राजस्थान में खाद वितरण के लिए हाल ही में ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था शुरू की गई थी। अब यह व्यवस्था सियासी विवाद का विषय बन गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे लेकर भजनलाल शर्मा सरकार पर सीधा हमला बोला है।
गहलोत का आरोप, किसान परेशान
गहलोत का कहना है कि किसानों की सुविधा के लिए बनाई गई व्यवस्था अब खुद परेशानी बन गई है। उनके मुताबिक तकनीकी खामियां और सर्वर की दिक्कत किसानों को घंटों रोक रही हैं। कई किसानों को खाद के बिना ही खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
गहलोत ने भाजपा सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि नया सिस्टम खाद खरीदना आसान बनाने के बजाय मुश्किल बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह समस्या पूरे प्रदेश में फैली है। अलग-अलग जिलों से शिकायतें सामने आ रही हैं।
सरकार की नई व्यवस्था क्या है
राजस्थान सरकार ने फर्टिलाइजर सेल्स फ्रेमवर्क (Fertilizer Sales Framework) के तहत यह ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की है। इसका मकसद खाद वितरण में पारदर्शिता लाना बताया गया है। किसान अब खाद की उपलब्धता ऐप पर देखकर बुकिंग कर सकते हैं।
सरकार के मुताबिक इस व्यवस्था से दुकानों पर कतारें कम होंगी। साथ ही खाद के स्टॉक की निगरानी भी बेहतर होगी। सब्सिडी वाले खाद का वितरण ज्यादा व्यवस्थित तरीके से होने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर गहलोत के आरोप इससे अलग तस्वीर दिखाते हैं।
मध्य प्रदेश भेजी जा रही खाद
गहलोत ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनके मुताबिक राजस्थान के किसानों को उनके हिस्से की पूरी खाद नहीं मिल रही। उनका आरोप है कि खाद की सप्लाई पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश भेजी जा रही है।
हालांकि यह दावा फिलहाल सिर्फ गहलोत का आरोप है। इस आरोप की पुष्टि करने वाला कोई सरकारी आंकड़ा या दस्तावेज सामने नहीं आया है। इसलिए इसे पुष्टि होने तक एक राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गहलोत ने इसी मुद्दे पर भाजपा के डबल इंजन सरकार वाले दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा सरकार होने के बावजूद किसानों तक पूरी खाद नहीं पहुंच रही। उन्होंने इसे वितरण व्यवस्था की खामी बताया।
सीएम भजनलाल से सीधा सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधा जवाब मांगा है। गहलोत ने पूछा कि किसानों को खाद के लिए आखिर कब तक परेशान होना पड़ेगा।
गहलोत का यह हमला ऐसे समय आया है जब बुवाई के सीजन में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ऑनलाइन व्यवस्था वितरण आसान बनाने के मकसद से लाई गई थी। लेकिन गहलोत के मुताबिक तकनीकी दिक्कतों ने प्रक्रिया को और उलझा दिया है।
ऑनलाइन खाद बुकिंग में तकनीकी दिक्कत
इस विवाद के बीच कृषि विभाग ने भी कुछ तकनीकी समस्याएं मानी हैं। जयपुर में कृषि विभाग के सहायक निदेशक राजेश विजय के मुताबिक नया ऐप शुरू होने से कुछ दिक्कतें आ रही हैं।
विभाग का कहना है कि यह शुरुआती और अस्थायी दौर है। तकनीकी खामियों को दूर करने पर लगातार काम किया जा रहा है। विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि समस्या कब तक पूरी तरह सुलझ जाएगी।
विपक्ष और सरकार के अलग-अलग दावे
इस पूरे मामले में विपक्ष और सरकार के दावे अलग-अलग दिशा में हैं। गहलोत का कहना है कि किसान लगातार परेशान हो रहे हैं। वहीं सरकार और कृषि विभाग इसे नई व्यवस्था की शुरुआती दिक्कत बता रहे हैं।
दोनों पक्षों के दावों के बीच किसानों की असली परेशानी अभी भी बनी हुई है। खाद जैसी जरूरी चीज के लिए घंटों इंतजार करना किसानों के लिए सीधा नुकसान है।
किसानों के लिए क्यों अहम है मुद्दा
बुवाई के सीजन में खाद समय पर मिलना खेती की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करता है। अगर किसान सही समय पर खाद नहीं डाल पाते, तो फसल की पैदावार पर असर पड़ सकता है।
ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम का मकसद यही था कि किसानों को पहले पता चल जाए कि किस दुकान पर खाद उपलब्ध है। इससे उन्हें दुकानों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलनी थी। लेकिन गहलोत के आरोप सही साबित हुए तो यह मकसद अधूरा ही रह जाएगा।
तकनीकी सिस्टम में शुरुआती दिक्कतें आना आम बात मानी जाती है। लेकिन सवाल यह है कि सरकार इन दिक्कतों को कितनी जल्दी सुलझाती है। जब तक सुधार पूरा नहीं होता, किसानों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
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