खरगोन जिले की झिरन्या तहसील में 18 सितंबर 2026 को किसानों ने आवाज उठाई। भारतीय किसान संघ की अगुवाई में रैली निकली। किसानों ने बिजलवाड़ा सिंचाई परियोजना के अधूरे काम पूरे करने की मांग रखी। रैली झिरन्या नगर में निकाली गई। इसके बाद किसान तहसीलदार के पास पहुंचे। उन्होंने ज्ञापन (मांगपत्र) सौंपा। आयोजकों के मुताबिक इसमें करीब 400 किसान और ग्रामीण शामिल हुए।
बिजलवाड़ा परियोजना में देरी
किसानों का कहना है कि झिरन्या तहसील के कई गांवों में काम लंबित है। यही उनकी सबसे बड़ी शिकायत है। सिंचाई का पानी खेतों तक समय पर पहुंचे, यह उनकी पहली उम्मीद है।
किसानों के अनुसार देरी का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। उन्हें सिंचाई की सुविधा मिलने में देर हो रही है। इस वजह से खेती के कामों में परेशानी आ रही है।
30 से 40 प्रतिशत ही काम
किसानों ने एक और बात बताई। कई गांवों में निर्माण का सिर्फ 30 से 40 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। यानी आधे से भी कम काम हो पाया है।
इस पर उनकी मांग साफ है। सभी लंबित कामों की समीक्षा हो। निर्माण में तेजी लाई जाए। हर गांव के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बने, ताकि सबको सिंचाई की सुविधा मिल सके।
ज्ञापन में क्या हैं मांगें
तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में सिर्फ सिंचाई की बात नहीं है। किसानों ने खेती, बिजली, मंडी और गांव की कई दूसरी समस्याएं भी रखी हैं। ज्ञापन में कुल आठ मांगें गिनाई गई हैं।
पहली मांग है कि तहसील के सभी गांवों में लंबित काम जल्दी पूरे हों। दूसरी मांग उन गांवों की है, जहां सिर्फ 30 से 40 प्रतिशत काम हुआ। वहां काम तेज हो और पूरा करने की समयसीमा तय की जाए।
मुआवजा और बिजली की मांग
तीसरी मांग परियोजना से प्रभावित किसानों को लेकर है। किसानों ने कहा है कि उनकी समस्याएं हल की जाएं। पात्र किसानों को लंबित मुआवजा नियम के अनुसार जल्दी मिले।
चौथी मांग बिजली से जुड़ी है। किसान चाहते हैं कि खेती के लिए पर्याप्त और नियमित बिजली मिले। खराब ट्रांसफार्मर समय पर बदले जाएं। खेती में सिंचाई के लिए बिजली भी जरूरी होती है।
मंडी और भुगतान पर सवाल
पांचवीं और छठी मांग मंडी से जुड़ी हैं। किसानों की मांग है कि मंडी में तौल और भुगतान की व्यवस्था पारदर्शी हो। साथ ही अवैध वसूली पर रोक लगे। यह मांग किसानों की तरफ से रखी गई है। किसान अपनी उपज का उचित दाम चाहते हैं। मंडी की समस्याओं पर जरूरी कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
गांवों की बुनियादी सुविधाएं
सातवीं मांग गांव की बुनियादी सुविधाओं पर है। इसमें सड़क, पीने का पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं शामिल हैं। किसानों का कहना है कि इनसे जुड़ी पुरानी समस्याएं भी सुलझाई जाएं।
आठवीं मांग में प्रशासन से अपील की गई है। किसानों ने कहा कि ज्ञापन की बातों पर संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएं। इसके बाद जल्दी कार्रवाई हो।
किन गांवों के किसान आए
रैली और आंदोलन में कई गांवों के लोग पहुंचे। इनमें सोनखेड़ी, चैनपुर, नानकोड़ी, ईरपुर, साईखेड़ा और बाईखेड़ा के किसान शामिल थे। झिरन्या, मरुगढ़, रुफाटा, रेडफल, शिवना और टेड के लोग भी आए।
आसपास के कई और गांवों के किसान भी इसमें शामिल हुए। आयोजकों के मुताबिक कुल संख्या करीब 400 रही। इससे पता चलता है कि कई गांव इस मुद्दे से जुड़े हैं।
कौन से पदाधिकारी रहे मौजूद
आंदोलन में भारतीय किसान संघ के कई पदाधिकारी मौजूद थे। संघ के प्रांत युवा वाहिनी प्रमुख श्याम सिंह पवार भी इनमें शामिल रहे।
जिला स्तर पर गजानंद बांके जिला उपाध्यक्ष के रूप में मौजूद थे। वासुदेव चौधरी जिला मंत्री हैं। नितेश सिंह मौर्य जिला मीडिया प्रभारी हैं। राजेंद्र सिंह सोलंकी जिला सहमंत्री के तौर पर पहुंचे।
तहसील स्तर के नेता भी साथ थे। भीकनगांव तहसील के अध्यक्ष राधेश्याम सिंह पटेल आए। झिरन्या तहसील के अध्यक्ष दादू सिंह चौहान भी मौजूद रहे। कई तहसील सदस्य भी किसानों के बीच पहुंचे।
किसानों ने क्या कहा
किसानों ने कहा कि बिजलवाड़ा सिंचाई परियोजना इलाके के लिए बहुत अहम है। उनके मुताबिक काम समय पर पूरा होगा, तो खेतों तक सिंचाई पहुंचेगी। इससे खेती की पैदावार में भी मदद मिलेगी।
इसी आधार पर किसानों ने शासन और प्रशासन से अपील की। उनका कहना है कि समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। लंबित कामों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए।
किसानों ने तहसीलदार से भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ज्ञापन पर उचित कार्रवाई हो। किसानों की समस्याएं संबंधित विभागों तक पहुंचाई जाएं। उनका जल्दी निराकरण कराया जाए।
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