किसान की बात,सूत्र के साथ

अदाकारी से इतर किसानों के मददगार के रूप में भी याद आएंगे नाना पाटेकर, कार के लिए जमा किए डेढ़ करोड़ भी दे दिए थे किसानों को

newz@gmail.com | Oct 8, 2026, 17:22 IST

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। अदाकारी के अलावा उन्हें किसानों के हित में गए कामों के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। साल 2015 के सूखे में उन्होंने कार के 1.5 करोड़ रुपए किसानों को दिए। फिर NAAM Foundation शुरू की, जिसने 10 साल में 2,246 जलस्रोत पुनर्जीवित किए। आइए जानते हैं फिल्मों से इतर उनकी इस भूमिका के बारे में।

नाना पाटेकर

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। यह खबर आठ अक्टूबर की सुबह आई। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इसकी पुष्टि की है। पाटेकर की पहचान फिल्मों के साथ सूखा पीड़ित किसानों के काम से भी रही है। उन्होंने 2015 में अपनी कार के लिए जमा 1.5 करोड़ रुपए किसान परिवारों को दे दिए थे। बाद में उसी सोच से जल संरक्षण का बड़ा अभियान खड़ा हुआ।

क्या हुआ था सुबह

जानकारी के मुताबिक पाटेकर को सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद मेडिकल टीम गोवा में उनके फ्लैट पर पहुंची। वे वहां बेहोश मिले। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। गोवा के मणिपाल अस्पताल की मेडिकल टीम ने सुबह 5.20 बजे उन्हें मृत घोषित किया। मेडिकल टीम ने उन्हें कार्डियक मसाज भी दी।

शुरुआती रिपोर्ट्स में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है। यह मामला मेडिको-लीगल है। यानी यह चिकित्सकीय और कानूनी जांच से जुड़ा मामला होता है। इसलिए पोस्टमार्टम भी किया जाएगा। मल्हार पाटेकर ने कहा कि उनके पास अभी पूरी जानकारी नहीं है। वे गोवा पहुंचकर पूरा ब्योरा लेंगे।

2015 का सूखा और पाटेकर

करीब दस साल पहले महाराष्ट्र भीषण सूखे से जूझ रहा था। किसान कर्ज के बोझ तले दबे थे। हालात बहुत मुश्किल थे। उस दौर में पाटेकर ने यह सब सिर्फ खबरों में नहीं देखा। वे खुद किसानों के बीच पहुंचे।

कार के पैसे किसानों को दिए

पाटेकर ने अपनी कार खरीदने के लिए पैसे जमा किए थे। यह रकम 1.5 करोड़ रुपए थी। उन्होंने यह पूरी रकम प्रभावित किसान परिवारों की मदद के लिए दे दी। जरूरतमंद परिवारों को 15,000 रुपए के चेक दिए गए। सीधा गणित देखें तो 1.5 करोड़ रुपए से 15,000 रुपए के करीब 1,000 चेक बन सकते हैं।

मदद से आगे सोचा

पाटेकर को जल्द ही एक बात का एहसास हुआ। सिर्फ आर्थिक मदद से सूखे की समस्या खत्म नहीं होगी। पैसे आज किसी परिवार का सहारा बन सकते हैं। लेकिन सवाल यह था कि अगले साल क्या होगा। अगर वही गांव फिर पानी को तरसे, तो क्या किया जाए।

यहीं से उनकी सोच बदली। अब लक्ष्य किसानों को सिर्फ सहारा देना नहीं था। लक्ष्य था उनके गांव में पानी पहुंचाना।

NAAM Foundation की शुरुआत

इसी सोच से 2015 में NAAM Foundation की शुरुआत हुई। इसे पाटेकर और उनके दोस्त मकरंद अनासपुरे ने शुरू किया। मकसद साफ था। सूखे से जूझ रहे गांवों में पानी की समस्या का स्थायी हल खड़ा करना। यह कोई एक बार की राहत नहीं थी। यह लंबे समय तक चलने वाला काम था। इसमें गांवों के जलस्रोत सुधारने पर जोर रहा।

जल संरक्षण के काम

फाउंडेशन ने गांवों में जलस्रोतों का पुनरुद्धार शुरू किया। नदियों और नालों की सफाई का काम हुआ। गाद निकालने का अभियान चला। जल-भंडारण बढ़ाने के काम भी हुए।

गाद का मतलब है नदी, तालाब या बांध की तली में जमी मिट्टी। जब गाद हटती है, तो पानी रोकने की जगह बढ़ती है। इससे बारिश का पानी ज्यादा समय तक टिकता है।

10 साल में किए कई बड़े काम

NAAM Foundation के मुताबिक 2015 से 2025 के बीच कई बड़े काम हुए। इस दौरान 2,246 जलस्रोत पुनर्जीवित किए गए। 178 नदियों का पुनरुद्धार हुआ।

फाउंडेशन के मुताबिक 769 रिसाव तालाब बहाल किए गए। रिसाव तालाब ऐसा तालाब होता है जो पानी को जमीन में रिसने देता है। इससे भूजल स्तर सुधरने में मदद मिलती है। इसी अवधि में 26 बांधों से गाद निकाली गई। साथ ही 14.43 TMC (Thousand Million Cubic Feet) जल-भंडारण क्षमता तैयार हुई।

आंकड़ों का आसान गणित

अब इन आंकड़ों को आसान भाषा में समझते हैं। दस साल में 2,246 जलस्रोत पुनर्जीवित हुए। यानी औसतन हर साल करीब 225 जलस्रोत। यह हमारा हिसाब है। एक TMC का मतलब 100 करोड़ घन फीट होता है। इस हिसाब से 14.43 TMC करीब 1,443 करोड़ घन फीट बैठता है।

फिल्मी सफर की झलक

पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के बड़े नामों में गिने जाते थे। उन्होंने 1978 में फिल्म गमन से हिंदी फिल्मों में कदम रखा। उन्हें परिंदा के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। साल 1995 में क्रांतिवीर के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। उनके संवाद आज भी याद किए जाते हैं।

लोग उन्हें अभिनेता के साथ संवेदनशील इंसान के रूप में याद कर रहे हैं। उन्होंने किसानों के दर्द को अपनी जिम्मेदारी माना। उनका जल संरक्षण का काम आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल रहेगा।

पाटेकर के निधन पर फिल्म जगत और राजनीति में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया है। अभिनेता अक्षय कुमार ने कहा कि उन्हें इस खबर पर यकीन नहीं हो रहा।

रितेश देशमुख ने लिखा कि उनके पास शब्द नहीं हैं। अभिनेत्री मनीषा कोईराला ने कहा कि उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दुख जताया।

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