मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अरहर की खेती बढ़ी है। इस साल अरहर का रकबा करीब 12,300 हेक्टेयर पहुंच गया। पिछले साल यह क्षेत्र करीब 4,000 हेक्टेयर था। इस तरह रकबे में करीब तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज हुई। कृषि विभाग के अनुसार, फसल इस समय अच्छी स्थिति में है।
अनुकूल मौसम रहने पर बेहतर उत्पादन की संभावना जताई गई है।
यह बदलाव दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से भी जुड़ा है। इस मिशन का लक्ष्य देश में दलहन उत्पादन बढ़ाना है। सरकार अरहर, उड़द और मसूर पर खास जोर दे रही है। मध्य प्रदेश भी इस अभियान में महत्वपूर्ण राज्य है। छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में फसल प्रदर्शन लगाए गए हैं।
खेतों में पहुंचकर अधिकारियों ने फसल देखी
दलहन निदेशालय भोपाल के निदेशक डॉ. महेश कुमार ने दौरा किया। उन्होंने कई गांवों में किसानों से खेती पर बातचीत की। इनमें रामगढ़ी, लिंगा, काजलवानी और मोरडोंगरी शामिल हैं। किसानों से फसल की स्थिति और तकनीक पर चर्चा हुई। उत्पादन से जुड़े सवालों पर भी जानकारी ली गई।
अधिकारियों ने अरहर की उन्नत उत्पादन तकनीक समझाई। किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन के तरीके बताए गए। फसल प्रदर्शनों का भी मौके पर निरीक्षण किया गया। इससे खेतों में अपनाई जा रही तकनीक की जानकारी मिली।
मेड़-नाली पद्धति से फसल प्रदर्शन
मोहखेड़ के सिल्लेवानी गांव में खास प्रदर्शन लगाया गया। यह प्रदर्शन कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव के जरिए लगाया गया। किसानों के खेतों में मेड़-नाली पद्धति अपनाई गई। निरीक्षण के दौरान फसल की स्थिति अच्छी मिली।
डॉ. महेश कुमार ने तकनीक अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने उचित तकनीक से बेहतर उत्पादन की संभावना बताई। उन्होंने किसानों को अरहर का पंजीयन कराने की जानकारी दी। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था भी बताई। सभी फसल प्रदर्शनों का कृषि मैपर ऐप पर पंजीयन होगा।
महिला किसानों से भी हुई चर्चा
दौरे के दौरान महिला किसानों से विशेष बातचीत की गई। उन्हें दलहन उत्पादन में उनकी भूमिका के बारे में बताया गया। महिलाओं को पोषण सुरक्षा से जुड़ी जानकारी भी दी गई। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के बारे में भी समझाया गया।
डॉ. महेश कुमार ने महिलाओं की बढ़ती भूमिका बताई। उनके अनुसार, महिलाएं खेती के कई काम संभाल रही हैं। इनमें फसल प्रबंधन और कृषि गतिविधियां शामिल हैं। दलहन उत्पादन में उनकी भागीदारी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इससे पोषण सुरक्षा के लक्ष्य को भी मदद मिल सकती है।
दलहन मिशन का बड़ा लक्ष्य क्या है
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत 2025 में हुई थी। इस मिशन की अवधि 2025-26 से 2030-31 तक है। सरकार ने इसके लिए 11,440 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। मिशन में उत्पादन और खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर है। अरहर, उड़द और मसूर इसकी प्रमुख फसलें हैं।
केंद्र ने दलहन की खरीद व्यवस्था मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। पंजीकृत किसानों की उपज खरीदने की व्यवस्था मिशन में शामिल है। खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने का प्रावधान बताया गया है। इससे किसानों को बाजार जोखिम से राहत देने की कोशिश है।
केंद्र का लक्ष्य दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। इसके लिए खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर है। केंद्र ने 2030-31 तक क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। उत्पादकता बढ़ाने पर भी मिशन में ध्यान दिया गया है।
छिंदवाड़ा में बदलाव क्यों अहम है
छिंदवाड़ा में अरहर का रकबा बढ़ना स्थानीय स्तर पर अहम बदलाव है। एक साल में क्षेत्र 4,000 से 12,300 हेक्टेयर पहुंचा। इससे जिले में अरहर की खेती का विस्तार साफ दिखता है। कृषि विभाग ने फसल की स्थिति बेहतर बताई है। हालांकि अंतिम उत्पादन मौसम और प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
अरहर किसानों के लिए बाजार और खरीद व्यवस्था भी अहम है। रकबा बढ़ने के साथ उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में समय पर खरीद व्यवस्था जरूरी हो जाती है। सरकार ने दलहन मिशन में खरीद पर जोर दिया है। किसानों को पंजीयन की जानकारी देना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
किसानों को तकनीक की जानकारी भी दी जा रही है
फसल प्रदर्शन किसानों को नई तकनीक दिखाने का जरिया हैं। इन प्रदर्शनों से खेत स्तर पर तरीके समझना आसान होता है। मेड़-नाली पद्धति भी ऐसे ही प्रदर्शनों में शामिल है। इसमें खेत की बनावट के अनुसार पानी प्रबंधन किया जाता है। इससे फसल प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
दलहन मिशन में बीज और तकनीक पर भी जोर है। केंद्र ने प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने की योजना बताई है। किसानों को आधुनिक खेती की ट्रेनिंग देने पर भी जोर है। इन प्रयासों का लक्ष्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना है।
आगे क्या देखना होगा
अब छिंदवाड़ा में फसल की अंतिम स्थिति महत्वपूर्ण होगी। उत्पादन आंकड़े सामने आने के बाद तस्वीर ज्यादा साफ होगी। खरीद व्यवस्था भी किसानों के लिए अहम बनी रहेगी। फसल का बाजार भाव भी किसानों की कमाई तय करेगा। रकबा बढ़ने के बाद बेहतर खरीद व्यवस्था की जरूरत बढ़ेगी।
दलहन मिशन का असर सिर्फ रकबे से तय नहीं होगा। उत्पादन, उत्पादकता, खरीद और बाजार सभी महत्वपूर्ण होंगे। छिंदवाड़ा में इस साल का प्रदर्शन इन्हीं पहलुओं से जुड़ा है। कृषि विभाग अब फसल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
ये भी पढ़ें…
किसान के खेतों में बेदम बीज, मध्य प्रदेश में पनप रहा सब स्टैंडर्ड सीड का कालाबाजार
एमपी की फर्म-समितियां चौथाई बीज भी नहीं बना पा रहीं, खुले बाजार से खरीदने को मजबूर हो रहे किसान
इंदौर संभाग में रबी फसलों की तैयारी, कृषि विभाग की सलाह- कम बारिश में किसान चुनें कम पानी वाली फसलें
