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एमपी : रीवा में खेतों पर पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप, विशेषज्ञों ने बताए धान-दलहन फसलों को बचाने के उपाय

newz@gmail.com | Oct 5, 2026, 14:29 IST

रीवा के गंगेव ब्लॉक में धान, रागी और दलहन पर पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों ने नमी को वजह बताया और छिड़काव, दवा बदलने व जैविक उपाय की सलाह दी।

धान में कीट

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में खेतों पर कीट का खतरा मंडरा रहा है। गंगेव ब्लॉक के कई गांवों में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप दिखा है। यह कीट धान, रागी और दलहनी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने खेतों का दौरा किया। टीम ने किसानों को बचाव के उपाय भी बताए।

रीवा के किसान क्यों परेशान

गंगेव ब्लॉक के किसान इन दिनों अपनी फसलों को लेकर चिंता में हैं। कई गांवों में पत्ती लपेटक कीट यानी लीफ फोल्डर का असर दिखा है। यह कीट धान, रागी और दलहनी फसलों में फैल रहा है।

कीट का हमला किसानों की पैदावार के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। इसी वजह से कृषि वैज्ञानिकों की टीम को खेतों में उतरना पड़ा। टीम ने किसानों को समय रहते कदम उठाने की सलाह दी।

कहां पहुंची वैज्ञानिकों की टीम

वैज्ञानिकों की टीम गंगेव ब्लॉक के चार गांवों में पहुंची। ये गांव राजहा, बेलवा कुर्मियान, बेलवा बरदगवां और देवास हैं। धान के साथ रागी, अरहर, उड़द और मूंग का निरीक्षण किया गया।

दौरे में कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएल वर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों से फसल की नियमित निगरानी करने को कहा। उनके मुताबिक प्रकोप के शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण शुरू कर देना चाहिए।

ऐसे पहचानें लीफ फोल्डर

इस कीट की इल्ली पौधे की पत्तियों को आपस में लपेट लेती है। फिर वह पत्ती के भीतर छिपकर बैठ जाती है। वहीं रहकर वह पत्ती की हरी सतह को खुरचकर खाती है। इससे पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है। यानी पौधा धूप से भोजन ठीक से नहीं बना पाता। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने पहचान का आसान तरीका भी बताया। अगर पत्तियां मुड़ी हुई या सफेद धारीदार दिखें, तो प्रकोप शुरू हो चुका है। ऐसे में देर किए बिना सिफारिश की गई दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।

नमी और बादल ने बढ़ाई मुश्किल

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इलाके में पिछले कुछ दिनों से नमी ज्यादा रही है। आसमान में बादल भी छाए रहे हैं। इसी वजह से कीट का प्रकोप तेजी से फैला है।

ऐसे मौसम में इल्लियों की संख्या जल्दी बढ़ती है। इसलिए किसानों को खेत देखने में ढील नहीं बरतनी चाहिए। शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण जरूरी बताया गया है।

किस दवा का कितना छिड़काव

वैज्ञानिकों ने कई दवाओं में से किसी एक के इस्तेमाल की सलाह दी है। पहली दवा इंडोक्साकार्ब है। इसके 14.5 एससी (Suspension Concentrate) या 15.8 ईसी (Emulsifiable Concentrate) रूप आते हैं। 15 लीटर पानी में 15 से 20 मिलीलीटर घोल बनाकर छिड़कें।

दूसरी दवा इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत है। 15 लीटर पानी में इसका 10 से 12 ग्राम घोल बनाने की सलाह है। किसान इनमें से किसी एक विकल्प को चुन सकते हैं।

गंभीर प्रकोप में क्या करें

अगर प्रकोप ज्यादा गंभीर हो, तो वैज्ञानिकों ने एक मिश्रण बताया है। यह फ्लूबेंडियामाइड 8.33 प्रतिशत और डेल्टामेथ्रिन 5.56 प्रतिशत का मिश्रण है। 15 लीटर पानी में 12 मिलीलीटर घोल बनाकर छिड़काव की सलाह दी गई है।

किसान ध्यान रखें कि ये सलाह वैज्ञानिकों की टीम ने दी है। किसी भी दवा का इस्तेमाल पैकेट की जानकारी पढ़कर ही करें। शंका होने पर विशेषज्ञ से पूछ लेना बेहतर रहेगा।

एक ही दवा बार-बार नहीं

वैज्ञानिकों ने एक जरूरी बात और बताई। एक ही दवा बार-बार डालने से कीट उसके प्रति प्रतिरोधी बन सकता है। यानी बाद में वही दवा असर कम करने लगती है।

इसलिए समय-समय पर दवा बदलते रहना चाहिए। किसान अपने खेत में छिड़काव का रिकॉर्ड रखें। इससे याद रहेगा कि कब कौन सी दवा डाली गई थी।

जैविक उपाय भी अपनाएं

रसायन के साथ जैविक उपायों पर भी जोर दिया गया है। वैज्ञानिकों ने कुछ जैविक उपाय सुझाए हैं। उनका कहना है कि खेत की मेड़ों और आसपास की घास-फूस की सफाई रखें। इससे कीट के छिपने और पलने की जगह कम हो जाती है।

खेत में पक्षियों के बैठने के लिए टी-आकार की खूंटियां लगाई जा सकती हैं। इन्हें बर्ड पर्चर कहा जाता है। इल्लियों को खाने वाले पक्षी इन खूंटियों की ओर आकर्षित होते हैं। इस तरह प्राकृतिक तरीके से भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।

छिड़काव में सावधानी जरूरी

टीम ने किसानों को छिड़काव का सही समय भी बताया। छिड़काव सुबह या शाम के समय करना चाहिए। उस समय तेज धूप नहीं होती। इससे दवा का असर बेहतर रहता है।

दवा की मात्रा का सही हिसाब लगाना भी जरूरी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जरूरत से कम छिड़काव असर नहीं दिखाता। जरूरत से ज्यादा छिड़काव फसल और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

किसानों से कहा गया कि दवा के पैकेट पर लिखी जानकारी ध्यान से पढ़ें। जरूरत पड़े तो नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विस्तार अधिकारी से सलाह लें।

टीम में कौन-कौन रहा

दौरे में कृषि विस्तार अधिकारी शिवशरण सरल भी शामिल रहे। तकनीकी प्रबंधक दीपक कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद थे। वे आत्मा परियोजना (Agricultural Technology Management Agency) से जुड़े हैं। कृषि विस्तार अधिकारी बबीता साकेत और युगल किशोर प्रधान भी टीम का हिस्सा रहे।

कीट नियंत्रण के साथ टीम ने खेती के दूसरे पहलुओं पर भी बात की। किसानों को संतुलित खाद प्रबंधन की जानकारी दी गई। मिट्टी की सेहत बनाए रखने और फसल विविधीकरण पर भी सलाह दी गई।

किसान अभी क्या करें

रीवा और आसपास के किसान सबसे पहले अपने खेतों का चक्कर लगाएं। पत्तियां मुड़ी या सफेद धारीदार दिखें तो इसे हल्के में न लें। खेत की मेड़ों की सफाई भी तुरंत शुरू की जा सकती है।

मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल मध्य प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। ऐसे में सुबह या शाम का समय चुनकर छिड़काव की योजना बन सकती है। फिर भी दवा चुनने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना बेहतर रहेगा।

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