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एमपी : धान में कीट नियंत्रण के तरीके सीख रहे किसान, कृषि विभाग ने दी नीमास्त्र और जैविक उपायों की जानकारी

newz@gmail.com | Sep 26, 2026, 22:40 IST

मध्य प्रदेश के बालाघाट में किसानों को धान में कीट और रोग नियंत्रण की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अभियान में तना छेदक, माहू की पहचान, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और जरूरत पर रासायनिक उपायों के बारे में बताया गया।

धान में कीट

धान की फसल में समय पर कीट और रोग नियंत्रण जरूरी है। लापरवाही होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी को देखते हुए मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में किसानों के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत लांजी विकासखंड के ग्राम कारंजा में कार्यक्रम आयोजित हुआ।

कृषि विभाग आत्मा समिति के मार्गदर्शन में किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक और पर्यावरण हितैषी खेती के फायदे बताए गए। साथ ही धान में लगने वाले प्रमुख कीटों की पहचान समझाई गई।

तना छेदक और माहू से बचाव

किसानों को धान में लगने वाले तना छेदक और माहू की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि खेत की नियमित निगरानी जरूरी है। शुरुआती स्तर पर कीट पहचान होने से नुकसान कम किया जा सकता है।

किसानों को सलाह दी गई कि फसल में बदलाव दिखने पर तुरंत निरीक्षण करें। किसी भी दवा का उपयोग पहचान के बाद ही करें। इससे अनावश्यक खर्च और नुकसान से बचा जा सकता है।

जीवामृत से जैविक खेती

कार्यक्रम में अजय बिजेवार ने प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र बनाने की विधि बताई। किसानों को बताया गया कि स्थानीय संसाधनों से जैविक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इनका उपयोग फसल प्रबंधन में किया जा सकता है।

धान में माहू और तना छेदक की रोकथाम के लिए ब्रह्मास्त्र और नीमास्त्र के उपयोग की जानकारी दी गई। किसानों को 3 से 5 लीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव की जानकारी दी गई।

खेतों का किया निरीक्षण

अभियान के दौरान किसानों के खेतों का निरीक्षण भी किया गया। कृषक हेमेंद्र उमरे के सीधी बुवाई वाले धान खेत में अधिकारी पहुंचे। उन्होंने फसल की स्थिति और कीट प्रकोप की जांच की। निरीक्षण में तना छेदक और माहू का प्रकोप कम पाया गया।

किसानों को बताया गया कि नियमित निरीक्षण से शुरुआती समस्या पकड़ी जा सकती है। इससे समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाकर फसल को बचाया जा सकता है।

तना छेदक की पहचान

किसानों को तना छेदक की पहचान के लक्षण भी बताए गए। जानकारी के अनुसार इसका प्रकोप दो प्रमुख अवस्थाओं में देखा जाता है। पहला प्रकोप रोपाई के 20 से 25 दिन बाद हो सकता है। दूसरा प्रकोप करीब 60 से 65 दिन बाद दिखाई देता है।

अधिक प्रकोप होने पर धान की बालियां सफेद और खोखली दिखाई देती हैं। ऐसी बालियां खींचने पर आसानी से बाहर निकल सकती हैं। तने के नीचे की तरफ कीट का मल भी दिखाई दे सकता है।

ज्यादा प्रकोप पर दवा की सलाह

किसानों को अधिक प्रकोप की स्थिति में अनुशंसित दवाओं की जानकारी दी गई। तना छेदक के लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एसपी, क्लोरपायरीफॉस 50 प्रतिशत ईसी, प्रोफेनोफॉस 50 प्रतिशत ईसी और इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी के उपयोग की जानकारी दी गई।

वहीं माहू नियंत्रण के लिए पाइमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी, डायनोटेफ्यूरान 20 प्रतिशत एसजी और ट्राइफ्लूमेजोपाइरिम 10.6 प्रतिशत एससी के विकल्प बताए गए। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से कहा कि बिना पहचान के दवा का उपयोग नहीं करें।

शीथ ब्लाइट से बचाव

कार्यक्रम में धान के शीथ ब्लाइट रोग की जानकारी भी दी गई। किसानों को रोग पहचान और बचाव के तरीके समझाए गए। रोग नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के उपयोग की जानकारी दी गई।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की लगातार निगरानी करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सही समय पर पहचान और उचित उपाय अपनाने से नुकसान कम किया जा सकता है।

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