केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान हैदराबाद पहुंचे। उन्होंने दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में दक्षिणी राज्यों के कृषि मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें किसान आय, फसल विविधीकरण और खाद्य सुरक्षा शामिल रहे। बागवानी, कृषि सुधार और निर्यात पर भी चर्चा हुई। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।
किसानों की आय बढ़ाना लक्ष्य
शिवराज ने कृषि के तीन प्रमुख लक्ष्य बताए। पहला लक्ष्य देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दूसरा लक्ष्य किसानों की आजीविका को मजबूत करना है। इसके साथ किसानों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। तीसरा लक्ष्य पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया। उन्होंने कहा कि भोजन पोषणयुक्त होना भी जरूरी है।
उन्होंने खेती को रोजगार का बड़ा आधार बताया। उनके अनुसार खेती अर्थव्यवस्था को भी गति दे सकती है। उन्होंने कृषि में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की बात कही। साथ ही किसान की भूमिका को अहम बताया।
दक्षिण में बागवानी की बड़ी संभावना
शिवराज ने दक्षिण भारत की बागवानी क्षमता का जिक्र किया। उन्होंने मसाले, कॉफी और काजू जैसी फसलों का उल्लेख किया। कोको और चंदन जैसी फसलों को भी महत्वपूर्ण बताया गया। इन फसलों से पोषण सुरक्षा को भी जोड़कर देखा गया। सम्मेलन में उच्च मूल्य वाली बागवानी पर भी चर्चा हुई। मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार व्यवस्था पर जोर दिया गया।
फसल विविधीकरण पर जोर
सम्मेलन में फसल विविधीकरण को भी अहम मुद्दा माना गया। अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग कृषि रणनीति की बात हुई। देश के हर राज्य की कृषि परिस्थितियां अलग हैं। मिट्टी, पानी और मौसम में भी अंतर रहता है।
इसी वजह से क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को जरूरी बताया गया। इससे राज्यों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिलता है। केंद्र भी राज्यों के सुझावों पर चर्चा कर सकता है। इसके बाद क्षेत्र के हिसाब से कृषि रोडमैप बनाया जा सकता है।
नियमों में बदलाव की बात
कृषि मंत्री ने कृषि नियमों में सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने पुराने नियमों की समीक्षा करने की बात कही। उनके अनुसार जरूरत पड़ने पर नियमों में बदलाव होना चाहिए। केंद्र और राज्यों से ऐसे सुझाव देने को कहा गया।
सरकार की योजनाओं का असर जमीन पर दिखना जरूरी है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर दिया। यह चर्चा कृषि सुधारों के व्यापक मुद्दे से जुड़ी रही। सम्मेलन में राज्यों की सफल योजनाएं साझा करने की बात भी हुई।
राज्यों की सफल योजनाएं साझा होंगी
सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों की अच्छी पहल सामने रखी गई। दूसरे राज्य इन अनुभवों से सीख सकते हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार कई राज्यों ने मॉडल पेश किए। इनमें डिजिटल कृषि और किसान रजिस्ट्री भी शामिल हैं।
तेलंगाना ने रायथु नेस्थम का उदाहरण रखा। कर्नाटक ने दलहन उत्पादन की पहल बताई। केरल ने खरीद और बाजार व्यवस्था की जानकारी दी। तमिलनाडु ने प्रिसिजन फार्मिंग का मॉडल साझा किया।
नारियल निर्यात में बढ़ोतरी
शिवराज ने नारियल निर्यात के आंकड़े भी बताए। उनके अनुसार निर्यात में एक साल में 62 प्रतिशत वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि निर्यात 4,349 करोड़ रुपए से बढ़ा। यह आंकड़ा बढ़कर 7,038 करोड़ रुपए पहुंच गया।
उन्होंने पुराने नारियल बागों के जीर्णोद्धार की जरूरत बताई। 60 से 70 साल पुराने पेड़ों का भी जिक्र हुआ। ऐसे बागों में उत्पादन और गुणवत्ता घटने की बात कही गई। नए पौधे चरणबद्ध तरीके से लगाने का सुझाव दिया गया।
निर्यात से किसानों को बाजार
कृषि निर्यात को लेकर भी सम्मेलन में चर्चा हुई। शिवराज ने मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र किया। उन्होंने कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने की बात कही। इसके लिए वैश्विक मांग समझने पर जोर दिया।
उन्होंने किसानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उत्पादन का सुझाव दिया। इससे निर्यात योग्य कृषि उत्पाद तैयार करने में मदद मिल सकती है। सरकारी सम्मेलन के अनुसार निर्यात और बाजार पहुंच अहम विषय रहे। भंडारण और प्रसंस्करण पर भी ध्यान दिया गया।
तेलंगाना में दो लाख आवास
शिवराज ने तेलंगाना के ग्रामीण आवासों का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवासों की बात कही। उनके अनुसार दो लाख आवासों के लिए पहली किस्त दी गई। उन्होंने आगे भी पात्र परिवारों को आवास देने की बात कही। इसका संबंध ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारियों से भी है। सम्मेलन के दौरान कृषि के साथ ग्रामीण विकास पर भी चर्चा हुई।
कृषि विकास का रोडमैप
दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का मुख्य फोकस क्षेत्रीय जरूरतें रहीं। इसमें केंद्र और राज्यों के सहयोग पर जोर दिया गया। कृषि उत्पादन के साथ बाजार और मूल्यवर्धन पर चर्चा हुई। जलवायु और मौसम संबंधी चुनौतियों पर भी बात हुई। सरकार की आधिकारिक जानकारी में डिजिटल कृषि का भी उल्लेख है। प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक प्रबंधन भी एजेंडे में रहे।
कुल मिलाकर सम्मेलन में कई कृषि मुद्दे एक साथ आए। किसानों की आय बढ़ाना इसका प्रमुख विषय रहा। हालांकि, सम्मेलन में हुई चर्चाओं से हर राज्य में तत्काल बदलाव तय नहीं होते। आगे के फैसले संबंधित सरकारों की प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।
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