संजय शर्मा@भोपाल. मध्य प्रदेश में बीज का कारोबार अब खेती नहीं, ठगी का धंधा बन गया है। किसान बोवनी से पहले ही अमानक बीज के जाल में फंस रहा है। कृषि विभाग के पास बीज निर्माताओं के खेतों का डेटा तक नहीं है, जहां वे सर्टिफाइड बीज पैदा करने का दावा करते हैं। स्थिति यह है कि जिन फर्मों के पास खुद के खेत नहीं है वे भी सालाना हजारों टन बीज बाजार में खपा रहे हैं। यहीं से सब स्टैंडर्ड बीज का कालाबाजार फल फूल रहा है। उधर, कृषि विभाग का बीज प्रमाणीकरण और परीक्षण अमला फाइलों पर जांच और कार्रवाई का गेम खेल रहा है। कई फर्मों को तो अपनी पहुंच के दम पर घर बैठे ही बीज सर्टिफिकेशन और क्लीयरेंस मिल रहा है।
जिन फसलों की मध्य प्रदेश में बोवनी बड़े स्तर पर होती है उनके लिए भी बीज मिलना मुश्किल है। हालत यह है कि बुआई का सीजन आते ही बीजों के दाम उछल जाते हैं। सामान्य महीनों के मुकाबले यह कीमत डेढ़ से दोगुनी तक पहुंच जाती है। वहीं अच्छे बीज की तलाश में परेशान किसान मंहगी कीमतों के चक्कर में अमानक बीज के जाल में फंस जाते हैं। सीजन आते ही बाजार में कृत्रिम शॉर्टेज का माहौल बना दिया जाता है। वहीं जिम्मेदार अधिकारी, बीज निगम, सहकारी समितियों और प्राइवेट कंपनियों के बीच बीजों की उपलब्धता और निगरानी का कोई समन्वय ही नहीं है।
किसान को बीज के थैलों पर जो लेबल मिलता है वे उसी को प्रमाण मानकर बुआई कर देते हैं। जबकि हकीकत यह है कि कई फर्मों के पास फाउंडेशन सीड का सोर्स न होने के बावजूद वे सर्टिफाइड बीज बाजार में खपाते हैं। बीज अधिनियम 1966 और सीड कंट्रोल ऑर्डर के तहत सैंपलिंग का नियम है, लेकिन जांच तभी होती है जब अंकुरण न होने पर किसान शिकायत करें। वहीं जानकारी के अभाव में किसान कलेक्टर, एसडीएम के चक्कर काटते ही रह जाते हैं।
अमानक बीजों का कच्चा चिट्ठा
धार-खरगोन करेला बीज कांड
मध्य प्रदेश के धार और खरगोन जिलों में नवंबर 2025 में बेचे गए करेला बीज ‘रुबासाटा’ से फसल सिकुड़ गई, पीली पड़कर झड़ गई। किसानों ने 17 फरवरी 2026 को शिकायत की, फिर दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिले। जांच में प्रथम दृष्टया अमानक बीज को प्रमाणित बताकर बेंचना पाया गया। इसकी शिकायत पर मनावर थाने में BNS 2023 की धारा 318(4) और 324(5) के साथ ही EC एक्ट और सीड एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। जिसमें हैदराबाद की बीज निर्माता कंपनी नुन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाते हुए उसके बीजों की बिक्री पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
MP में अमानक बीज के सबसे ज्यादा केस
मध्य प्रदेश अमानक बीज के मामलों में देश के अन्य राज्यों से आगे है। विदिशा में किसानों की शिकायत पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने भी घटिया बीज का मामला उजागर हो चुका है। जिसके बाद प्रदेशभर में बीजों की सैंपलिंग कराई गई। बीज परीक्षण अधिकारियों द्वारा लिए गए सैंपलों में से करीब 10% बीज सैंपल अमानक स्तर के पाए गए हैं। जबकि देश में सब स्टैंडर्ड बीज का औसत तीन से चार प्रतिशत ही है। बीते साल उत्तरप्रदेश में लिए गए सैंपलों में से दो फीसदी से कम, उत्तराखंड में 2.6% और गुजरात में तीन फीसदी से कम बीज सैंपल अमानक पाए गए हैं।
घटिया बीज के मामलों में धीमी कार्रवाई
सब स्टैंडर्ड बीज की बिक्री में देश के दूसरे राज्यों को पछाड़ने वाला मध्य प्रदेश कार्रवाई में फिसड्डी है। साल 2025-26 में अमानक बीज विक्रेता और निर्माताओं पर शिकायत के बाद 11 केस दर्ज कराए गए हैं, जबकि 2024 में बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने के बावजूद कार्रवाई जांच में ही उलझकर रह गई थी। अमानक बीजों के जरिए किसानों से ज्यादा कीमत वसूलने और खेती बर्बाद कर दोहरा नुकसान पहुंचाने वाले अपनी पहुंच के सहारे बच जाते हैं। मुरैना में ऐसी ही शिकायतों के बाद केस दर्ज कराने की जगह केवल 17 फर्मों के लाइसेंस सस्पेंड कर पल्ला झाड़ लिए गए।
मुरैना कलेक्टर के निर्देश पर उप संचालक कृषि द्वारा लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की गई थी। वहीं, उज्जैन में बिना लाइसेंस सोयाबीन बीज बेचने पर केस दर्ज कराया गया। व्यापारी मंडी से खरीदे गए करीब तीन साल पुराने सोयाबीन को बीज बताकर किसानों को ठग रहा था। चिमनगंज थाने में शिकायत के बाद कुबेर सीड्स एंड बायोटेक के संचालक पर केस दर्ज कराया गया था।
सागर के जरुआखेड़ा में बंद पड़ी दाल मिल के पैक कर अमानक सोयाबीन बीज बेंचने का मामला भी सामने आ चुका है। जून 2026 में आलोक ट्रेडर्स के खिलाफ किसानों की शिकायत पर पुलिस द्वारा केस भी दर्ज किया गया है। यह फर्म मंडी से खरीदी गई जींस को बीज के रूप में बोरियों में टैग लगाकर पैक करके बेच रही थी। इस वजह से बड़ी संख्या में किसान उसके झांसे में आ गए थे।
जबलपुर में धान के गुणवत्तापूर्ण बीज के नाम पर किसानों को झांसा देने वाली फर्म कनक एग्रोशिप और समक सीट्स पर पनागर थाने में केस दर्ज किया गया है। ये फर्में भी किसानों को बीज की अच्छी क्वालिटी का भरोसा दिलाने के लिए एक प्रिंटिंग प्रेस में बड़ी कंपनियों के रैपर और टैग छपवा रही थीं। इसी वजह से किसान उनकी ठगी का शिकार बने और मंहगे खरीदे गए बीजों में पर्याप्त अंकुरण ही नहीं हुआ। ऐसा ही मामला खंडवा में भी सामने आ चुका है। यहां तीन बीज निर्माता फर्मों पर अमानक बीज किसानों को बेचने का केस दर्ज किया गया है। यह फर्म भी किसानों को धोखा देने के लिए अमानक बीजों को गुणवत्ता वाले बीज का टैग लगाकर बेंच रही थी।
नया सीड्स एक्ट लाने की बात कर रही सरकार
केंद्रीय कृषि मंत्री बीजों की कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि नया सीड एक्ट अमानक बीजों की बिक्री पर सख्ती से कसावट कर पाएगा। इसमें सजा के प्रावधान भी कठोर हैं। सरकार के दावे भले ही कड़े हैं, लेकिन जब तक डेटा सिस्टम ही प्रदेश में ठप पड़ा है तो नियम कानून कैसे जमीनी हकीकत बन पाएंगे।
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