हरियाणा के कुरुक्षेत्र में धान खरीद को लेकर किसान सड़कों पर उतरे। मंगलवार को शाहबाद में किसानों ने जीटी रोड जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी सरकारी खरीद तुरंत शुरू करने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। किसानों ने बैरिकेड पार किए और हाईवे तक पहुंच गए।
इसके बाद पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी नहीं हटे तो आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान हाईवे पर कुछ समय यातायात प्रभावित रहा। बाद में पुलिस ने यातायात सामान्य होने की जानकारी दी।
किसानों की मुख्य मांग क्या है
भारतीय किसान यूनियन (BKU) चढ़ूनी के सदस्य प्रदर्शन में शामिल थे। सैकड़ों किसान सुबह शहीद उधम सिंह स्मारक के पास जुटे। किसानों की मुख्य मांग सरकारी खरीद तुरंत शुरू करना है। प्रदर्शन से पहले किसान नेताओं और प्रशासन में बैठक हुई।
गुरनाम सिंह चढ़ूनी और उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा मिले। दोनों पक्षों में करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत चली। बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद किसान जीटी रोड की ओर बढ़ गए।
पुलिस कार्रवाई पर किसान नेता का आरोप
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पुलिस कार्रवाई पर आरोप लगाया। उन्होंने कई किसानों की हिरासत का आरोप लगाया। यह आरोप किसान नेता ने प्रदर्शन के दौरान लगाया। पुलिस की ओर से हिरासत संख्या स्पष्ट नहीं बताई गई। इसलिए हिरासत को लेकर आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।
धान खरीद की तारीख को लेकर विवाद
किसानों ने पहले 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग की। हरियाणा में आमतौर पर खरीद एक अक्टूबर से शुरू होती है। पिछले साल खरीद 22 सितंबर से शुरू हुई थी। इसी वजह से किसान इस साल भी जल्दी खरीद चाहते हैं। किसानों का कहना है कि मंडियों में धान पहुंच रहा है। उनके अनुसार देरी से बिक्री में परेशानी बढ़ सकती है।
केंद्र और हरियाणा सरकार में क्या हुआ
केंद्र की खरीद व्यवस्था में नया सीजन एक अक्टूबर से शुरू होता है। इस सीजन में धान खरीद का सामान्य समय तय रहता है। हरियाणा सरकार ने खरीद पहले शुरू करने की मांग रखी थी। सरकार ने केंद्र से समय आगे करने का अनुरोध किया था, लेकिन केंद्र ने समय नहीं बदला। केंद्र की तय अवधि एक अक्टूबर से 15 नवंबर है।
सीएम ने खरीद पर क्या कहा था
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चार सितंबर को आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि धान खरीद सुचारू ढंग से होगी। मुख्यमंत्री ने केंद्र से लगातार संपर्क की बात कही थी। उन्होंने किसानों से तय नमी सीमा में धान लाने को कहा।
सरकार ने खरीद सीजन की तैयारियों पर बैठक भी की। 20 सितंबर को मुख्यमंत्री ने बाबैन मंडी में बैठक की। इस बैठक में किसान और आढ़ती प्रतिनिधि भी शामिल हुए। राइस मिलर और प्रशासनिक अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।
पहले भी किसानों ने आंदोलन टाला था
कुरुक्षेत्र के उपायुक्त ने भी किसानों से बातचीत की थी। उन्होंने पहले खरीद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आश्वासन दिया था। 16 सितंबर की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी। किसानों ने इसके बाद आंदोलन कुछ समय टाल दिया था। लेकिन 20 सितंबर तक खरीद शुरू नहीं हुई।
इसके बाद 22 सितंबर के प्रदर्शन का रास्ता खुला।
MSP को लेकर किसानों की चिंता
इस विवाद का सीधा संबंध किसानों की बिक्री से है। सरकारी खरीद शुरू होने से किसान निर्धारित समर्थन मूल्य पा सकते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सरकार द्वारा तय दर है। 2026-27 में सामान्य धान का MSP 2,441 रुपए है। ग्रेड ए धान का MSP 2,461 रुपए है। यह दरें खरीफ सीजन के लिए तय की गई हैं। समय पर खरीद किसानों के लिए अहम बनी हुई है।
हाईवे जाम से क्या असर पड़ा
प्रदर्शन का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहा। जीटी रोड दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच प्रमुख मार्ग है। जाम से आम यात्रियों को भी परेशानी हुई। पुलिस और किसान आमने-सामने आने से तनाव बढ़ा। ऐसे मामलों में बातचीत से रास्ता निकालना जरूरी होता है। आगे खरीद की तारीख पर निर्णय अहम रहेगा। मंडियों में आवक और खरीद व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।
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