किसान की बात,सूत्र के साथ

महाराष्ट्र में सूखे ने बढ़ाई मुश्किलें, किसानों ने की मुआवजे की मांग, सीएम-डिप्टी सीएम ने लिया जायजा

newz@gmail.com | Sep 24, 2026, 17:17 IST

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखे से सोयाबीन की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। फलियों में दाना नहीं भरा है। किसान सूखा घोषित करने और 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग कर रहे हैं। सीएम और डिप्टी सीएम ने खेतों का दौरा किया है।

महाराष्ट्र में सूखा

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखे ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश की कमी से खरीफ फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन की फसल में देखा जा रहा है। पौधों पर फलियां तो लगी हैं, लेकिन उनमें दाना नहीं भरा। किसान अब सूखा घोषित करने और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रभावित खेतों का दौरा किया।

महाराष्ट्र में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। इस वजह से खेतों में खड़ी खरीफ फसलें सूखने लगी हैं। किसानों की सबसे बड़ी चिंता सोयाबीन की फसल को लेकर है। कई जगह फलियां तो दिख रही हैं, लेकिन अंदर दाना नहीं बना। ऐसे हालात में किसान सरकार से तुरंत मदद मांग रहे हैं। सूखा घोषित करने की मांग भी लगातार तेज हो रही है।

सीएम के सामने रो पड़ा किसान

लातूर जिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निलंगा तहसील का दौरा किया। वे जाऊ और खरोसा गांव पहुंचकर प्रभावित खेतों का जायजा लिया। इस दौरान एक किसान अपनी फसल की हालत बताते हुए भावुक हो गया। किसान मुख्यमंत्री के गले लगकर रो पड़ा। किसान ने बताया कि सोयाबीन पर प्रति एकड़ करीब 25 हजार रुपए खर्च हुए। प्रति हेक्टेयर यह खर्च करीब 50 हजार रुपए तक पहुंचा। लेकिन पर्याप्त बारिश न होने से पूरी फसल सूख गई। किसान ने सरकार से आर्थिक मदद की मांग की।

रोहित पवार का सरकार पर निशाना

छत्रपति संभाजीनगर में एनसीपी (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा और बैरिकेडिंग पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि किसानों को सीधे अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। पवार ने किसानों को 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग की। साथ ही मजदूरों के लिए 25 हजार रुपए की सहायता भी मांगी गई। उन्होंने प्रभावित परिवारों के विद्यार्थियों की फीस माफ करने की भी मांग रखी। पवार ने विभागीय आयुक्त को मांग पत्र सौंपा। उन्होंने बीड में बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

विदर्भ के खेतों तक पहुंचा संकट

विदर्भ के अकोला और बुलढाणा में भी सोयाबीन किसानों की परेशानी बढ़ रही है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद खेतों का दौरा किया। उन्होंने किसानों से उनकी समस्याएं सीधे सुनीं। किसानों ने उन्हें अपनी खराब हो चुकी फसल दिखाई। एक किसान ने बताया कि खेती के लिए पैसा जुटाना मुश्किल हो गया था। उसने दावा किया कि उसे पत्नी का मंगलसूत्र तक गिरवी रखना पड़ा। शिंदे ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार मदद करेगी। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

आंकड़ों में कितना है नुकसान

अमरावती डिविजन में करीब 30.12 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई गई हैं। इसमें से करीब 13.78 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती है। कपास की खेती करीब 11.03 लाख हेक्टेयर में हुई है। अरहर की बुवाई करीब 4.66 लाख हेक्टेयर में की गई है। कृषि विभाग के अधिकारी गणेश घोरपड़े ने नुकसान का अनुमान बताया है। उनके मुताबिक सोयाबीन में 50 से 60 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। कपास और अरहर में भी 40 से 50 प्रतिशत नुकसान संभव है।

नांदेड़ के किसान की चुनौती

नांदेड़ जिले के दाभड़ गांव से भी किसानों की बदहाली सामने आई है। किसान आत्माराम टेकाले और पत्नी कसाबाई टेकाले परेशान हैं। उनके खेत में सोयाबीन की फलियां तो हैं, लेकिन दाना नहीं है। परिवार ने बैंक से कर्ज लेने के बजाय गहने बेचकर खेती की थी। अब बारिश की कमी से फसल खराब हो गई है। बीज, खाद और कीटनाशक की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसान का फसल दिखाता वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। उन्होंने एक किलो सोयाबीन के बदले एक क्विंटल काजू-बादाम देने की बात कही थी। इससे उन्होंने अपनी फसल की हालत बताने की कोशिश की।

अकोला में आंदोलन की चेतावनी

अकोला में शिवसेना (उद्धव ठाकरे) विधायक नितीन देशमुख ने भी मांग उठाई है। उन्होंने किसानों को 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि 5 अक्टूबर तक राहत नहीं मिली तो आंदोलन होगा। यह आंदोलन समृद्धि महामार्ग पर किया जाएगा। अकोला को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर मोर्चा भी निकाला जाएगा। आयोजकों का दावा है कि 10 हजार से अधिक किसान शामिल हो सकते हैं। किसान बैलगाड़ियों और सूखी सोयाबीन की फसल के साथ पहुंचेंगे।

अलग-अलग तरीकों से जताया विरोध

लातूर के शिरूर अनंतपाल में भी किसानों ने विरोध दर्ज कराया। किसानों ने पहले रैली निकाली और फिर तहसील कार्यालय पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार की मेज पर सूखी सोयाबीन की फसल रख दी। इसके साथ ही उन्होंने सूखा घोषित करने की मांग का ज्ञापन सौंपा। चंद्रपुर में गणेशोत्सव की एक झांकी में भी किसानों का दर्द दिखा। युवा गणेश मंडल ने गणपति बप्पा को किसान के रूप में दिखाया। झांकी में बप्पा खेत में हल चलाते नजर आए। इसके जरिए कमजोर मॉनसून और किसानों की परेशानी को उजागर किया गया।

सरकार के कदम पर टिकी निगाहें

महाराष्ट्र में सूखे का असर अब खेतों से सड़कों तक दिख रहा है। किसान लगातार मुआवजे और सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया है। विपक्षी नेता भी सरकार पर तेजी से फैसला लेने का दबाव बना रहे हैं। अब सवाल है कि आकलन पूरा होने के बाद सरकार क्या करेगी। किसानों की निगाहें राहत पैकेज के ऐलान पर टिकी हुई हैं।

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