कम बारिश की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को नई सलाह दी है। इंदौर संभाग में रबी सीजन की तैयारी शुरू हो चुकी है। विभाग ने किसानों से कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का चयन करने को कहा है।
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के संयुक्त संचालक जितेंद्र कुमार सिंह ने समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में संभाग के सभी जिलों के कृषि अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में रबी सीजन के लिए बीज, उर्वरक और कृषि योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को तय समय में योजनाओं के लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए गए।
दलहन-तिलहन खेती बढ़ाने की तैयारी
अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। अधिकारियों ने किसानों को इन फसलों की खेती के लिए प्रेरित करने की योजना बनाई है।
दलहन और तिलहन फसलों में पानी की जरूरत कई फसलों की तुलना में कम होती है। इससे कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को राहत मिल सकती है। बैठक में इंदौर संभाग के जिलों ने रबी सीजन की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की। इसमें दलहन और तिलहन फसलों का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कम पानी वाली गेहूं प्रजातियां
कृषि विभाग ने कम पानी की स्थिति में गेहूं की उपयुक्त प्रजातियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने किसानों को ऐसी किस्मों की जानकारी देने को कहा है। कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में सही फसल चयन किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगा। इससे पानी की बचत के साथ उत्पादन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
विभाग किसानों को खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों के माध्यम से जरूरी सलाह भी दी जाएगी।
बीज और खाद व्यवस्था की समीक्षा
बैठक में रबी सीजन के लिए कृषि आदानों की व्यवस्था पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बीज और उर्वरक उपलब्धता की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जिलों में पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध है। बीज प्रमाणीकरण अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की। उर्वरक वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। किसानों को ई-विकास प्रणाली के माध्यम से खाद उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।
मार्कफेड के अधिकारियों ने बताया कि समय-समय पर रेक प्वाइंट से उर्वरक पहुंचाया जा रहा है। समितियों के माध्यम से वितरण व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में प्राकृतिक और जैविक खेती योजनाओं की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने किसानों को इन तरीकों से जोड़ने के निर्देश दिए। प्राकृतिक खेती के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और परंपरागत कृषि विकास योजना की समीक्षा की गई। इसके साथ ही जिलों में चल रहे प्राकृतिक और जैविक हाट बाजारों को बेहतर तरीके से संचालित करने को कहा गया।
गुणवत्ता जांच पर रहेगी नजर
कृषि आदानों की गुणवत्ता को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। अधिकारियों को उर्वरक और अन्य सामग्री की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए। अनियमितता मिलने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया। विभाग किसानों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रहा है। बैठक में मंडी, सहकारिता, मार्कफेड, बीज निगम और कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी मौजूद रहे।
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