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मूंग खरीद 5.33 लाख टन पार, मध्य प्रदेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, किसानों को भुगतान पर रहा सरकार का फोकस

newz@gmail.com | Sep 8, 2026, 19:12 IST

मध्य प्रदेश में ग्रीष्म 2026 की मूंग खरीद 5.33 लाख टन पहुंची। केंद्र ने 5.39 लाख टन खरीद मंजूर की थी। NAFED और NCCF ने खरीद की। किसानों को समय पर भुगतान और पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर रहा।

मूंग खरीदी

मध्य प्रदेश में मूंग खरीद 5.33 लाख टन के पार पहुंच गई है। यह खरीद ग्रीष्म 2026 सीजन की मूंग के लिए हुई। केंद्र ने राज्य के लिए 5.39 लाख टन खरीद मंजूर की थी। इसमें 5.33 लाख टन मूंग खरीदी जा चुकी है। केंद्र सरकार ने खरीद प्रक्रिया को लगभग पूरा बताया है।

यह खरीद समर्थन मूल्य पर की गई है। MSP यानी Minimum Support Price किसानों को मूल्य सुरक्षा देता है। 2026-27 के लिए मूंग का MSP 8,780 रुपए प्रति क्विंटल है। पिछले साल यह भाव 8,768 रुपए था। इस तरह इस साल 12 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

हजारों किसान अपनी उपज बेचने के लिए खरीद केंद्र पहुंचे। इस प्रक्रिया में पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता मिली। खरीद के लिए तय सरकारी व्यवस्था के तहत काम हुआ। उपज की जांच के बाद उसकी तौल की गई। इसके बाद भुगतान किसान के बैंक खाते में भेजा गया।

5.39 लाख टन खरीद मंजूर

शुरुआत में खरीद की मात्रा कम तय की गई थी। केंद्र ने पहले 4,54,580 मीट्रिक टन मंजूर किए थे। बाद में 84,492 मीट्रिक टन की अतिरिक्त मंजूरी मिली। इससे कुल स्वीकृत मात्रा 5,39,072 मीट्रिक टन हो गई। यह अतिरिक्त मंजूरी किसानों के हित में दी गई। इस फैसले से राज्य सरकार पर वित्तीय भार नहीं आया।

सरकार का मकसद इच्छुक किसानों की उपज खरीदना था। पंजीकृत किसानों की उपलब्ध मूंग खरीदने पर जोर रहा। इससे तय सीमा के भीतर खरीद को बढ़ाया गया। अंतिम आंकड़ा 5.33 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। यानी मंजूर मात्रा का बड़ा हिस्सा खरीदा गया है।

यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में भी बेहतर है। ग्रीष्म 2025 में 3,93,123.79 मीट्रिक टन खरीद हुई थी। उस साल 4,19,692 मीट्रिक टन खरीद मंजूर थी। इस साल स्वीकृति और वास्तविक खरीद दोनों बढ़ी हैं। केंद्र ने इसे बेहतर प्रदर्शन के रूप में बताया है।

NAFED और NCCF ने खरीदी

मूंग की खरीद मुख्यतः दो केंद्रीय एजेंसियों ने की। इनमें NAFED और NCCF शामिल हैं। NAFED यानी National Agricultural Cooperative Marketing Federation है। NCCF यानी National Cooperative Consumers’ Federation है। इन एजेंसियों के जरिए किसानों से खरीद की गई।

सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया। किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाना लक्ष्य रहा। समय पर भुगतान को भी अहम मुद्दा बनाया गया। सरकार ने भुगतान व्यवस्था मजबूत करने की बात कही है। इससे किसानों की नकदी जरूरतों को मदद मिल सकती है।

किसानों को MSP का सहारा

मूंग का मौजूदा MSP 8,780 रुपए प्रति क्विंटल है। केंद्र ने यह भाव 2026-27 सीजन के लिए तय किया है। इस भाव पर सरकारी खरीद से मूल्य सुरक्षा मिलती है। सरकार ने मूंग के लिए लागत पर 61 प्रतिशत मार्जिन बताया है।

MSP व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को न्यूनतम मूल्य सुरक्षा देना है। इससे बाजार में भाव गिरने का जोखिम कुछ घटता है। हालांकि हर किसान की बिक्री सरकारी खरीद में नहीं होती। इसके लिए तय नियमों और पंजीयन प्रक्रिया का पालन जरूरी है। सरकारी खरीद केंद्रों पर गुणवत्ता जांच भी होती है।

भुगतान पर सरकार का फोकस

केंद्र ने भुगतान प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही। सरकार का जोर पैसा समय पर पहुंचाने पर है। खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की बात भी कही गई। किसानों के बैंक खातों में भुगतान भेजने की व्यवस्था है।

समय पर भुगतान का असर ग्रामीण बाजार पर भी पड़ता है। सरकार ने खरीद और भुगतान व्यवस्था मजबूत करने की बात कही। केंद्र और राज्य मिलकर इस दिशा में काम करेंगे। इससे भविष्य की खरीद प्रक्रिया अधिक सुचारु हो सकती है। किसानों की शिकायतों और भुगतान देरी पर निगरानी जरूरी होगी।

फसल बीमा पर भी चर्चा

मूंग खरीद के साथ फसल बीमा पर भी चर्चा हुई। बैठक में PMFBY यानी Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana का मुद्दा उठा। मध्य प्रदेश में RWBCIS लागू करने पर भी चर्चा हुई। RWBCIS यानी Restructured Weather Based Crop Insurance Scheme है।

इस योजना में मौसम से जुड़े जोखिमों का आकलन होता है। बारिश और तापमान जैसे आंकड़े इसमें अहम होते हैं। मौसम आधारित बीमा किसानों को जोखिम से बचाता है। खराब मौसम से फसल प्रभावित होने पर राहत मिल सकती है।

WINDS लागू करने पर जोर

बैठक में WINDS व्यवस्था की प्रगति भी देखी गई। WINDS यानी Weather Information Network and Data System है। यह स्थानीय स्तर पर मौसम आंकड़े जुटाने में मदद करता है। इसमें मौसम केंद्रों से आंकड़े जुटाए जाते हैं। इन आंकड़ों से बीमा और फसल आकलन बेहतर हो सकता है।

मध्य प्रदेश में WINDS का क्रियान्वयन अभी लंबित बताया गया है। केंद्र ने राज्य से इसे जल्द लागू करने को कहा। अधिकारियों ने इसकी उपयोगिता पर भी जोर दिया। WINDS के बिना मौसम आधारित बीमा मुश्किल हो सकता है।

CCE से जांच और सटीक होगी

केंद्र ने CCE फिर शुरू करने का सुझाव दिया है। CCE यानी Crop Cutting Experiments होता है। इसमें खेत की फसल काटकर वास्तविक उपज मापी जाती है। इससे तकनीकी मॉडल के आंकड़ों की जांच हो सकती है। मॉडल की गलतियों को भी बेहतर तरीके से सुधारा जा सकता है।

केंद्र ने तकनीकी और जमीनी आंकड़े जोड़ने की सलाह दी। इसे Blended Approach के रूप में आगे बढ़ाने की बात है। इससे फसल उपज का अनुमान ज्यादा भरोसेमंद हो सकता है। बीमा दावों के आकलन में भी मदद मिल सकती है।

किसानों के लिए आगे क्या

मूंग खरीद का मौजूदा चरण लगभग पूरा हो चुका है। सरकार ने 5.33 लाख टन खरीद दर्ज की है। स्वीकृत सीमा 5.39 लाख टन थी।
अब ध्यान भुगतान और बीमा व्यवस्था पर है। किसानों के लिए दोनों मुद्दे सीधे आर्थिक महत्व रखते हैं।

मूंग उत्पादकों के लिए MSP सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। 2026-27 में यह भाव 8,780 रुपए प्रति क्विंटल है। सरकारी खरीद से किसानों को मूल्य सुरक्षा मिलती है। समय पर भुगतान मिलने से नकदी की समस्या घट सकती है। बेहतर बीमा व्यवस्था खेती के जोखिम को भी कम कर सकती है।

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