पश्चिमी मध्य प्रदेश के दो आदिवासी जिलों में खेती संकट में है। आलीराजपुर और झाबुआ में इस बार बारिश बहुत कम हुई। इसका असर खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर दिखा है। अब रबी की बुवाई को लेकर भी पानी की चिंता है। स्थानीय जानकारों को डर है कि दिवाली के बाद पलायन बढ़ सकता है। रोजगार की तलाश में लोग गुजरात और दूसरे राज्यों का रुख कर सकते हैं।
आलीराजपुर में 51% कम बारिश
इस साल सबसे ज्यादा असर आलीराजपुर जिले में दिखा है। यहां सामान्य से 51 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई। यह आंकड़ा एक जून से 30 सितंबर के मानसून का है। मध्य प्रदेश में यह सबसे ज्यादा कमी वाला जिला रहा। झाबुआ में भी सामान्य से 35 फीसदी कम बारिश हुई।
दोनों जिलों की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। यहां खेती का बड़ा हिस्सा बारिश के पानी पर टिका रहता है। इसलिए कम बारिश का सीधा असर फसल और कमाई पर पड़ा है।
खरीफ फसलों पर कितना असर
आलीराजपुर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. आरके यादव ने असर बताया। वे केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक भी हैं। उनके मुताबिक कई फसलों की पैदावार में बड़ी गिरावट आई है। सोयाबीन, मक्का, उड़द, कपास और मूंगफली पर असर पड़ा है।
आलीराजपुर के किसान कमरू अजनार ने अपनी परेशानी बताई। उन्होंने बुवाई के लिए महंगे खाद, बीज और कीटनाशक खरीदे थे। बारिश की भारी कमी से फसल बर्बाद होने की स्थिति में है। उनका कहना है कि इस बार 10 फीसदी पैदावार की भी उम्मीद नहीं है।
कमरू अजनार ने सरकार से राहत की मांग की है। उन्होंने कर्ज लेने वाले किसानों के लिए भी मांग रखी। बैंक और सहकारी समितियों से लिए कर्ज की वसूली अगले साल तक न हो।
रबी के लिए पानी की चिंता
बारिश की कमी सिर्फ खरीफ तक सीमित नहीं है। अब किसानों को गेहूं और चने के लिए भी पानी की फिक्र है। स्थानीय जानकारों के मुताबिक जिले के बांध पूरी तरह नहीं भरे हैं। उनमें करीब आधा ही पानी है।
किसानों को डर है कि पानी कम पड़ा तो बुवाई घट सकती है। डॉ. आरके यादव भी यही संभावना जताते हैं। उनके मुताबिक इस बार रबी का रकबा घट सकता है। किसान नर्मदा का पानी पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं।
दिवाली के बाद पलायन का डर
रोजगार के लिए पलायन इन जिलों में पहले से बड़ी समस्या है। पलायन विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह राठौर के मुताबिक हालात और बिगड़े हैं। बारिश की कमी से आदिवासी परिवार बाहर जा रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली के बाद पलायन और बढ़ सकता है।
गुजरात इन जिलों के लोगों के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र रहा है। दूसरे राज्यों में भी लोग मजदूरी और दूसरे काम के लिए जाते हैं। खेती से कमाई कम हो तो बाहर जाना ही विकल्प बचता है।
किसान संगठन की मांग
संयुक्त किसान मोर्चा के इंदौर संभाग संयोजक रामस्वरूप मंत्री ने भी आशंका जताई। उनका कहना है कि दोनों जिलों में ज्यादातर खेती बारिश पर निर्भर है। उनका अनुमान है कि 60 से 70 फीसदी आदिवासी आबादी पलायन कर सकती है। यह उनका अपना अनुमान है।
रामस्वरूप मंत्री ने दोनों जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की भी मांग रखी है। उनके मुताबिक देर हुई तो खेती और रोजी रोटी दोनों पर असर पड़ेगा।
प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग के बीच प्रशासन ने विभागों से रिपोर्ट मांगी है। जिला मजिस्ट्रेट नीतू माथुर ने यह जानकारी दी। उनके मुताबिक बारिश की कमी की जानकारी अलग अलग विभागों से मांगी गई है। रिपोर्ट देखने के बाद आगे सही कार्रवाई की जाएगी।
जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि जिले में कई काम पहले से चल रहे हैं। ये काम विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत हैं। इसे वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) कहा जाता है। इच्छुक लोग इनमें मजदूर के तौर पर काम कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की संभावना बनी है।
खेती और रोजगार का दोहरा संकट
आलीराजपुर और झाबुआ के किसानों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ खरीफ की पैदावार घटने से आमदनी पर असर पड़ा है। दूसरी तरफ रबी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रोजगार और आमदनी का संकट बढ़ सकता है।
अगर काम और सिंचाई का इंतजाम न हुआ तो पलायन बढ़ सकता है। दिवाली के बाद मजदूरों का गुजरात की ओर जाना बढ़ सकता है। फिलहाल किसानों की नजर प्रशासन की रिपोर्ट पर है। उन्हें सरकार से राहत का भी इंतजार है।
मांगें अब प्रशासन के सामने हैं। किसान चाहते हैं कि दोनों जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। वे मुआवजा और कर्ज वसूली में राहत भी चाहते हैं। रबी के लिए नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचाने की मांग भी उठी है। अब सबकी नजर रिपोर्ट के बाद होने वाली कार्रवाई पर है।
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