल, राकेश मंडलोई और आनंद कुमार सत्यार्थी भी पहुंचे। घनश्याम बग्गड़ और राजेश बर्मन ने भी भाग लिया। प्रक्षेत्र अधीक्षक विवेक बार्चे कार्यक्रम में मौजूद रहे। जिला कार्यालय से संतोष पाटीदार सहित अन्य कर्मचारी शामिल हुए।
किसानों तक पहुंचेगी सलाह
बैठक में विकासखंडवार फसल योजना बनाने पर सहमति बनी। इसमें उपलब्ध पानी और मिट्टी का ध्यान रखा जाएगा। किसानों को गांव स्तर पर फसल संबंधी जानकारी दी जाएगी। अधिकारी उपयुक्त बीज और उन्नत किस्मों की जानकारी पहुंचाएंगे।
कम वर्षा वाले क्षेत्रों में फसल चयन बेहद महत्वपूर्ण होगा। गलत फसल चुनने से सिंचाई लागत बढ़ सकती है। चना और मसूर कम पानी वाले अच्छे विकल्प माने जाते हैं। सरसों भी सीमित सिंचाई में लगाई जा सकती है। चिया की खेती बाजार उपलब्धता देखकर करने की सलाह जरूरी होगी। किसानों को मांग और कीमत की जानकारी भी चाहिए।
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