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मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना: भैंस खरीद पर 75% तक सब्सिडी, गांवों में बढ़ेगा रोजगार

editor | Aug 25, 2026, 09:25 IST

एमपी सरकार ने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना शुरू की है। इसके तहत दुधारू भैंसों की खरीद पर भारी सब्सिडी मिलेगी। इससे छोटे किसानों और महिलाओं को कमाई का नया जरिया मिलेगा।

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भोपाल | ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डेयरी व्यवसाय को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को दुधारू भैंसें खरीदने पर भारी सब्सिडी दी जा रही है, जिससे कम लागत में डेयरी यूनिट शुरू हो सके और परिवारों को स्थायी आय का जरिया मिले।सरकार का फोकस खासकर छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन मजदूरों और महिला स्वयं सहायता समूहों पर है।

कितनी मिलेगी सब्सिडी

योजना में लगभग 3 लाख रुपए की लागत वाली एक डेयरी यूनिट पर सरकार अनुदान दे रही है। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को कुल लागत का 50% तक सब्सिडी मिलेगी। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सब्सिडी 75% तक बढ़ा दी गई है। यानी SC/ST हितग्राहियों को सिर्फ 25% राशि ही खुद वहन करनी होगी।सिर्फ भैंस खरीद ही नहीं, पशुओं को एक जगह से दूसरी जगह लाने-ले जाने के परिवहन खर्च में भी सहायता दी जा रही है। साथ ही टीकाकरण, बीमा और शुरुआती चारा प्रबंधन के लिए भी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

रोजगार और दूध उत्पादन दोनों

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है। एक औसत भैंस प्रतिदिन 8 से 10 लीटर दूध देती है। ऐसे में 2-3 भैंसों से भी एक परिवार को हर महीने 15 हजार से 20 हजार रुपए तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। इसके साथ ही प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाकर सहकारी दुग्ध संघों और निजी डेयरियों को कच्चा माल उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता है। इससे न सिर्फ दूध की कीमत स्थिर रहेगी, बल्कि किसानों को समय पर भुगतान भी मिलेगा।

सरकारी स्तर पर भी मिल रही मदद

चयन से बाजार तक योजना को प्रभावी बनाने के लिए पशुपालन विभाग ने ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाना शुरू कर दिया है। वहां पटवारी, ग्राम सचिव और पशु चिकित्सक मिलकर पात्र हितग्राहियों की पहचान कर रहे हैं।

आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से लिए जा रहे हैं। चयन के बाद लाभार्थियों को पशुपालन विभाग द्वारा 3 दिन का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें भैंसों की देखभाल, संतुलित आहार, बीमारियों की पहचान और दूध की स्वच्छता जैसे विषय शामिल हैं। बाजार की दिक्कत न आए इसके लिए विभाग ने दुग्ध संघों से अनुबंध किया है। प्रशिक्षित हितग्राहियों का दूध सीधे सहकारी समितियों में खरीदा जाएगा। महिलाओं के समूहों को प्राथमिकता देकर उन्हें बैंक लिंकेज और मार्केटिंग में भी मदद की जा रही है।

गांव की तस्वीर बदलेगी

पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह योजना सिर्फ सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना है। कम निवेश में शुरू होने वाला व्यवसाय बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए आय का बड़ा स्रोत बन सकता है। विभाग ने लक्ष्य रखा है कि अगले एक साल में प्रदेश के हर जिले में कम से कम 500 नई डेयरी यूनिट शुरू हों। इससे ग्रामीण इलाकों में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और पलायन पर भी रोक लगेगी।

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