ग्वालियर जिले में लंपी वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। गोवंश की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिले में अब तक 34 गोवंश की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा मंगलवार को सामने आया। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इलाज में लापरवाही की शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया है। अब आइसोलेशन सेंटर में 24 घंटे पशु चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
रतवाई में आइसोलेशन सेंटर
जिले में संक्रमित गोवंश को रखने के लिए रतवाई गौशाला में आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है। यहां इलाज के इंतजामों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाज में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। इन शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया। मंगलवार से यहां चौबीसों घंटे डॉक्टरों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। मकसद यह है कि किसी भी समय बीमार गोवंश को तुरंत इलाज मिल सके।
कलेक्टर ने बुलाई आपात बैठक
लंपी वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कलेक्टर रुचिका चौहान ने आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में जिले के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में मौजूदा हालात की गहन समीक्षा की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरस के बदले स्ट्रेन को लेकर भी चिंता जताई गई है। कुछ पशु चिकित्सकों का मानना है कि यह नया स्ट्रेन है। यह गोवंश के अंदरूनी अंगों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इसी वजह से मॉनिटरिंग को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं।
25 हजार गोवंश का टीकाकरण
पशुपालन विभाग ने अब तक बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 हजार से अधिक गोवंश को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इसके लिए गोट पॉक्स वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण के बावजूद संक्रमण की रफ्तार थम नहीं रही। यह स्थिति विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भितरवार, डबरा और घाटीगांव जैसे ग्रामीण इलाकों में भी संक्रमण फैल रहा है।
निराश्रित गोवंश पर ज्यादा खतरा
शहर में घूमने वाले आवारा और निराश्रित गोवंश पर संक्रमण का खतरा ज्यादा बना हुआ है। इनकी नियमित निगरानी कर पाना मुश्किल होता है। नगर निगम के कंट्रोल रूम में भी लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं। शिकायत मिलने पर बीमार गोवंश को वाहन से उठाकर भेजा जाता है। हालांकि संसाधनों की कमी अभियान की रफ्तार पर असर डाल रही है। गौशालाओं में रह रहे गोवंश भी इस संक्रमण से अछूते नहीं हैं।
पशुपालकों के लिए सलाह
पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील की है। गोवंश में बुखार, शरीर पर गांठ या सुस्ती दिखने पर तुरंत जांच कराएं। संक्रमण के लक्षण दिखते ही नजदीकी पशु चिकित्सक को सूचना देना जरूरी है। समय पर जानकारी मिलने से बीमार पशु की जान बचाई जा सकती है। पशुपालकों को अपने गोवंश का टीकाकरण भी जरूर कराना चाहिए। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग रखना चाहिए।
प्रशासन का दावा और सवाल
प्रशासन का कहना है कि हालात पर काबू पाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। आइसोलेशन सेंटर में इलाज की सुविधाओं पर पहले भी सवाल खड़े हो चुके हैं। कुछ मामलों में शव लंबे समय तक पड़े रहने की भी शिकायत आई है। इन शिकायतों के बाद संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या करेगा प्रशासन
24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी लगने से इलाज में तेजी आने की उम्मीद है। कलेक्टर की अगुवाई में मॉनिटरिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। टीकाकरण अभियान को और तेज करने पर भी जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी जांच और इलाज की सुविधा बढ़ाने की योजना है। प्रशासन का लक्ष्य है कि संक्रमण को जल्द से जल्द काबू में लाया जाए। आने वाले दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
लंपी वायरस के बारे में जानें
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो गोवंश में तेजी से फैलती है। यह वायरस मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और किलनी के जरिए फैलता है। संक्रमित पशु के सीधे संपर्क में आने से भी बीमारी फैल सकती है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार और शरीर पर गांठें दिखाई देती हैं। कुछ मामलों में पशु की भूख कम हो जाती है। दूध उत्पादन भी घट जाता है। गंभीर मामलों में यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसी वजह से समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी माना जाता है।
पिछले महीनों का हाल
ग्वालियर में लंपी वायरस के मामले बीते करीब एक महीने से सामने आ रहे हैं। शुरुआत में मामलों की संख्या सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह बढ़ती गई। शहर के साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी संक्रमण फैलने लगा। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम ने कई बार टीकाकरण अभियान तेज किया। इसके बावजूद मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज होती रही। मौजूदा हालात बताते हैं कि संक्रमण पर पूरी तरह काबू पाना अभी बाकी है।
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