केंद्र सरकार नया सीड बिल लाने की तैयारी में है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान संगठनों से चर्चा की। दिल्ली के कृषि भवन में यह बैठक हुई। करीब 20 किसान संगठनों के नेता बैठक में शामिल हुए। नकली बीजों पर रोक लगाना इस कानून का मुख्य मकसद है।
पुराना कानून, नई जरूरत
देश का मौजूदा बीज अधिनियम साल 1966 का है। बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कानून पुराना पड़ चुका है। समय के साथ खेती में कई नई चुनौतियां सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि खराब बीज को लेकर जवाबदेही तय करने की व्यवस्था नहीं है। इसी वजह से बाजार में नकली और घटिया बीज पहुंच जाते हैं। किसानों को इससे भारी नुकसान झेलना पड़ता है।
मंत्री ने कहा कि नया पेस्टिसाइड (Pesticide) कानून भी जरूरी है। पुराने कानूनों में घटिया कीटनाशकों की पहचान करना मुश्किल होता है। इसलिए दोनों कानूनों में बदलाव जरूरी बताया गया।
देशभर के किसान संगठन बैठक में शामिल हुए
बैठक में देश के लगभग सभी राज्यों के किसान प्रतिनिधि पहुंचे। भारतीय किसान संघ, बीकेयू (Bharatiya Kisan Union) और किसान महापंचायत जैसे संगठन शामिल रहे। कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ और महाराष्ट्र का शेतकारी संगठन भी मौजूद रहा।
राजस्थान और बिहार की राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ने भी अपनी बात रखी। गुजरात का खेदुत समाज और झारखंड का कृषि मंच भी बैठक में मौजूद था। केरल का कृषक संगठन भी शामिल रहा। केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा भी इस बैठक में शामिल हुए।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों के जमीनी अनुभव ध्यान से सुने गए। उन्होंने कहा कि हर सुझाव पर गंभीरता से विचार होगा। किसान चाहे संगठन से हों या अकेले व्यक्ति, हर सुझाव का स्वागत है।

18 हजार सुझाव पहले ही आ चुके हैं
नवंबर दिसंबर 2025 में सीड बिल के मसौदे पर सुझाव मांगे गए थे। उस दौरान किसानों और संगठनों से करीब 18 हजार सुझाव मिले थे। मंत्री ने कहा कि इन सुझावों का गहराई से अध्ययन किया गया।
उन्होंने कहा कि किसान संगठन जमीनी स्तर पर काम करते हैं। इसलिए उनसे सीधी चर्चा जरूरी समझी गई। इसी मकसद से यह नई बैठक बुलाई गई थी। मंत्री ने साफ किया कि इस मामले में जल्दबाजी नहीं होगी। सुझाव लेने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अभी कोई तय समय सीमा नहीं रखी गई है।
किसानों के अधिकार और परंपरागत बीज सुरक्षित
शिवराज सिंह ने भरोसा दिलाया कि किसानों के अधिकार कम नहीं होंगे। परंपरागत और देसी बीजों के इस्तेमाल की पूरी छूट रहेगी। किसान आपस में बीज बांट भी सकेंगे और बेच भी सकेंगे। परंपरागत बीजों का पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं होगा। अगर कोई किसान अपनी बीज किस्म पंजीकृत कराना चाहे, तो यह सुविधा भी रहेगी। यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।
किसान खुद या कंपनी के लिए बीज बनाए, तो पंजीकरण जरूरी नहीं है। गांव में बांटने के लिए बीज बनाने पर भी यही नियम लागू होगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों को राहत मिलेगी।
नकली बीज पर सख्त सजा का प्रस्ताव
नए सीड बिल में अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। छोटी गलती पर पहली बार सिर्फ चेतावनी दी जाएगी। दूसरी बार गलती दोहराने पर भारी जुर्माना लगेगा।
बैठक में यह बात सामने आई कि 70 प्रतिशत बीज दायरे से बाहर हैं। हर राज्य में बीज को लेकर अलग अलग नियम चलते हैं। इससे नकली बीज बेचने वालों को फायदा मिल जाता है। मंत्री ने कहा कि नया कानून ज्यादा कड़ा और प्रभावी होगा। इसका मकसद किसानों को नकली बीजों से पूरी तरह मुक्त कराना है। उन्होंने इस बैठक को कृषि क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया।
आगे क्या होगी प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार हर नीति किसानों से बातचीत करके बनाती है। किसान संगठनों के सुझावों को अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा। अन्य पक्षों से भी चर्चा जारी रहेगी, लेकिन किसान हमेशा प्राथमिकता में रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यह कानून पीएम मोदी के आत्मनिर्भर किसान विजन का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। सही और भरोसेमंद बीज मिलने से खेती की पैदावार भी बढ़ेगी। आने वाले दिनों में और किसान संगठनों से भी बातचीत होगी। सरकार का कहना है कि जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। हर सुझाव पर गहराई से विचार के बाद ही अंतिम कानून बनेगा।
राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसानों के लिए क्यों जरूरी
राजस्थान की राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ने भी बैठक में अपने सुझाव रखे। इससे राजस्थान के किसानों की आवाज सीधे केंद्र सरकार तक पहुंची है। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह इस कानून की अगुआई कर रहे हैं।
इससे मध्य प्रदेश के किसानों को भी खास उम्मीद है। प्रदेश में हर साल नकली बीज बिकने की शिकायतें आती हैं। कई किसानों को घटिया बीज से फसल खराब होने का नुकसान झेलना पड़ता है। नया कानून लागू होने के बाद ऐसे मामलों में सख्ती बढ़ने की उम्मीद है। जवाबदेही तय होने से बीज कंपनियां भी सतर्क रहेंगी। इससे आखिरकार सीधा फायदा किसानों को ही मिलेगा।
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