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सीजी के महेंद्र ने ये तरीका अपनाया और 50 डिसमिल से एक एकड़ तक पहुंच गई मिर्च की खेती, कमाई एक लाख रुपए

newz@gmail.com | Sep 28, 2026, 15:53 IST

छत्तीसगढ़ में जशपुर के किसान महेंद्र कुमार यादव ने 38 हजार रुपए के अनुदान से मिर्च की खेती 50 डिसमिल से एक एकड़ तक बढ़ाई। सिंचाई और सलाह से इस साल करीब एक लाख रुपए की शुद्ध आय हुई।

मिर्च की खेती

जशपुर जिले के एक छोटे किसान ने मिर्च से नई राह पकड़ी है। यह जिला छत्तीसगढ़ में है। महेंद्र कुमार यादव पहले सिर्फ 50 डिसमिल जमीन में मिर्च उगाते थे। अब वे एक एकड़ में उन्नत तरीके से मिर्च की खेती कर रहे हैं। इस साल उन्हें करीब एक लाख रुपए की शुद्ध आय हुई है। इस बदलाव के पीछे सरकारी योजना का अनुदान बताया गया है। यह अनुदान 38 हजार रुपए का था। साथ में सिंचाई का बेहतर इंतजाम और विभागीय सलाह भी काम आई।

50 डिसमिल से एक एकड़ तक

महेंद्र जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के गांव सन्ना में रहते हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवार से आते हैं। पूंजी की कमी उनकी सबसे बड़ी रुकावट थी।

इसी वजह से वे बड़े क्षेत्र में खेती नहीं कर पाते थे। डिसमिल जमीन की एक छोटी इकाई है। 100 डिसमिल का एक एकड़ होता है। यानी महेंद्र पहले करीब आधे एकड़ में मिर्च उगाते थे। वे पारंपरिक तरीके से खेती करते थे। जमीन कम थी और उत्पादन भी सीमित रहा। इसलिए कमाई भी सीमित ही रही।

38 हजार रुपए का अनुदान

फिर महेंद्र को एक सरकारी योजना का सहारा मिला। उन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अनुदान मिला। योजना का नाम डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 बताया गया है। यह अनुदान उत्पादन प्रणाली मद में मिला। मिर्च की खेती के लिए उन्हें 38 हजार रुपए दिए गए। इस मदद से उनके हौसले बढ़ गए।

अनुदान के साथ विभाग का मार्गदर्शन भी मिला। इसी के बाद महेंद्र ने खेती का दायरा बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने एक एकड़ भूमि लीज पर ली। उस पर उन्नत किस्म की मिर्च की खेती शुरू की।

सिंचाई और सलाह का असर

महेंद्र ने सिर्फ रकबा नहीं बढ़ाया। उन्होंने खेती के तरीके भी बदले। उन्नत कृषि पद्धतियां अपनाई गईं। सिंचाई के प्रबंधन पर उन्होंने खास ध्यान दिया।

विभाग के अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें तकनीकी सलाह दी। महेंद्र ने इसी सलाह के हिसाब से फसल का प्रबंधन किया। खेती का क्षेत्र बढ़ा तो उत्पादन में भी सुधार हुआ। बेहतर सिंचाई, उन्नत तकनीक और समय पर सलाह का नतीजा साफ दिखा। इस साल उन्हें मिर्च से करीब 1 लाख रुपए की शुद्ध आय हुई।

कमाई का हिसाब क्या कहता है

खबर में शुद्ध आय का आंकड़ा करीब 1 लाख रुपए बताया गया है। यह आंकड़ा इस साल का है और एक एकड़ की खेती से जुड़ा है। शुद्ध आय का मतलब खर्च घटाने के बाद बची कमाई होती है।

हालांकि खर्च, उत्पादन और मिर्च के भाव की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इस आय को हर किसान के लिए तय आंकड़ा नहीं मान सकते। मिर्च का भाव और मौसम हर साल बदल सकते हैं। फिर भी एक बात साफ है। जमीन बढ़ने और सिंचाई सुधरने से महेंद्र की आमदनी बेहतर हुई है। यह उनका अपना अनुभव है।

सरकारी मदद से खुले तरक्की के रास्ते

महेंद्र कहते हैं कि पहले पूंजी की कमी थी। इसलिए वे बड़ी खेती नहीं कर पाते थे। योजना के अनुदान से उन्हें खेती बढ़ाने का मौका मिला। एक एकड़ में मिर्च की खेती के बाद उनकी आय सुधरी है। अब वे इसे आगे भी जारी रखने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया। यह आभार उन्होंने अपनी सफलता के लिए जताया।

महेंद्र के मुताबिक सरकारी योजनाओं की मदद से रास्ते खुल रहे हैं। विभाग की सलाह भी छोटे किसानों के काम आ रही है। इससे वे खेती में नए प्रयोग और विस्तार कर पा रहे हैं।

छोटे किसानों के लिए सबक

महेंद्र की कहानी छोटे किसानों को कई सीख देती है। पहली बात यह है कि कम पूंजी में भी शुरुआत हो सकती है। दूसरी बात अनुदान और सिंचाई सुविधा का सही इस्तेमाल है। तीसरी बात है तकनीकी सलाह पर अमल करना। सिर्फ जमीन बढ़ाना काफी नहीं होता। उन्नत किस्म, सिंचाई और फसल प्रबंधन भी उतने ही जरूरी हैं।

खबर का निष्कर्ष भी यही है। समय पर अनुदान, सिंचाई सुविधा और तकनीकी सहयोग मिले तो फर्क पड़ता है। तब कम जमीन वाले किसान भी बेहतर कमाई कर सकते हैं।

गांव के किसानों को प्रेरणा

महेंद्र की सफलता अब गांव के दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रही है। उन्होंने सीमित साधनों से शुरुआत की थी। उन्नत तकनीक और सरकारी योजना का लाभ लिया। इससे मिर्च की खेती उनकी आय का मजबूत आधार बनी।

जो किसान ऐसी योजनाओं का लाभ लेना चाहें, वे कृषि विभाग से जानकारी लें। अपने विकासखंड के दफ्तर में संपर्क किया जा सकता है। योजना की शर्तें और पात्रता वहीं से साफ हो सकेंगी। मौसम और बाजार भाव देखकर ही खेती का दायरा बढ़ाना समझदारी होगी। छोटे किसान अपनी क्षमता के हिसाब से कदम उठाएं।

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