बड़वानी जिले के सेंधवा में एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर बनाने की योजना थी। इसके लिए साल 2019 में नाबार्ड से सावधि कर्ज लिया गया था। यह कर्ज 13.99 करोड़ रुपए का था।
आरोप है कि यह रकम परियोजना के तय मकसद में खर्च नहीं हुई। इसके बजाय कर्ज की राशि कथित तौर पर अन्य कामों में लगाई गई। इसी शिकायत पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू की है।
ईडी ने यह कार्रवाई पीएमएलए (Prevention of Money Laundering Act) के तहत शुरू की। मामले में सीबीआई की कोलकाता आर्थिक अपराध शाखा ने पहले एफआईआर दर्ज की थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने अपनी जांच आगे बढ़ाई।
चार ठिकानों पर हुई तलाशी
ईडी टीम ने 9 सितंबर को निमाड़ी एग्रो पार्क से जुड़े परिसरों पर छापा मारा। कुल चार जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इनमें मेसर्स बी.एस. कॉटन प्राइवेट लिमिटेड का परिसर भी शामिल था।
मेसर्स श्रीराजराजेश्वर डेवलपर्स और वेंचर्स से जुड़े ठिकाने भी जांच के दायरे में आए। ईडी की टीम ने घंटों तक इन परिसरों की जांच की। टीम ने कई दस्तावेज खंगाले और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए।
तलाशी के दौरान चार बैंक लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं। ईडी का कहना है कि इससे जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। बरामद दस्तावेजों की अब विस्तार से जांच की जा रही है।
31 करोड़ की थी पूरी परियोजना
जांच में सामने आया कि यह परियोजना कुल 31.04 करोड़ रुपए की थी। यह योजना साल 2019 में खाद्य प्रसंस्करण निधि योजना के तहत बनाई गई थी। सेंधवा के ग्राम जामली में यह एग्रो क्लस्टर स्थापित होना था।
परियोजना की लागत में खाद्य मंत्रालय से 10 करोड़ रुपए का अनुदान शामिल था। यह अनुदान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (Ministry of Food Processing Industries) से मिला था। इसके अलावा प्रवर्तकों का 7.05 करोड़ रुपए का अंशदान भी तय हुआ था। बाकी राशि नाबार्ड के सावधि कर्ज से पूरी होनी थी।
ईडी की जांच में सामने आया कि कर्ज तय मकसद में खर्च नहीं हुआ। इसकी वजह से परियोजना अधूरी रह गई। समय पर काम पूरा नहीं होने से योजना अटक गई।
29 सितंबर 2024 को खाता हुआ एनपीए
जांच के मुताबिक अधूरी परियोजना की वजह से हालात बिगड़ते गए। आखिरकार 29 सितंबर 2024 को यह खाता एनपीए (Non Performing Asset) घोषित हुआ। इसके बाद मामले की जांच और तेज हुई।
ईडी अधिकारियों का कहना है कि फंड डायवर्जन के सबूत जुटाए जा रहे हैं। जांच एजेंसी बैंक खातों और लेनदेन के पूरे रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में और भी परिसरों पर कार्रवाई हो सकती है। अभी जांच शुरुआती चरण में है। इस मामले में अभी तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है। कानून के मुताबिक दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।
किसानों और एग्रो क्लस्टर योजना पर असर
एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर योजना का मकसद किसानों की उपज को बेहतर बाजार देना था। ऐसी परियोजनाएं किसानों की फसल का सीधा प्रसंस्करण और भंडारण करती हैं। इससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन सेंधवा में यह परियोजना अधूरी रह गई। इससे इलाके के किसानों को योजना का पूरा फायदा नहीं मिल पाया।
सरकारी अनुदान और बैंक कर्ज के दुरुपयोग से ऐसी योजनाएं अटक जाती हैं। कृषि जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों से किसानों का भरोसा घटता है। समय पर परियोजनाएं पूरी हों तो किसानों को सीधा लाभ मिलता है। इसलिए जांच एजेंसियों की सख्ती जरूरी मानी जा रही है।
आगे क्या हो सकती है कार्रवाई
ईडी अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ भी हो सकती है। जांच एजेंसी संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है। अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो संपत्ति कुर्क की जा सकती है। मामले में आगे और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
बड़वानी जिला प्रशासन और बैंक अधिकारी भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर भी इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। किसान संगठन भी परियोजना की स्थिति पर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। सेंधवा क्षेत्र के किसानों को भी अब सही जानकारी का इंतजार है। कई किसान इस पार्क से जुड़ी नौकरी और बाजार सुविधा चाहते थे। परियोजना अटकने से उनकी उम्मीदों को भी झटका लगा है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है। फिलहाल जांच जारी है और आगे की जानकारी समय पर सामने आएगी।
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