किसान की बात,सूत्र के साथ

छत्तीसगढ़ में 250 साल पुरानी पान की खेती को मिली नई जिंदगी, 50 साल से बंद पड़ी थी, अब देशभर से 47 किस्में लाकर रोपी गई

newz@gmail.com | Sep 29, 2026, 17:53 IST

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान में 250 साल पुरानी पान की खेती को अनुसंधान से नई जिंदगी मिल रही है। महिला समूहों ने पान से लड्डू, कुकीज और चाय जैसे उत्पाद बनाए हैं।

पान की खेती

किसी पुरानी परंपरा को फिर से जिंदा करना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब वह परंपरा 50 साल से खामोश हो। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान इलाके में ऐसी ही एक कोशिश चल रही है। यहां करीब 250 साल पुरानी पान की खेती को नई जिंदगी मिल रही है। इस कोशिश में अनुसंधान और नए उत्पादों दोनों का सहारा लिया जा रहा है। महिला समूह और जिला प्रशासन भी इसमें साथ जुड़े हैं।

देशभर से लाई गईं 47 किस्में

छुईखदान पान अनुसंधान केंद्र के शोधकर्ता डॉ. बीएस असाटी के मुताबिक यहां पान की खेती 50 साल से बंद पड़ी थी। इसे दोबारा शुरू करने के लिए देशभर से 47 किस्में लाई गईं। इन्हें यहां रोपा गया।

डॉ. असाटी के अनुसार कभी यहां बरेजा आधारित पान की खेती खूब होती थी। बरेजा एक खास तरह का ढका हुआ पान बाग होता है। यहां पौधों को छांव और नमी मिलती है। उस दौर में यहां की पत्तियां मुंबई, कोलकाता और दिल्ली तक भेजी जाती थीं। बनारस और नागपुर भी इसमें शामिल थे।

समय के साथ हालात बदल गए। नई पीढ़ी इस खेती से दूर होती गई। धीरे-धीरे उत्पादन लगभग ठप पड़ गया। यही वजह है कि इसे दोबारा खड़ा करने में मेहनत लग रही है।

दूसरे राज्यों में गया शोध दल

नई पीढ़ी को फिर से इस खेती से जोड़ना आसान नहीं था। इसके लिए किसानों को देश के प्रमुख पान उत्पादक इलाकों का भ्रमण कराया गया। शोध दल ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मिदनापुर और हावड़ा का अध्ययन किया। दक्षिण 24 परगना का भी अध्ययन हुआ।

इसके साथ उत्तर प्रदेश के महोबा का भी अध्ययन हुआ। मध्य प्रदेश के छतरपुर और जबलपुर का भी अध्ययन हुआ। इन जगहों से पान की कई अहम किस्में लाई गईं।

लाई गई किस्मों में देसी पान, देसबारी और महोबिया शामिल हैं। छत्रपति, कटक और बंगला किस्में भी शामिल हैं। मीठा, कपूर और बिलौरी किस्में भी इसी सूची में हैं। हर किस्म का अपना स्वाद और खासियत होती है।

पान का बदला रूप

अब पान सिर्फ साधारण पत्ती के रूप में नहीं बिकता। महिला स्वसहायता समूहों की मदद से इससे कई नए उत्पाद बनाए जा रहे हैं। पान के लड्डू और कुकीज इनमें शामिल हैं।

चॉकलेट फ्लेवर वाला पान भी तैयार हो रहा है। पान रिफ्रेश और पान चाय जैसे उत्पाद भी बाजार में जगह बना रहे हैं। ये सभी उत्पाद पारंपरिक पान को नए तरीके से पेश करते हैं।

जिला प्रशासन के सहयोग से पांच दुकानें भी बनाई गई हैं। इन दुकानों से नए उत्पादों की बिक्री शुरू हो चुकी है। इससे महिला समूहों को अतिरिक्त आमदनी का जरिया मिला है।

फेयर में अच्छी प्रतिक्रिया

हाल ही में साइंस कॉलेज मैदान में इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर लगा था। इसमें पान से बने उत्पादों का स्टॉल भी लगाया गया। यहां आए लोगों ने इन उत्पादों में गहरी दिलचस्पी दिखाई।

यह बताती है कि परंपरागत उत्पादों को नए रूप में पेश करने पर बाजार मिल सकता है। स्टॉल पर मिली प्रतिक्रिया इस पूरी कोशिश के लिए उत्साहजनक मानी जा रही है।

किसानों को मिल रही नकद आय

पान की पत्तियों की बिक्री किसानों के लिए लगातार नकद आय का जरिया बनती है। यह खेती दूसरी फसलों जैसी मौसमी नहीं होती। इसलिए आय भी नियमित बनी रहती है। इसी प्रोत्साहन से क्षेत्र के करीब 10 किसान अब पान उगाने आगे आए हैं। यह संख्या छोटी जरूर है। पर एक बंद पड़ी परंपरा के लिए यह शुरुआत मायने रखती है।

पान कैफे की भी हो रही तैयारी

इस पूरी कोशिश को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा ऐलान भी हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छुईखदान में पान कैफे बनाने की घोषणा की थी। इस पर फिलहाल काम जारी है। पान कैफे बनने से इलाके में एक नया आकर्षण जुड़ सकता है। इससे स्थानीय पान उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का मौका भी मिलेगा।

किसानों के लिए क्या मायने

यह पूरी कोशिश सिर्फ पुरानी परंपरा लौटाने भर की नहीं है। इसमें आय के नए स्रोत भी जुड़े हैं। किसानों के लिए पान की खेती नकद आय का जरिया बन सकती है।

महिला समूहों के लिए लड्डू, कुकीज और चाय बनाना अतिरिक्त कमाई का मौका है। हालांकि अभी यह कोशिश शुरुआती दौर में है। पांच दुकानें और 10 किसान अभी सीमित संख्या हैं।

आगे इसका विस्तार कैसे होगा, यह प्रशासन के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। जो किसान पान उगाना चाहते हैं, वे अनुसंधान केंद्र से जानकारी ले सकते हैं।

पुरानी विरासत को नया आधार

छत्तीसगढ़ की यह कोशिश दिखाती है कि पुरानी खेती परंपराओं को नए नजरिए से भी बचाया जा सकता है। सिर्फ पुरानी किस्में वापस लाना काफी नहीं है। नए उत्पाद और नया बाजार भी जरूरी है।

यह मॉडल कामयाब रहा तो पान संस्कृति को नया व्यापारिक आधार मिल सकता है। इससे इलाके के किसानों और महिला समूहों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

ये भी पढ़ें…

छत्तीसगढ़ के किसान ने धान के साथ की ग्राफ्टेड बैंगन की खेती, एक एकड़ में मिला 23 टन उत्पादन

सीजी के महेंद्र ने ये तरीका अपनाया और 50 डिसमिल से एक एकड़ तक पहुंच गई मिर्च की खेती, कमाई एक लाख रुपए

किसान बड़े दिल वाला: जमीन बेच बनाया शहीद पार्क, यहां 18 शहीद जवानों के साथ सचिन-सूर्यकुमार की भी प्रतिमा

CG के किसान ने गुलाब की खेती से कमाए 8 लाख रुपए, जानें पूरी खेती की तकनीक और कमाई का हिसाब

GENERAL newz@gmail.com

Read more