महाराष्ट्र के बीड जिले में गन्ना किसानों की मांग तेज हुई है। आगामी पेराई सत्र से पहले किसान उचित भाव चाहते हैं। किसान संगठनों ने चीनी मिलों के सामने प्रदर्शन किया है। उन्होंने मिल प्रबंधन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है।
किसान सभा और क्रांतिकारी शेतकरी संगठन इसमें शामिल हैं। दोनों संगठनों ने गन्ने के भाव को लेकर मांग रखी है। किसानों की पहली मांग 4,250 रुपए प्रति टन की है। यह पहली किस्त बिना किसी कटौती के देने की मांग है। अंतिम गन्ना भाव 5,000 रुपए प्रति टन करने की मांग है।
मिलों से पहले भाव बताने की मांग
किसानों का कहना है कि भाव पहले स्पष्ट होना चाहिए। इसके लिए मिलों से लिखित सर्कुलर जारी करने की मांग है। सर्कुलर में पहली किस्त का भाव साफ होना चाहिए। अंतिम भुगतान की दर भी उसमें बताने की मांग है।
किसानों के अनुसार इससे बाद के विवाद कम हो सकते हैं। उन्हें गन्ना बेचने से पहले कीमत की जानकारी मिलेगी। इससे किसान अपनी फसल बेचने का फैसला कर सकेंगे। किसानों ने इसी मुद्दे पर मिलों को ज्ञापन दिए हैं।
बीड जिले में कई चीनी मिलें संचालित होती हैं। किसानों ने अलग-अलग मिल क्षेत्रों में प्रदर्शन किए हैं। अंबासाखर क्षेत्र में भी किसानों ने आवाज उठाई। येडेश्वरी और रांजणी क्षेत्र में भी प्रदर्शन हुए। गंगामाऊली क्षेत्र में भी किसानों ने मांग रखी। संगठनों के अनुसार जिले में कुल नौ मिलें हैं। सभी मिलों तक मांग पहुंचाने की कोशिश जारी है।
सूखे से गन्ने की लागत बढ़ी
बीड में इस साल बारिश कम होने की बात सामने आई है। किसान संगठनों ने सूखे से फसलों को नुकसान बताया है। सोयाबीन और कपास पर भी असर का दावा किया गया। अरहर, मूंग, मक्का और बाजरा भी प्रभावित बताए गए।
गन्ना किसानों के सामने स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताई गई है। कम पानी में किसानों को फसल बचानी पड़ी। इससे सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च बढ़ा है। अन्य कृषि जरूरतों पर भी किसानों का खर्च बढ़ा है।
किसानों का कहना है कि पानी की कमी से वजन घटा। कई जगह गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित हुई। इससे कुल उत्पादन घटने की आशंका जताई गई है। कम उत्पादन के साथ लागत बढ़ने से दबाव बढ़ा है।
गन्ने के वजन पर भी असर
गन्ने की कीमत तय करते समय वजन अहम होता है। किसानों के मुताबिक सूखे ने इस पर असर डाला है। पानी की कमी से गन्ने की बढ़वार प्रभावित हुई। इससे कई खेतों में वजन कम होने का दावा है।
किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ गन्ने का उत्पादन घटने की आशंका है। दूसरी तरफ खेती की लागत बढ़ गई है। इसी वजह से किसान अधिक भाव की मांग कर रहे हैं।
किसान संगठनों ने सूखे का असर भी मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि सिर्फ गन्ने का भाव पर्याप्त नहीं है। सूखे से हुए नुकसान की अलग मदद भी जरूरी है, इसीलिए प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपए सहायता मांगी गई है।
70 हजार रुपए राहत की मांग
अखिल भारतीय किसान सभा ने भी मांग उठाई है। संगठन के राज्य उपाध्यक्ष अजय बुरांडे ने मांग रखी है। उन्होंने सूखा प्रभावित गन्ना किसानों को सहायता देने की बात कही। प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपए सहायता मांगी गई है।
अजय बुरांडे के अनुसार किसान अब ज्यादा जागरूक हैं। किसानों ने पहले भी भाव को लेकर आंदोलन किए हैं। अब वे पेराई से पहले कीमत चाहते हैं। उनका कहना है कि पहले फैसला होना चाहिए।
इससे भुगतान को लेकर बाद के विवाद टल सकते हैं। सरकार और मिल संचालकों से जल्द फैसला मांगा गया है। संगठन किसानों की मौजूदा स्थिति पर ध्यान चाहता है।
गांवों में किसानों की बैठकें
किसान संगठनों ने गांव स्तर पर बैठकें शुरू की हैं। इन बैठकों में गन्ने के भाव पर चर्चा हो रही है। सूखे से हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। किसानों को उनकी मांगों के बारे में बताया जा रहा है।
संगठनों के मुताबिक बैठकों में किसानों का समर्थन मिला। किसानों ने 4,250 रुपए पहली किस्त की मांग दोहराई। अंतिम भाव 5,000 रुपए प्रति टन मांगा गया। इसके बाद मिलों को ज्ञापन सौंपे गए हैं।
किसान चाहते हैं कि पेराई शुरू होने से पहले फैसला हो। इससे किसानों को भुगतान की तस्वीर साफ मिलेगी। मिलों को भी पहले से अपनी दर बतानी होगी। मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन बढ़ सकता है।
सरकार और मिलों पर नजर
किसानों ने सूखे का फायदा उठाने वालों पर नजर मांगी है। उन्होंने कम कीमत पर खरीद रोकने की मांग की है। मुनाफाखोरी पर भी निगरानी की मांग उठी है। गुड़ उत्पादकों की गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही गई। चीनी मिल प्रबंधन की गतिविधियों की निगरानी भी मांगी गई।
यह मांग ऐसे समय उठी है, जब पेराई सत्र करीब है। किसान पहले ही अपनी मांग स्पष्ट कर रहे हैं। उनका जोर कीमत की पहले घोषणा पर है।
साथ ही सूखा राहत भी मांग का हिस्सा है। फिलहाल 4,250 और 5,000 रुपए किसानों की मांग है। इन दरों को सरकार या मिलों का फैसला नहीं बताया गया है। आगे बातचीत के बाद स्थिति साफ होने की उम्मीद है। बीड में गन्ने का भाव बड़ा मुद्दा बन गया है।
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