देश में इस साल खरीफ सीजन के दौरान बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अखिल भारतीय किसान सभा यानी एआईकेएस (All India Kisan Sabha) ने केंद्र सरकार से मौजूदा सूखे की स्थिति को गंभीर राष्ट्रीय आपदा मानने की मांग की है। संगठन ने प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की भी अपील की है।
बुवाई क्षेत्र में आई बड़ी कमी
किसान सभा के मुताबिक 28 अगस्त 2026 तक देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई 1071.10 लाख हेक्टेयर में हुई। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1090.01 लाख हेक्टेयर था। इस तरह बुवाई क्षेत्र में 18.91 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है।
संगठन के मुताबिक 21 अगस्त को यह कमी 1.50 प्रतिशत थी। एक हफ्ते में ही यह बढ़कर 1.73 प्रतिशत हो गई। इससे साफ है कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।
बारिश की कमी और अल नीनो का असर
किसान सभा ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही 2026 के मानसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया था। अगस्त की शुरुआत तक मौसमी बारिश दीर्घ अवधि औसत यानी एलपीए (Long Period Average) से करीब 12 प्रतिशत कम रही।
संगठन के मुताबिक जुलाई में देशभर में बारिश औसतन सामान्य रही, लेकिन करीब 47 प्रतिशत जिलों में यह कम या बहुत कम दर्ज हुई। कई इलाकों में लगातार 21 दिनों से ज्यादा का सूखा दौर भी देखा गया। किसान सभा के मुताबिक कमजोर अल नीनो के कारण वर्षा आधारित खेती वाले इलाकों में मानसून अनियमित रहा, जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ा है।
कई फसलों की बुवाई में गिरावट
किसान सभा के ज्ञापन में फसलवार आंकड़े भी दिए गए हैं। संगठन के मुताबिक 21 अगस्त तक रागी की बुवाई सामान्य क्षेत्र के करीब 40 प्रतिशत तक ही रह गई थी। वहीं कपास का बुवाई क्षेत्र सामान्य का लगभग 86 प्रतिशत दर्ज हुआ।
इसके उलट गन्ने का क्षेत्र सामान्य से ज्यादा, करीब 108 प्रतिशत रहा। किसान सभा के मुताबिक रागी के क्षेत्र में 27.14 प्रतिशत, मक्का में 4.06 प्रतिशत, अरंडी में 20.80 प्रतिशत और सोयाबीन में 1.15 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। चावल की बुवाई में भी 3.15 प्रतिशत की कमी थी, जो 28 अगस्त तक बढ़कर 3.35 प्रतिशत हो गई।
संगठन के मुताबिक चावल के क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमी कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में देखी गई।
राजस्थान, कर्नाटक और महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित
किसान सभा के मुताबिक कुल खरीफ क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी राजस्थान में दर्ज हुई, जहां करीब 11.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। कर्नाटक में यह आंकड़ा 6.19 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 3.11 लाख हेक्टेयर रहा।
संगठन के मुताबिक दलहन क्षेत्र में कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में गिरावट देखी गई। वहीं धान क्षेत्र में कर्नाटक, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई। किसान सभा ने चेतावनी दी है कि इसका असर आने वाले रबी सीजन पर भी पड़ सकता है, क्योंकि मिट्टी की नमी और भूजल पर दबाव बढ़ रहा है।
1.2 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की मांग
किसान सभा ने केंद्र सरकार से 1.2 लाख करोड़ रुपए का विशेष सूखा पैकेज देने की मांग की है। संगठन के मुताबिक इसमें फसल नुकसान की भरपाई, दोबारा बुवाई के लिए मुफ्त बीज और मनरेगा के विस्तार को शामिल किया जाना चाहिए।
इसके अलावा संगठन ने हर गंभीर रूप से प्रभावित जिले के लिए 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता देने का प्रस्ताव रखा है। किसान सभा के मुताबिक इस राशि का इस्तेमाल चारा शिविर, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, रोजगार और लघु सिंचाई की आपात मरम्मत में किया जा सकता है।
कर्ज राहत और फसल बीमा पर भी जोर
किसान सभा ने किसानों और ग्रामीण मजदूरों के कर्ज में राहत की मांग भी की है। संगठन के मुताबिक किसान क्रेडिट कार्ड, माइक्रोफाइनेंस और निजी कर्ज पर राहत दी जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित जिलों में कर्ज वसूली पर 12 महीने की रोक लगाने की मांग की गई है।
फसल बीमा योजना में बदलाव की मांग करते हुए संगठन ने सभी किसानों और बटाईदारों को स्वचालित रूप से शामिल करने की बात कही है। किसान सभा के मुताबिक प्रीमियम न्यूनतम रखा जाना चाहिए और दावों का निपटान समय पर होना चाहिए।
मनरेगा और खरीद पर भी मांग
किसान सभा ने सूखा प्रभावित परिवारों के लिए मनरेगा के तहत साल में 200 दिन रोजगार की गारंटी देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इसके लिए केंद्र को 90 प्रतिशत खर्च वहन करना चाहिए।
इसके अलावा संगठन ने प्रभावित जिलों में खरीफ खाद्यान्न, दलहन और तिलहन की पूरी खरीद समर्थन मूल्य पर करने की मांग की है। किसान सभा के मुताबिक पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा शुल्क में भी राहत दी जानी चाहिए।
आंदोलन तेज होने की चेतावनी
किसान सभा ने कहा है कि अगर सरकार ने सूखे और ग्रामीण संकट के समाधान के लिए जल्द कदम नहीं उठाए, तो देशभर में किसानों और ग्रामीण मजदूरों के आंदोलन तेज हो सकते हैं। यह किसान संगठन का दावा है और सरकार की तरफ से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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