केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2026 की तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन 28 और 29 सितंबर को हो रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका उद्घाटन किया। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के अधिकारी शामिल हैं। कृषि वैज्ञानिक और दूसरे विशेषज्ञ भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
शिवराज ने राज्यों को समय पर तैयारी करने को कहा। उन्होंने योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार मौसम तेजी से बदल रहा है। बेमौसम बारिश और पानी की कमी चुनौती बढ़ा रही है। इसलिए खेती की योजना वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित होनी चाहिए। डेटा के आधार पर फैसले लेने की जरूरत बताई गई।
पानी देखकर फसल चुनें
इस बार जल बजट को खास महत्व दिया गया है। शिवराज ने इसे रबी तैयारी की अहम कड़ी बताया। हर जिले को उपलब्ध पानी का आकलन करना होगा। इसके बाद फसल का चुनाव करने की सलाह दी गई। कम पानी वाले क्षेत्रों में अलग रणनीति अपनानी होगी।
ऐसे क्षेत्रों में दलहन और तिलहन बढ़ाने पर जोर है। इन फसलों को कम पानी में उगाया जा सकता है। वहीं, पर्याप्त सिंचाई वाले क्षेत्रों में दूसरी फसलें ली जाएंगी। इससे पानी के हिसाब से खेती की योजना बनेगी। बुवाई से पहले मिट्टी की नमी भी जांचनी होगी।
कृषि मंत्री ने जोखिम को लेकर भी चेताया। उन्होंने ज्यादा पानी वाली फसल से बचने की बात कही। कम पानी वाले क्षेत्र में ऐसी फसल जोखिम बढ़ाएगी। बाद में सिंचाई नहीं मिलने पर फसल खराब हो सकती है, इसलिए पानी और मिट्टी की स्थिति देखना जरूरी है।
महाराष्ट्र-कर्नाटक पर नजर
सम्मेलन में सूखे की स्थिति पर भी चर्चा हुई। महाराष्ट्र और कर्नाटक की स्थिति का जिक्र किया गया। केंद्र इन राज्यों में जमीनी स्थिति की जांच करेगा। इसके लिए केंद्रीय टीमों को भेजने की बात कही गई।
कर्नाटक में टीम 3 अक्टूबर को जायजा लेगी। महाराष्ट्र में भी केंद्रीय टीम भेजी जाएगी। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का भी जिक्र हुआ। इन राज्यों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों पर फोकस रहेगा। फसल का चुनाव पानी देखकर करने की सलाह दी गई।
समय पर बीज पहुंचाने पर जोर
रबी फसलों की समय पर बुवाई जरूरी बताई गई है। देरी होने पर बीज का अंकुरण प्रभावित हो सकता है। इससे आगे उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में यह जोखिम ज्यादा रहता है।
शिवराज ने बीज को रबी तैयारी की अहम कड़ी बताया। राज्यों को फसल और किस्म पहले तय करनी होगी। इसके आधार पर बीज की मांग तय होगी। फिर उपलब्धता और वितरण की योजना बनेगी। इससे किसानों को समय पर बीज मिलने की उम्मीद है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR, Indian Council of Agricultural Research) से भी सहयोग मांगा गया। वैज्ञानिकों को क्षेत्र के अनुसार किस्में पहचाननी होंगी। इससे किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
धान के बाद दलहन-तिलहन
धान की कटाई के बाद खेत खाली रहते हैं। ऐसे खेतों में दलहन और तिलहन बढ़ाने की योजना है। चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों पर जोर है। इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।
सरकार इन फसलों का उत्पादन बढ़ाना चाहती है। दलहन और खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता पर जोर है। राज्यों को दलहन का रकबा तय करने को कहा गया। फसल के हिसाब से लक्ष्य भी तय होंगे। किसानों को खरीद व्यवस्था का भरोसा देने की बात हुई।
खाद का संतुलित इस्तेमाल
रबी सीजन में खाद के संतुलित इस्तेमाल पर जोर है। शिवराज ने जरूरत के अनुसार खाद देने की बात कही। जरूरत से ज्यादा खाद लागत बढ़ा सकती है। इससे मिट्टी की सेहत पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने राज्यों से खेत बचाओ अभियान चलाने को कहा। अभियान में खाद के सही इस्तेमाल पर जागरूकता होगी। मिट्टी की सेहत बचाने पर भी जोर रहेगा। इसका उद्देश्य लागत और मिट्टी दोनों का ध्यान रखना है।
सरकार की योजना केवल खाद उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। किसानों को सही मात्रा समझाना भी जरूरी बताया गया। इससे खेती में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की कोशिश होगी।
खरीद व्यवस्था पर भी फोकस
कृषि मंत्री ने खरीद व्यवस्था पहले तैयार रखने को कहा। उत्पादन बढ़ने के बाद बाजार जरूरी होगा। समय पर खरीद नहीं हुई तो किसानों को परेशानी होगी। इसलिए राज्यों को पहले से तैयारी करनी होगी।
राज्य समय पर खरीद नहीं कर पाए तो विकल्प मौजूद रहेगा। केंद्र की नोडल एजेंसियां खरीद कर सकती हैं। इनमें NAFED और NCCF जैसी एजेंसियां शामिल हैं। इसके लिए राज्यों को जरूरी सहयोग देना होगा।
किसान क्रेडिट कार्ड पर जोर
सम्मेलन में किसान क्रेडिट कार्ड पर भी चर्चा हुई। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC, Kisan Credit Card) तक पहुंच बढ़ाने पर जोर है। छोटे और सीमांत किसानों की दिक्कतें दूर करनी होंगी। समय पर कृषि लोन उपलब्ध कराने की बात कही गई।
किसानों के लिए फार्मर आईडी पर भी फोकस है। एग्रीस्टैक का काम तेजी से पूरा करने को कहा गया। इससे योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंच सकता है। डिजिटल रिकॉर्ड से पहचान और सेवाएं आसान हो सकती हैं।
प्राकृतिक खेती को लेकर भी चर्चा हुई। इसके उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर है। सर्टिफिकेशन और बेहतर बाजार कीमत की बात कही गई। सरकार का कहना है कि किसान इसमें रुचि दिखा रहे हैं।
हर सप्ताह होगी फसल समीक्षा
रबी सीजन में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की योजना है। राज्यों को हर सप्ताह फसल की समीक्षा करनी होगी। इसमें बुवाई की स्थिति भी देखी जाएगी। बीज अंकुरण और रोगों की जानकारी ली जाएगी। बाजार भाव की भी समीक्षा होगी।
इसका मकसद समस्या की पहचान जल्दी करना है। जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाया जा सकेगा। इससे खेत स्तर की समस्याओं पर नजर रहेगी। मौसम बदलाव की स्थिति में भी मदद मिल सकती है।
29 सितंबर को आगे की चर्चा होगी। राज्यों के कृषि मंत्री इसमें शामिल होंगे। मौसम पूर्वानुमान और खाद की उपलब्धता पर चर्चा होगी। डिजिटल कृषि और किसान रजिस्ट्री भी एजेंडे में हैं। दलहन और खाद्य तेल मिशन पर भी बात होगी।
राज्यों के साथ साझा रणनीति
सम्मेलन का लक्ष्य साझा रणनीति तैयार करना है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल रहेगा। अलग-अलग राज्यों की जरूरतों को भी देखा जाएगा। खेती की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाई जाएगी। शिवराज ने खेत स्तर पर निगरानी को जरूरी बताया। योजनाओं का असर जमीन पर दिखना जरूरी है। सिर्फ कागजी योजना से किसानों को फायदा नहीं मिलेगा, इसीलिए नियमित समीक्षा और आंकड़ों पर जोर है।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भी मौजूद रहे। रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी ने हिस्सा लिया। कृषि सचिव अतीश चंद्रा, ICAR महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक भी पहुंचे। रबी सीजन 2026 के लिए कई मुद्दे एक साथ जुड़े हैं। पानी, बीज और खाद इसकी मुख्य कड़ियां हैं। दलहन और तिलहन को बढ़ाने की योजना भी है। खरीद और बाजार व्यवस्था को साथ तैयार किया जाएगा। मौसम जोखिम के बीच यह रणनीति लागू होगी।
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