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भारतीय चावल निर्यात पर चीन की सख्ती, तीन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

newz@gmail.com | Sep 18, 2026, 17:30 IST

चीन ने GMO यानी जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म मिलने के शक में तीन भारतीय चावल एक्सपोर्टर्स का रजिस्ट्रेशन रद्द किया है। अब प्रभावित भारतीय कंपनियों की संख्या 10 हो गई है। कारोबारियों ने जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चीन पर नॉन-टैरिफ बैरियर लगाने का आरोप लगाया।

भारतीय चावल

चीन ने भारतीय चावल के कारोबार को लेकर नया कदम उठाया है। चीन ने तीन भारतीय कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया है। इन कंपनियों पर GMO मिलने के शक में कार्रवाई हुई है। प्रभावित कंपनियां आंध्र प्रदेश और दिल्ली से जुड़ी हैं।

इनमें काकीनाडा की सरला फूड्स शामिल है। पट्टाभि एग्रो फूड्स पर भी कार्रवाई हुई है। नई दिल्ली की ओम इंडिया ट्रेडिंग लिमिटेड भी प्रभावित हुई है। इससे प्रभावित भारतीय एक्सपोर्टर्स की संख्या 10 हो गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है। भारत से चीन को चावल निर्यात तेजी से बढ़ा है।

GMO जांच पर क्या कहा गया

राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव ने जानकारी दी। वह पट्टाभि एग्रो फूड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। राव के अनुसार, चीन के कस्टम विभाग ने आपत्ति जताई। चीन का जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स यानी GACC जिम्मेदार विभाग है।

चीन ने कुछ चावल खेपों को तय मानकों से अलग बताया। चीनी खरीदार ने GMO मिलने की जानकारी दी। ये सभी प्रभावित खेपें टूटे हुए चावल की थीं। राव ने इसी आधार पर चीन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, शिपमेंट से पहले जांच में GMO नहीं मिला था। चीन पहुंचने के बाद जांच में अलग दावा सामने आया।

भारत में जांच का नतीजा क्या रहा

कुछ रिजेक्ट की गई चावल खेपें भारत वापस लाई गईं। इसके बाद इन खेपों की दोबारा जांच कराई गई। छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन ने जानकारी दी। उनके अनुसार, FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने जांच की।

जैन के मुताबिक, जांच में GMO नहीं मिला। उनका कहना है कि बाद में खेपें दूसरे देशों भेजी गईं। उन देशों में भी चावल की गुणवत्ता को लेकर बड़ी समस्या नहीं मिली। इससे भारतीय कारोबारियों के सवाल और बढ़ गए हैं। हालांकि, चीन की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसलिए जांच को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग हैं।

70 से ज्यादा खेपें हुईं रिजेक्ट

रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 2026 में बड़ी संख्या में खेपें रोकीं। मई के अंत तक 70 से ज्यादा नॉन-बासमती खेपें रिजेक्ट हुईं। इन खेपों को GMO का हवाला देकर रोका गया। इससे पहले सात भारतीय एक्सपोर्टर्स पर कार्रवाई हुई थी। इनमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कंपनियां शामिल थीं। अब तीन नई कंपनियों पर कार्रवाई हुई है।

इस तरह प्रभावित एक्सपोर्टर्स की संख्या 10 हो गई है। भारतीय कारोबारियों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। भारत में फिलहाल GM धान की व्यावसायिक खेती नहीं होती। इसी वजह से GMO जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

खेप रिजेक्ट होने पर खर्च बढ़ा

चीन में खेप रिजेक्ट होने से कारोबारियों का खर्च बढ़ रहा है। एक कंटेनर चीन भेजने की लागत करीब 250 डॉलर बताई गई है। बीवी कृष्णा राव के मुताबिक, वापसी का खर्च करीब 2,500 डॉलर है। यानी रिजेक्शन के बाद लागत कई गुना बढ़ जाती है।

मुकेश जैन ने इससे भी ज्यादा खर्च की जानकारी दी। उनके अनुसार, कुछ मामलों में खर्च 4,000 डॉलर तक पहुंचा। कुछ मामलों में यह लागत 4,500 डॉलर तक बताई गई। ऐसे खर्च से एक्सपोर्ट कारोबार पर सीधा असर पड़ता है।

कारोबारियों को परिवहन और लॉजिस्टिक्स का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है। साथ ही खेप के भुगतान को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ती है।

चीन को भारतीय चावल का निर्यात बढ़ा

चीन के साथ यह विवाद बढ़ते निर्यात के बीच सामने आया है। भारत का नॉन-बासमती चावल निर्यात चीन को बढ़ा है। APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) के आंकड़े इसका संकेत देते हैं। 2025 में भारत ने चीन को करीब 2.07 लाख टन चावल भेजा।

जनवरी से जून 2026 के बीच निर्यात करीब 4.92 लाख टन रहा। छह महीनों में यह मात्रा पिछले साल से ज्यादा रही। इस बढ़ते कारोबार के बीच नई जांच सामने आई है। इससे एक्सपोर्टर्स के लिए आगे की स्थिति अहम हो गई है। अगर ऐसी जांच बढ़ती है, तो लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसके वास्तविक असर का आकलन आगे होगा।

कारोबारियों ने नॉन-टैरिफ बैरियर बताया

भारतीय चावल कारोबारियों ने चीन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य गुणवत्ता जांच से अलग दिखती है। कारोबारियों ने चीन पर नॉन-टैरिफ बैरियर लगाने का आरोप लगाया है। इसका मतलब बिना शुल्क बढ़ाए व्यापार पर रोक लगाना है।

उनका कहना है कि इससे भारतीय चावल की पहुंच प्रभावित हो सकती है। खासकर बढ़ते निर्यात के बीच इसका असर महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, चीन की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। चीन ने इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसलिए फिलहाल कारोबारियों के आरोप और चीन की कार्रवाई सामने हैं। पूरे मामले में आधिकारिक जवाब आने के बाद तस्वीर साफ होगी।

सरकार के सामने क्या चुनौती है

चावल से जुड़े संगठनों ने यह मामला वाणिज्य मंत्रालय के सामने उठाया है। एक्सपोर्टर्स सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि चीन के सामने यह मुद्दा उठाया जाए। साथ ही भारतीय खेपों की जांच को लेकर बातचीत हो।

निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी चिंता अतिरिक्त लागत है। खेप लौटने पर खर्च कई गुना बढ़ जाता है। दूसरी चिंता चीन के बाजार में कारोबार की अनिश्चितता है। लगातार रिजेक्शन से खरीदारों और निर्यातकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

भारत के लिए चीन एक महत्वपूर्ण चावल बाजार बन रहा है। इसलिए आगे की बातचीत कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल जांच के आधार को लेकर है। चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया से इस विवाद को दिशा मिल सकती है।

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