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देश में सस्ती हुई चीनी, दाम 44-49 रुपए किलो, लेकिन गन्ना फसल को लेकर ISMA ने जताई अनिश्चितता

newz@gmail.com | Sep 10, 2026, 18:41 IST

देश में चीनी के दाम 44 से 49 रुपए प्रति किलो के बीच स्थिर हैं। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA ने अभी गन्ना उत्पादन का अनुमान जारी नहीं किया है। संगठन अगले छह हफ्तों की बारिश पर नजर रख रहा है।

चीनी के दाम

देश में चीनी की कीमतों को लेकर फिलहाल राहत की स्थिति है। कुछ समय की तेजी के बाद चीनी के भाव फिर नीचे आ गए हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (National Federation of Cooperative Sugar Factories) के एमडी प्रकाश नाइकनवरे ने यह जानकारी दी। उनके मुताबिक बाजार में चीनी की कीमतें 44 से 49 रुपए प्रति किलो हैं। ये कीमतें GST को छोड़कर हैं।

नाइकनवरे ने कहा कि मौजूदा कीमतें चिंता की वजह नहीं हैं। फिलहाल न्यूनतम भाव 44 रुपए प्रति किलो है। ऊपरी स्तर करीब 49 रुपए प्रति किलो दर्ज हुआ है। यह भाव GST जोड़ने से पहले का है। असली खुदरा कीमत इससे थोड़ी अलग हो सकती है। इस दायरे में कीमतें रहने से मिलों को फायदा हो रहा है। इससे उत्पादन लागत कवर करने में मदद मिल रही है। साथ ही उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा है। चीनी हर घर की जरूरी वस्तु है। इसलिए दाम स्थिर रहना आम लोगों के लिए राहत की बात है।

थोड़े समय की तेजी थी

चीनी बाजार में हाल में थोड़े समय के लिए तेजी देखी गई थी। हालांकि यह तेजी ज्यादा समय तक कायम नहीं रही। भाव फिर से ठंडे पड़ गए हैं। उद्योग का कहना है कि फिलहाल कीमतें नियंत्रण में हैं। दाम में यह स्थिरता उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया था। अब स्थिति काबू में आती दिख रही है।

फसल पर कम बारिश का भी असर

दूसरी तरफ चीनी उद्योग की अगली बड़ी चिंता फसल को लेकर है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA (Indian Sugar and Bio-Energy Manufacturers Association) है। संगठन ने अभी गन्ना उत्पादन अनुमान जारी नहीं किया है। संगठन का मानना है कि पहले बारिश की तस्वीर साफ होनी चाहिए। राज्यों में बारिश का रुख साफ होने पर ही सही अनुमान लग सकेगा। इसके बाद ही गन्ने की फसल की बेहतर तस्वीर सामने आएगी। गन्ने का उत्पादन अनुमान उद्योग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इसी आधार पर मिलें अगले सीजन की खरीद और पेराई की योजना बनाती हैं।

छह हफ्तों पर नजर: ISMA

ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगावकर ने इस पर अहम जानकारी दी। उनके मुताबिक संगठन अगले करीब छह हफ्तों के आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। अलग-अलग राज्यों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए अभी अंतिम अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। शिरगावकर ने कहा कि बारिश का पैटर्न पहले स्पष्ट होना जरूरी है। इसके बाद अगली समिति बैठक में फसल अनुमान पर फैसला होगा। यह अनुमान मिलों के लिए आगे की रणनीति तय करने में मददगार होगा। किसानों को भी इससे गन्ने की बुवाई और बिक्री की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।

AI से बन रहा गन्ने की फसल का अनुमान

गन्ने की फसल के आकलन में इस बार नई तकनीक भी शामिल है। ISMA परंपरागत तरीकों के साथ AI आधारित तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है। संगठन के पास पहले से कई आकलन उपकरण मौजूद हैं। इस बार पिछले साल के मुकाबले AI तकनीक का ज्यादा उपयोग हो रहा है। मकसद यह है कि उत्पादन अनुमान पहले से ज्यादा सटीक बने। इससे मिलों और किसानों दोनों को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। सटीक अनुमान से गन्ना खरीद और पेराई सीजन की तैयारी भी आसान होती है। इससे मिलों को कच्चे माल की योजना बनाने में सुविधा मिलती है।

अगले साल पर खतरा

शिरगावकर ने अल नीनो को लेकर भी चिंता जताई है। उनके मुताबिक इसका असर अगले साल गन्ने की बुवाई पर पड़ सकता है। प्लांटेशन की योजना भी इससे प्रभावित हो सकती है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि चालू फसल पर असर बारिश पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में बारिश का रुख ही असली तस्वीर तय करेगा। अलग-अलग राज्यों में इसका असर एक जैसा नहीं रहने की आशंका है।

मौसम विभाग की आगे की रिपोर्ट्स इस मामले में अहम भूमिका निभाएंगी। उद्योग जगत इन आंकड़ों के आधार पर ही आगे की रणनीति बनाएगा।

आगे क्या हो सकता है

फिलहाल चीनी बाजार में दो अलग तस्वीरें दिख रही हैं। एक तरफ मौजूदा कीमतें स्थिर और नियंत्रण में हैं। दूसरी तरफ आने वाले सीजन की फसल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ISMA का फैसला आने वाले हफ्तों में साफ हो सकता है। तब तक बारिश के आंकड़ों पर सबकी नजर रहेगी। किसानों और मिलों दोनों के लिए यह अवधि अहम मानी जा रही है।

इस दौरान आने वाली हर रिपोर्ट बाजार की दिशा तय कर सकती है। अगर बारिश का रुख अनुकूल रहा तो उत्पादन को लेकर राहत मिल सकती है। वहीं बारिश में कमी रही तो अगले सीजन में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। फिलहाल उद्योग की नजर मौसम के अगले कुछ हफ्तों पर टिकी है। सही समय पर सटीक अनुमान से पूरे सेक्टर को दिशा मिल सकेगी।

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