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आयरन-जिंक से भरपूर गेहूं की नई किस्म DBW 443 तैयार, जानें उपज, रोग प्रतिरोधकता और खासियतें

newz@gmail.com | Sep 17, 2026, 17:56 IST

वैज्ञानिकों ने गेहूं की नई किस्म DBW 443 करण सान्वी विकसित की है। इसमें 13% से ज्यादा प्रोटीन, आयरन और जिंक पाया गया है। यह किस्म पत्ती और तना रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी है। इसकी उत्पादन क्षमता 77.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। सितंबर 2024 में अयोध्या की बैठक में इसे पहचान मिली।

गेहूं की किस्म

देश में कुपोषण और छिपी भूख यानी हिडन हंगर बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी बीच वैज्ञानिकों ने एक खास गेहूं किस्म विकसित की है। यह किस्म अच्छी पैदावार के साथ पोषण में भी आगे है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR (Indian Council of Agricultural Research) ने इसे तैयार किया है।

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान यानी IIWBR (Indian Institute of Wheat and Barley Research) ने इसे बनाया है। यह संस्थान करनाल में स्थित है। इस नई बायो फोर्टिफाइड किस्म का नाम DBW 443 यानी करण सान्वी है। यह किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। यह खासतौर पर ज्यादा प्रोटीन, आयरन और जिंक के लिए विकसित की गई है।

तीन साल का परीक्षण

DBW 443 को पहले क्वालिटी कंपोनेंट नर्सरी में परखा गया। साथ ही व्हीट बायोफोर्टिफिकेशन नर्सरी में भी इसका परीक्षण हुआ। देश के 18 केंद्रों पर इसकी जांच की गई। परीक्षणों में इस किस्म ने बेहतरीन नतीजे दिए। उपज, पोषण और रोग प्रतिरोधकता तीनों में यह किस्म खरी उतरी। इसके बाद इसे प्रायद्वीपीय क्षेत्र यानी Peninsular Zone के लिए चुना गया। इसे एडवांस्ड वैरायटी ट्रायल यानी AVT (Advanced Varietal Trial) में शामिल किया गया। परीक्षणों में इस किस्म ने औसतन 50 से 51 क्विंटल उपज दी।

लगातार अच्छे प्रदर्शन के आधार पर इसे आगे बढ़ाया गया। आखिरकार सितंबर 2024 में अयोध्या में बड़ी बैठक हुई। यह ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट यानी AICRP (All India Coordinated Research Project) की बैठक थी। यह इसकी 63वीं वार्षिक बैठक थी। इसी बैठक में DBW 443 को नई किस्म के रूप में पहचान मिली।

पोषण से भरपूर गेहूं

करण सान्वी की सबसे बड़ी खासियत इसका पोषण स्तर है। इस किस्म में प्रोटीन 13.4 प्रतिशत तक पाया गया है। आयरन यानी Fe की मात्रा 41.9 पीपीएम दर्ज हुई है। जिंक यानी Zn की मात्रा 43 पीपीएम तक मिली है। देश में आयरन और जिंक की कमी बड़ी पोषण चुनौती मानी जाती है। ऐसे में यह बायो फोर्टिफाइड किस्म काफी उपयोगी साबित हो सकती है। इससे लोगों के भोजन में जरूरी पोषक तत्व बढ़ सकते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में इसका असर ज्यादा दिख सकता है।

दमदार पैदावार क्षमता

वैज्ञानिकों के अनुसार इस किस्म की संभावित उत्पादन क्षमता काफी अच्छी है। DBW 443 प्रति हेक्टेयर 77.6 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। इसके दानों का आकार भी बड़ा माना जा रहा है। एक हजार दानों का वजन करीब 45 ग्राम दर्ज हुआ है। इन्हीं वजहों से इसे उच्च उत्पादकता वाली किस्मों में गिना जा रहा है। अच्छी पैदावार के साथ बेहतर पोषण भी किसानों को आकर्षित कर सकता है। यह गुण इसे बाकी किस्मों से अलग बनाता है। किसानों के लिए यह दोहरा फायदा माना जा रहा है।

रतुआ रोग से सुरक्षा

गेहूं की खेती में पत्ती रतुआ और तना रतुआ बड़ी बीमारियां मानी जाती हैं। परीक्षणों में DBW 443 इन दोनों रोगों के प्रति प्रतिरोधी पाई गई। प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों हालात में इसका संक्रमण स्तर कम रहा। इससे किसानों को फसल बचाने में मदद मिल सकती है। रोग प्रतिरोधी होने से दवा पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। इससे किसानों की लागत में सीधी बचत हो सकती है। साथ ही फसल खराब होने का खतरा भी घट जाता है। कुल मिलाकर यह किसानों के लिए राहत भरी बात है।

कैसी है यह किस्म

DBW 443 के पौधों का रंग गहरा हरा होता है। इसके तने आधा-सीधा यानी Semi-Erect आकार के होते हैं। इसकी बालियां लंबी और घनी होती हैं। पकने पर बाली का रंग सफेद हो जाता है। इसके दाने एंबर रंग के और चमकदार होते हैं। दानों की बनावट आधा-कठोर मानी जाती है। यह किस्म करीब 89 सेंटीमीटर ऊंची होती है। इसमें 63 दिन में फूल आते हैं। करीब 109 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है।

DBW 443 में गर्मी और सूखा सहने की क्षमता भी है। यही वजह है कि बदलती जलवायु में भी यह उपयोगी मानी जा रही है। यह स्थिर और टिकाऊ उत्पादन देने में सक्षम है। आने वाले समय में यह किस्म कई इलाकों में उगाई जा सकती है।

किसानों के लिए फायदे

विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म किसानों को कई फायदे दे सकती है। पहला फायदा है ज्यादा और स्थिर उत्पादन मिलना। दूसरा फायदा है रोगों से होने वाला नुकसान कम होना। तीसरा फायदा है पोषणयुक्त गेहूं से बेहतर बाजार मिलना।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह किस्म उत्पादन और पोषण, दोनों लक्ष्य पूरे कर सकती है। एक तरफ किसानों को अच्छी उपज मिलेगी, दूसरी तरफ देश को पोषणयुक्त अनाज। यही वजह है कि इसे नई पीढ़ी की खास किस्म माना जा रहा है। आने वाले सीजन में यह किसानों के बीच लोकप्रिय हो सकती है।

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