किसान की बात,सूत्र के साथ

MSP गारंटी कानून को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा का इंदौर में सम्मेलन, अब नौ अक्टूबर को गांव-गांव पुतला दहन होगा

newz@gmail.com | Oct 2, 2026, 20:15 IST

संयुक्त किसान मोर्चा ने MSP (Minimum Support Price) गारंटी कानून की मांग तेज की है। शुक्रवार यानी दो अक्टूबर को इंदौर में आयेजित सम्मेलन में 30 जिलों के 350 से अधिक प्रतिनिधि पहुंचे। अब नौ अक्टूबर को गांवों में पुतला दहन किया जाएगा।

किसान मोर्चा सम्मेलन

संयुक्त किसान मोर्चा का मध्य प्रदेश राज्य सम्मेलन इंदौर में संपन्न हुआ। सम्मेलन शुक्रवार को किसान संगठनों की भागीदारी के साथ आयोजित किया गया। मोर्चा के अनुसार प्रदेश के करीब 30 जिलों से प्रतिनिधि पहुंचे। सम्मेलन में 350 से अधिक किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। इस दौरान किसानों की उपज और कीमतों पर चर्चा हुई। न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी प्रमुख मुद्दा रही। सम्मेलन में आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कई प्रस्तावों को चर्चा के बाद पारित किया।

इंदौर में प्रदेशभर से जुटे प्रतिनिधि

सम्मेलन में मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से किसान पहुंचे। इसमें मालवा, निमाड़ और महाकौशल के प्रतिनिधि शामिल रहे। रीवा, सिवनी और नर्मदापुरम के किसान संगठनों ने भी भागीदारी की। आदिवासी और खेत मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन पहुंचे।

आयोजकों ने सम्मेलन को प्रदेशव्यापी किसान एकजुटता का मंच बताया। प्रतिनिधियों ने स्थानीय समस्याओं की जानकारी नेतृत्व के सामने रखी। सम्मेलन में खेती की बढ़ती लागत पर भी चिंता जताई गई। किसान संगठनों ने उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की मांग रखी।

नौ अक्टूबर का कार्यक्रम

सम्मेलन में नौ अक्टूबर के आंदोलन का निर्णय लिया गया। उस दिन गांव स्तर पर पुतला दहन कार्यक्रम होंगे। यह कार्यक्रम MSP गारंटी कानून की मांग को लेकर होगा। मोर्चा इसे आंदोलन की अगली कड़ी बता रहा है। संगठनों ने आंदोलन को गांव स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया। स्थानीय इकाइयां अपने क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

कार्यक्रमों की संख्या और स्थान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए। विस्तृत कार्यक्रम स्थानीय किसान संगठनों द्वारा तय किया जा सकता है। मोर्चा ने प्रदेश स्तर पर आंदोलन व्यापक करने की बात कही। इसके लिए अलग-अलग संगठनों के बीच तालमेल बढ़ाया जाएगा।

MSP क्यों बना मुद्दा

MSP सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम खरीद मूल्य होता है। यह विभिन्न फसलों के लिए हर सीजन घोषित किया जाता है। सभी किसानों की पूरी उपज MSP पर नहीं खरीदी जाती। खरीद का दायरा फसल और राज्य अनुसार बदलता है। किसान संगठन MSP की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं। उनका कहना है कि इससे घोषित मूल्य से कम बिक्री रुकेगी।

मोर्चा ने इसे किसानों की आय से जुड़ा मुद्दा बताया। संगठनों ने लाभकारी कीमत को कानूनी अधिकार बनाने की मांग रखी। केंद्र सरकार कुछ दालों की पूरी खरीद का भरोसा दे चुकी है। यह सुविधा पूर्व पंजीकृत किसानों और चुनिंदा फसलों तक सीमित है। किसान संगठन व्यापक कानून की मांग कर रहे हैं। वे सभी प्रमुख फसलों को व्यवस्था में शामिल करना चाहते हैं।

कई संगठनों की भागीदारी

सम्मेलन में किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधि शामिल हुए। मध्य प्रदेश किसान सभा ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन भी सम्मेलन में शामिल हुआ। जागृत आदिवासी दलित संगठन ने भी भागीदारी की। अखिल भारतीय किसान सभा अजय भवन के प्रतिनिधि भी पहुंचे।

भारतीय किसान यूनियन और किसान महासभा कार्यक्रम में शामिल हुईं। आदिवासी एकता महासभा ने भी अपने प्रतिनिधि भेजे। नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने भी सम्मेलन में भाग लिया। नर्मदा बचाओ समिति नर्मदापुरम भी कार्यक्रम में शामिल रही।

जय किसान आंदोलन और किसान गर्जना के प्रतिनिधि पहुंचे। अग्रगामी किसान सभा ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। संयुक्त किसान मोर्चा रीवा और सिवनी की इकाइयां मौजूद रहीं। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

राष्ट्रीय नेताओं का संबोधन

संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव राजन क्षीरसागर ने सम्मेलन को संबोधित किया। पुरुषोत्तम शर्मा ने भी किसानों के मुद्दों पर अपनी बात रखा। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बादल सरोज पहुंचे। किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता शिव सिंह ने भी संबोधित किया। रामबाबू जाट और मनीष श्रीवास्तव ने विचार रखे। अखिलेश यादव और माधुरी बहन ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।

जनक राठौर, अनिल यादव और राजेंद्र चौधरी भी वक्ताओं में शामिल रहे। देवेंद्र चौहान और रामनारायण पुरारिया ने भी अपनी बात रखी। रामस्वरूप मंत्री, रुद्रपाल यादव और प्रहलाद बैरागी ने भी संबोधित किया। कई जिलों के प्रतिनिधियों ने स्थानीय किसान समस्याएं सामने रखीं।

प्रस्तावों पर बनी सहमति

सम्मेलन में किसान आंदोलन से जुड़े प्रस्ताव पेश किए गए। प्रतिनिधियों ने इन प्रस्तावों पर चर्चा की। अरुण चौहान और रामस्वरूप मंत्री ने प्रस्ताव रखे। बबलू जाधव और चंदन सिंह बड़वाया ने भी प्रस्ताव पेश किए। शैलेंद्र पटेल, सुभाष राठौड़ और इंद्रजीत शंकु ने प्रस्ताव रखे। चर्चा के बाद प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पारित किए।

इन प्रस्तावों का पूरा लिखित विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। मुख्य रूप से MSP गारंटी कानून की मांग सामने आई। मोर्चा ने किसान हितों पर आंदोलन बढ़ाने का निर्णय लिया। उपज का लाभकारी मूल्य इसकी केंद्रीय मांग रहेगा।

प्रदेशव्यापी आंदोलन का संकल्प

सम्मेलन का स्वागत भाषण बबलू जाधव ने दिया। वह भारतीय किसान मजदूर सेना के अध्यक्ष हैं। कार्यक्रम का संचालन रामस्वरूप मंत्री ने किया। रुद्रपाल यादव ने सम्मेलन के अंत में आभार जताया। प्रतिनिधियों ने किसान अधिकारों के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया। नौ अक्टूबर का प्रदर्शन इसी रणनीति का हिस्सा होगा।

मोर्चा अब गांव स्तर पर संगठन मजबूत करने की तैयारी करेगा। स्थानीय मुद्दों को प्रदेश स्तरीय आंदोलन से जोड़ा जाएगा। आंदोलन का अगला स्वरूप कार्यक्रमों की भागीदारी से स्पष्ट होगा। प्रशासन की प्रतिक्रिया भी आगे की रणनीति प्रभावित कर सकती है।

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