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बालाघाट में धान की फसल पर माहू और लीफ ब्लाइट, कृषि विभाग की बिना सलाह कीटनाशक न छिड़कने की अपील

newz@gmail.com | Sep 19, 2026, 20:34 IST

बालाघाट में कृषि विभाग ने धान के खेतों की निगरानी तेज की है। खारा में माहू और सिवनीकला-सारद में माहू के साथ लीफ ब्लाइट का प्रकोप मिला। विभाग ने किसानों से बिना सलाह कीटनाशक न छिड़कने की अपील की है।

धान में कीट

बालाघाट में इन दिनों धान की फसल पर कीट और रोगों का खतरा है। कृषि विभाग ने खेतों की निगरानी तेज कर दी है। विभाग का मैदानी अमला लगातार गांवों में पहुंच रहा है। अधिकारी धान के खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। वे फसल की हालत देख रहे हैं। कीटों की मौजूदगी और रोगों के लक्षणों की भी जांच हो रही है।

मौके पर ही किसानों को जानकारी दी जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि खेत में कौन सा कीट या रोग है। साथ ही नियंत्रण के सही उपाय भी समझाए जा रहे हैं। विभाग का कहना है कि शुरुआती पहचान से नुकसान घट सकता है। यही वजह है कि अमला खेतों तक पहुंच रहा है। निरीक्षण के साथ जागरूकता पर भी जोर है। विभाग किसानों को समय रहते सचेत करना चाहता है।

ओरम्हा में किसान संगोष्ठी हुई

कीट और रोगों को लेकर 15 सितंबर को एक आयोजन हुआ। बालाघाट विकासखंड के गांव ओरम्हा में रात्रिकालीन किसान संगोष्ठी हुई। इसका मकसद किसानों को जागरूक करना था।

संगोष्ठी में किसानों को कई बातें बताई गईं। उन्हें धान की फसल का नियमित निरीक्षण करने को कहा गया। कीट और रोग के शुरुआती लक्षण पहचानने की जानकारी भी दी गई। समय पर सही प्रबंधन अपनाने पर भी जोर रहा।

असामान्य लक्षणों को अनदेखा न करें किसान

उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय के अनुसार किसानों को साफ सलाह दी गई है। फसल में कोई भी असामान्य लक्षण दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें। शुरुआत में पहचान हो जाए, तो नुकसान काफी हद तक काबू में रहता है।

किसानों को समझाया गया कि पहले सही पहचान जरूरी है। इसके बाद ही अनुशंसित उपाय अपनाने चाहिए। यानी बिना पहचान के दवा का छिड़काव ठीक नहीं है।

मोहगांव खुर्द में निरीक्षण

जागरूकता कार्यक्रम के साथ खेतों में भी निरीक्षण चल रहा है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ग्राम मोहगांव खुर्द पहुंचे। उन्होंने किसान कीर्तिकुमार मेश्राम के खेत का भ्रमण किया।

अधिकारी ने धान की फसल की स्थिति देखी। खेत की स्थिति के आधार पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। किसानों से कहा गया कि वे फसल पर लगातार नजर रखें। खेत में कोई भी बदलाव दिखे, तो तुरंत बताना है। कीट या रोग के लक्षण दिखें, तो मैदानी अमले से संपर्क करना है।

खारा ग्राम पंचायत में मिला माहू कीट

खारा ग्राम पंचायत में कृषि विभाग की टीम पहुंची। टीम ने किसान देवेंद्र पटले का खेत देखा। वहां धान की फसल में माहू की स्थिति दिखाई दी। माहू एक छोटा कीट है, जो पौधे का रस चूसता है।

अधिकारियों ने किसानों को माहू की पहचान बताई। फसल पर इसका क्या असर पड़ता है, यह भी समझाया गया। नियंत्रण के जरूरी उपायों की जानकारी भी दी गई। कृषि अमले की सलाह है कि किसान खेतों का नियमित निरीक्षण करें। कीटों की संख्या बढ़ने से पहले जरूरी प्रबंधन अपनाएं। साथ ही बिना उचित सलाह के किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल न करें।

सिवनीकला में लीफ ब्लाइट

कृषि विभाग की टीम ने सिवनीकला और सारद में भी निरीक्षण किया। यहां किसान महेंद्र सुलाखे का खेत देखा गया। इसमें माहू के साथ लीफ ब्लाइट का प्रकोप मिला। लीफ ब्लाइट पत्तियों को प्रभावित करने वाला रोग है। खबर में इसके लक्षण या इलाज का ब्योरा नहीं दिया गया। इसलिए किसान इसकी सही पहचान विशेषज्ञ से ही कराएं।

निरीक्षण के बाद कृषि अधिकारियों ने किसानों को जानकारी दी। उन्हें रोग और कीट के नियंत्रण के बारे में बताया गया। फसल प्रबंधन की तकनीकी सलाह भी दी गई। अधिकारियों ने किसानों को एक अहम बात समझाई। धान में रोग और कीट की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। शुरुआती लक्षणों की अनदेखी हुई, तो समस्या बढ़ सकती है। तब फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है।

बिना सलाह दवा न छिड़कें

कृषि विभाग ने किसानों से एक अपील भी की है। कीट या रोग के लक्षण दिखें, तो अपने स्तर पर कोई कीटनाशक न डालें। बाजार से बिना जानकारी दवा खरीदकर छिड़काव करना ठीक नहीं है। पहले फसल की स्थिति की सही पहचान करानी चाहिए। इसके लिए किसान अपने क्षेत्र के मैदानी अमले से मिल सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों से भी सलाह ली जा सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करने का सुझाव भी दिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक इससे अनावश्यक कीटनाशक के इस्तेमाल से बचा जा सकता है। अतिरिक्त खर्च भी रुकता है। यानी सही सलाह किसान की जेब के लिए भी फायदेमंद है।

खेतों की नियमित निगरानी

कृषि विभाग के अनुसार मौजूदा मौसम में धान की नियमित निगरानी बहुत जरूरी है। किसानों को खेत में पौधों की पत्तियों, तनों और दूसरे हिस्सों को देखना चाहिए। यह काम समय-समय पर करते रहना है।

कोई भी कीट या रोग का लक्षण दिखे, तो देर न करें। पौधों में असामान्य बदलाव दिखे, तो भी तुरंत कृषि अमले को बताएं। जल्दी जानकारी मिलने से जल्दी समाधान भी मिल सकता है।

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